तमिलनाडु सरकार ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को उसके मौजूदा स्वरूप में लागू करने से इनकार कर दिया है. मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी को लिखे पत्र में कहा कि यह योजना जाति-आधारित भेदभाव को बढ़ावा देती है. इसके बजाय राज्य सरकार सामाजिक न्याय पर आधारित एक समावेशी योजना तैयार करेगी, जिससे सभी कारीगरों को लाभ मिले.
स्टालिन ने क्यों खारिज की योजना?
स्टालिन ने बताया कि उन्होंने 4 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर योजना में बदलाव की मांग की थी. इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने एक समिति बनाई, जिसने पाया कि योजना पारंपरिक जाति-आधारित व्यवसायों को ही बढ़ावा देती है.
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समिति ने सुझाव दिया कि किसी भी जाति या पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति को योजना का लाभ मिलना चाहिए. साथ ही कहा गया है कि इसमें न्यूनतम उम्र सीमा 35 साल होनी चाहिए ताकि योजना का लाभ उन्हीं को मिले जिन्होंने अपने परिवार के व्यवसाय को सोच-समझकर जारी रखा है. इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में लाभार्थियों का सत्यापन ग्राम पंचायत प्रमुख की जगह राजस्व विभाग के ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (VAO) से कराए जाने की बात कही गई है.
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तमिलनाडु की नई योजना
स्टालिन ने कहा कि वो एक नई समावेशी और व्यापक योजना लाएंगे, जो सभी कारीगरों को बिना किसी जातिगत भेदभाव के वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और अन्य जरूरी सुविधाएं देगी. यह योजना कारीगरों के विकास में मदद करेगी.
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केंद्र की प्रतिक्रिया
सीएम स्टालिन ने यह भी बताया कि 15 मार्च 2024 को एमएसएमई विभाग की ओर से जवाब आया था, लेकिन इसमें तमिलनाडु के सुझावों को शामिल करने का कोई जिक्र नहीं था. इसलिए राज्य सरकार ने तय किया कि वह इस योजना को लागू नहीं करेगी.