तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शनिवार को मंदिरों में तमिल भाषा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया और साथ ही यह भी कहा कि मंदिरों के गर्भगृह में लोगों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और सभी को समानता का अधिकार मिलना चाहिए.
मुख्यमंत्री स्टालिन ने ये बातें पालनी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दो दिवसीय ग्लोबल मुथमिझ मुरुगन सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कही. इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य तमिल देवता मुरुगन की महिमा को और बढ़ाना है. इसका लक्ष्य देश और दुनिया भर के भगवान मुरुगन के भक्तों को एकजुट करना और भगवान मुरुगन के मूल सिद्धांतों को फैलाना और समझना है.
पालनी को भगवान मुरुगन के छह प्रमुख स्थानों में से तीसरा माना जाता है. यहां हो रहे इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे हैं, जिसमें वीआईपी, विद्वान, आध्यात्मिक नेता आदि शामिल हैं. कई विद्वान इस सम्मेलन में शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे और देवता की महानता पर चर्चा करेंगे. इसके अलावा, सम्मेलन में फोटो प्रदर्शनी, 3डी प्रदर्शन, सेमिनार आदि भी आयोजित किए जाएंगे.
तमिलनाडु के कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि डीएमके सरकार ने भगवान मुरुगन के लिए इस वैश्विक सम्मेलन का आयोजन अपनी "हिंदू-विरोधी" छवि को सुधारने के प्रयास में किया है, खासकर तब जब डीएमके मंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर विवादित बयान के बाद व्यापक आक्रोश फैल गया था.
इसके अलावा, कई लोगों का यह भी मानना है कि डीएमके भगवान राम के नाम पर बीजेपी की राजनीति का मुकाबला करने के लिए तमिल देवता मुरुगन को प्रोत्साहित करना चाहती है. हालांकि, उद्घाटन समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि उनकी सरकार सभी धर्मों का सम्मान करती है और उन्होंने राज्य में मंदिरों के सुधार, भक्तों के लिए अधिक सुविधाएं प्रदान करने आदि के लिए एचआरएंडसीई विभाग द्वारा किए गए कार्यों की सूची दी.
उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में जोर देकर कहा, "हर किसी की अलग-अलग मान्यताएं होती हैं. इसमें कोई ऊंच-नीच नहीं है. द्रविड़ मॉडल की सरकार कभी भी उन मान्यताओं के आड़े नहीं आई है. इसके अलावा, सरकार सभी के विश्वास के लाभ के लिए भी काम कर रही है. द्रविड़ मॉडल 'सब कुछ सबके लिए' की अवधारणा पर आधारित है."