तमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले में जहरीली शराब पीने से 61 लोगों की मौत हो गई. वहीं 100 से अधिक लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. इस घटना के बाद कई परिवार बेसहारा हो गए हैं. किसी ने अपने पिता को खो दिया तो किसी ने अपने बेटे को. ऐसा ही कुछ हुआ है एक 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की के साथ. जिस पर अब अपने छोटे भाइयों की जिम्मेदारी आ गई है. कारण, उसके माता-पिता की भी जहरीली शराब पीने से मौत हो गई.
16 वर्षीय कोकिला के कंधों पर अभी से बड़ी जिम्मेदारी आ गई है. माता-पिता की मौत के बाद अब उसे ही अपने 15 वर्षीय भाई हरीश और 14 वर्षीय भाई राघवन की देखभाल करनी पड़ेगी. दरअसल, कोकिला के पिता सुरेश एक पेंटर थे और उसकी मां वदिवुकारासी एक खेतिहर मज़दूर के रूप में काम करती थी. दोनों ने अपने बच्चों को पालने के लिए कड़ी मेहनत की. सभी एक छोटे से किराए के घर में रहते थे और 20x20 फ़ीट की जमीन पर घर बनाने का सपना देखते थे.
18 जून को सुरेश और वदिवुकारासी को पेट में तेज दर्द और धुंधली दृष्टि की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई. कोकिला बताती है कि एक अच्छे पिता होने के बावजूद सुरेश शराब के आदी थे. कोकिला जब भी पूछती कि वह शराब क्यों पीते हैं, तो उनका एकमात्र स्पष्टीकरण यह होता था कि उन्हें अपने शरीर के दर्द को शांत करने के लिए इसकी ज़रूरत है.
मां ने गलती से किया शराब का सेवन: कोकिला
कोकिला का दावा है कि उसकी मां शराब नहीं पीती थीं लेकिन उस दिन यह सोचकर कि यह 'ओमाथान का पानी', शराब पी ली. जिस पदार्थ का सेवन उसकी मां ने किया था, वह उसके पिता ने एक अलग कंटेनर में रखा था. राज्य सरकार ने परिवार को 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान की है. इस बीच, विपक्षी पार्टी ऑल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने 10 साल तक हर महीने 5,000 रुपये जमा करने और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने का वादा किया है.
'साहूकार उधार लौटाने को कर रहे परेशान'
हालांकि कोकिला को चिंता इस बात की है कि उसके पिता ने साहूकारों से जो पैसे उधार लिए थे, अब वे उसे वापस करने के लिए परेशान कर रहे हैं, उसे प्रताड़ित कर रहे हैं. 16 वर्षीय किशोरी, जो अब अपने और अपने भाइयों के भविष्य के लिए जिम्मेदार बन गई है, एक रसातल में खो गई है. लेकिन इस प्रतिकूल परिस्थिति से जूझने के बाद भी कोकिला कहती है कि वह अपने भाइयों को इंजीनियर और वकील बनाने और उन्हें गरीबी की दुनिया से बचाएगी.
भाइयों को इंजीनियर और वकील बनाना चाहती है कोकिला
कोकिला कहती है, "मेरे पिता और माता ही मेरी दुनिया थे. मेरे भाइयों को पढ़ना चाहिए और इंजीनियर और वकील बनना चाहिए. मैं इस स्थिति से निपटने की कोशिश कर रही हूं और रोना नहीं चाहती, लेकिन मेरे भाई ऐसा नहीं कर पा रहे हैं. वे रात में हमारे माता-पिता द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले थिजगा को देखते हैं और रोने लगते हैं. सड़क हमें उनकी याद दिलाती है. मेरे पिता ने दूसरों के लिए पैसे उधार लिए और वह भी हमारे नाम पर नहीं. हमें जो भी पैसे मिले, वे उधार चुकाने में देने होंगे. मेरे पिता और मां ने हमारा ख्याल रखने के लिए बहुत संघर्ष किया."
सरकार से लगाई घर मदद की गुहार
पढ़ाई में रूचि रखने वाली कोकिला की आंखों में अब भविष्य को लेकर डर है. वह कहती है, "अगर मेरे पिता जीवित होते, तो वे हमारे सारे कर्ज चुका देते और हमारे लिए घर बनवा देते. हम संघर्ष कर रहे हैं. मैंने मुख्यमंत्री और (जिला) कलेक्टर से घर देने की गुहार लगाई. मैं किराया देने में असमर्थ हूं. मेरे दादा-दादी हमारा भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं. मैं हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि हमें घर दे दिया जाए."