भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल करते हुए कतर की जेल से अपने आठ पूर्व नौसैनिकों को रिहा करा लिया. कतर के डहरा ग्लोबल फर्म के लिए काम करने वाले इन पूर्व नौसैनिकों को पहले मौत की सजा सुनाई गई थी.
फिर भारत सरकार के अनुरोध पर कतर के अमीर ने उम्रकैद में बदल दिया था. अब विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इन्हें रिहा करा लिया गया है और इनमें से सात पूर्व नौसैनिक भारत वापस भी लौट आए हैं.
टीम मोदी के इन चेहरों ने संभाल रखा था मोर्चा
हालांकि पूर्व नौसैनिकों से जुड़ा यह संकट 2 वर्षों से अधिक समय से चल रहा था लेकिन मोदी सरकार के एक्शन में उस समय तेजी आई जब कतर की अदालत में इन पूर्व नौसैनिकों को कुछ महीने पहले मौत की सजा सुनाई. एक ओर राजनयिक स्तर पर मोर्चा विदेश मंत्री एस जयशंकर के नेतृत्व में विदेश मंत्रालय ने संभाल रखा था तो वहीं दूसरी ओर बैक चैनल से बातचीत का जिम्मा राष्ट्रीय सुरक्षा सहलाकर अजीत डोभाल के पास था. शीर्ष सूत्रों ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अजीत डोभाल ने दो से तीन बार दोहा का दौरा किया, और वहां के नेताओं से बातचीत की.
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जब हाथ लगी भारत को अहम कामयाबी
भारत को इस मामले में सबसे बड़ी कामयाबी पिछले महीने तब हाथ लगी थी जब कतर प्रशासन ने भारतीय नौसैनिकों के मौत की सजा को कम करके उम्र कैद में बदल दिया था. लेकिन, इसके बाद भी भारत अपने पूर्व नौसैनिकों को जेल से छुड़ाने और वापस देश लाने की दिशा में काम करता रहा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल नवंबर में अपने दुबई दौरे के समय इस मामले में कतर के नेतृत्व से सीधी बातचीत की थी. सभी पूर्व नौसैनिकों की रिहाई भारत सरकार के लगातार प्रयासों और सभी प्रकार के राजनयिक चैनलों के एक साथ साझा प्रयास और बातचीत के कारण सुनिश्चित किया जा सका है.
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कभी सार्वजनिक नहीं किया गया आरोप
अब कतर की जेल में बंद आठ पूर्व भारतीय नौसेना के कर्मचारियों के रिहा होने और देश लौट आने की खबर आई. ताजा डेवलपमेंट अक्टूबर में उनकी मौत की सजा को अलग-अलग अवधि की जेल की सजा में बदलने के 46 दिन बाद हुआ है. अब उनमें से सात नौसनिक घर लौट आए हैं. ये पूर्व भारतीय नौसेना के अधिकारियों को कतर में जासूसी के आरोपों का सामना करना पड़ा था, लेकिन न तो कतर के अधिकारियों द्वारा और न ही नई दिल्ली की तरफ से उनके खिलाफ लगे आरोपों को कभी सार्वजनिक किया गया.