दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई कॉलेजों में पिछले पांच महीनों से सैलरी नहीं मिली है. इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ ने नॉर्थ कैंपस में शिक्षक दिवस के मौके पर प्रदर्शन किया. लेकिन जैसे ही प्रदर्शन शुरू हुआ पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया. शिक्षक दिवस के दिन बैनर लेकर शिक्षक सड़कों पर आ गए. ये शिक्षक दिल्ली यूनिवर्सिटी के उन कॉलेजों में पढ़ाते हैं जिन्हें दिल्ली सरकार फंड देती है.
शिक्षकों का आरोप है कि इन्हें पिछले 5 महीनों से कोरोना संकट काल में वेतन नहीं दिया गया है जिससे ये सभी परेशान होकर शनिवार को नार्थ कैंपस में भारी संख्या में इकट्ठा हुए और दिल्ली सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. इन शिक्षकों का दर्द ये है कि वेतन न मिलने के कारण इनके घरों में खाने-पीने तक की दिक्कत शुरू हो गई है. साथ कई महीने से इनके बच्चों के स्कूल की फीस तक नहीं गई है.
कॉलेजों को फंड दे सरकार
इन कॉलेजों में पढ़ा रहे प्रोफेसरों से जब आजतक ने बात की तो उनका दर्द छलक आया. डॉक्टर संगीता शर्मा धर और डॉ चमन सिंह बताते हैं कि उन्हें 5 महीने से सैलरी नहीं मिली है और ऐसे में रोजमर्रा के खर्चे निकालना तक मुश्किल हो गया है. लगातार सरकार से मांग के बावजूद जब सैलरी नहीं मिली तो उन्हें शिक्षक दिवस के मौके पर सड़कों पर उतरना पड़ा. शिक्षकों और बाकी स्टाफ के इस आंदोलन में अब डूटा भी कूद पड़ा है. शिक्षकों का समर्थन करने के लिए शिक्षक संघ के सदस्य भी आए लेकिन जैसे ही वो इकट्ठा हुए उन्हें हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया.
दिल्ली यूनिवर्सिटी एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य राजेश झा कहते हैं, 'ये अपने आप में ही कितना विरोधाभाषी है कि एक तरफ तो दोनों- केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षक दिवस पर कार्यक्रम कर रहे हैं तो दूसरी तरफ जब डीयू के शिक्षक पांच महीने से वेतन न मिलने पर विरोध प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें पुलिस के द्वारा गिरफ्तार कराया जाता है. ये तो हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और की तरह है.'
राजेश झा ने आगे कहा, 'आज जो पुलिस के द्वारा शिक्षकों पर कार्रवाई हुई है उसे किसी भी तरह न्यायसंगत कैसे ठहराया जा सकता है. इस महामारी के दौर में पांच महीने से शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन से महरूम रखना उनके अधिकारों का हनन है.' आने वाले दिनों में भी शिक्षक अपने आंदोलन को जारी रखने की योजना बना रहे हैं, ताकि दिल्ली सरकार से फंड मिलने वाले कॉलेजों को सरकार वित्तीय सहायता दे.
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