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थाना-कचहरी, ऑफिस-अस्पताल... हर जगह आम आदमी को नोच रहा रिश्वत और भ्रष्टाचार का 'भेड़िया'

कभी कहीं पुल टूटता है. कभी कहीं सडक टूटती है. बाद में पता चलता है कि सरकारी करप्शन जिम्मेदार था. जन्म प्रमाण पत्र से लेकर घर की रजिस्ट्री करानी हो या मृत्यु प्रमाण पत्र लेना हो, आज भी सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोर बाबू, कर्मचारी, अधिकारी आपके काम पर कुंडली मारकर बैठ जाते हैं.

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रिश्वतखोरी हर विभाग का हिस्सा बन चुकी है
रिश्वतखोरी हर विभाग का हिस्सा बन चुकी है

आजादी का अमृतकाल चल रहा है, देश को स्वतंत्र हुए इतने साल लेकिन एक समस्या ऐसी है जो जस की तस बनी हुई है. ऐसा नहीं है कि इस समस्या के समाधान पर कभी बात नहीं हुई, या फिर सरकारों ने इसके लिए सख्ती भरे कदम नहीं उठाए, लेकिन फिर भी जिस तरह से हर बार ये परेशानी अपना सिर उठा लेती है, ये तो तय है कि अब तक हुए हर समाधान इसे खत्म करने के लिए नाकाफी हैं और ये समस्या इतने सालों से देश को लगातार खोखला ही कर रही है. ये समस्या है रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार. इसके खिलाफ सरकारों, सरकारी विभागों, सरकारी एजेंसियों को जगाना बेहद जरूरी है. 

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उत्तर प्रदेश में रिश्वतखोरी पर एक्शन
सबसे बड़ी बात कि कहीं न कहीं, आपका या आपके परिवार का इससे जरूर सामना होता आया होगा. समस्या सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी की. कभी कहीं पुल टूटता है. कभी कहीं सडक टूटती है. बाद में पता चलता है कि सरकारी करप्शन जिम्मेदार था. जन्म प्रमाण पत्र से लेकर घर की रजिस्ट्री करानी हो या मृत्यु प्रमाण पत्र लेना हो, आज भी सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोर बाबू, कर्मचारी, अधिकारी आपके काम पर कुंडली मारकर बैठ जाते हैं. ऐसे ही भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में इन दिनों एक्शन हो रहा है.

अयोध्या में खंड शिक्षा अधिकारी के लेखाकार ने मांगी थी एक लाख की घूस
अयोध्या में ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर यानी खंड शिक्षा अधिकारी का लेखाकार एक लाख की घूस लेते पक़ड़ा गया है. मृतक टीचर के जीपीएफ का पैसा निकलवाने के बदले 1 लाख की घूस मांगी. रंगेहाथ उत्तर प्रदेश की विजिलेंस टीम ने पक़ड़ लिया. रिश्वत मांगी तो विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया. बीएसए कार्यालय में जैसे ही इसने मृतक टीचर के परिजनों से रिश्वत का एक लाख रुपया अपने हाथ में लिया. यूपी विजिलेंस की टीम ने दबोच लिया. 

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मुरादाबादः SDM का स्टेनो पचास हजार रुपये की घूस लेते पकड़ा गया
ऐसी ही दूसरी घटना मुरादाबाद में सामने आई. यहां तहसील में किसान की जमीन का लैंड यूज बदलने के बदले घूसखोरी हो रही थी. यहां ठाकुरद्वारा तहसील में SDM का स्टेनो पचास हजार रुपये की घूस लेते पकड़ा गया. विजिलेंस की टीम ने शिकायत मिलने के बाद इसे रिश्वत का पैसा गिनते पकड़ा. टीम वहीं से इस घूसखोर बाबू को घसीटते हुए लेकर बाहर निकली. जब इसे पकड़ा गया तो ये रिश्वत का पचास हजार रुपए मिलने के बाद मेज के नीचे अपनी उंगलियों से गिनाई करता मिला. 

अमेठीः एसडीएम का स्टेनो यहां भी ले रहा था घूस
अमेठी में रिश्वतखोरी वाली दीमक खत्म करने के लिए विजिलेंस टीम फिल्मी स्टाइल में पहुंची. यहां एसडीएम का स्टेनो घूस का पैसा लेकर जेब में रखा ही था कि एंटी करप्शन ब्यूरो वालों ने कहा हैलो तुमको चारों तरफ से घेर लिया गया है. हक्का-बक्का घूसखोर पेशकार समझ ही नहीं पा रहा था कि अब क्या करे. एसीबी ने इसके बाद भ्रष्टाचारी की जेब से उन नोटों को निकालना शुरु किया, जिसे ये हर काम के बदले लेता आया है. जैसे इस बार शिकायत मिली कि बंटवारे के विवाद में इसने स्टे ऑर्डर हटवाने के लिए घूस ली थी. 

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कानपुरः एसीपी दफ्तर का हेड कांस्टेबल मांग रहा था घूस
एक ने कॉलर पकड़ी है. एक ने कमर. एक ने हाथ. चौथे ने सीने से दबोचा है. ऐसी तस्वीरें देखते ही आम लोग सड़क पर कहते हैं कि अच्छा हुआ घूसखोर पकड़ा गया. ये वर्दीधारी कानपुर के एसीपी दफ्तर का हेड कांस्टेबल है. जिसने जानकी देवी नाम की महिला को महिला कल्याण विभाग से मिलने वाले पैसे के लिए होने वाले सत्यापन के बदले 15 हजार की घूस ली थी. पैसा इसने जैसे ही पकड़ा, विजिलेंस टीम ने ईमानदारी को कुचलने वाले इस नोटखोर को दबोच लिया. 


ऐसा लगता है कि जैसे कोई विभाग बचा ही नहीं है. जहां घुन की तरह सबकुछ चट करने के लिए हर कुर्सी पर रिश्वतखोर न बैठे हों. कानपुर विकास प्राधिकरण की सीढ़ियों से जिसे खींचते हुए लाया जा रहा है. ये फोर्थ क्लास कर्मचारी है, लेकिन भ्रष्टाचार में फर्स्ट क्लास पाया गया. जो ईडब्ल्यएस कोटे के तहत मिले मकान की लटकी हुई रजिस्ट्री को पूरा कराने के बदले 10 हजार रुपए लेता पकड़ा गया. इसी तरह नगर पालिका में जल विभाग का जेई, जिसे दो लाख से ज्यादा की घूस को लेते पकड़ा गया. जिसने ठेके का बिल पास कराने के लिए पैसे मांगे. 

दस दिन के भीतर उत्तर प्रदेश में विजिलेंस विभाग ने जो एक्शन लिया है. उसकी ये तस्वीर देखकर अगर ये लगता है कि करप्शनखोरों को पक़ड़ा जा रहा है तो सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में इतनी रिश्वतखोरी चल रही है कि शिक्षा विभाग हो या पुलिस थाना. तहसील दफ्तर हो या फिर नगर पालिका. जहां देखो वहीं क्या बिना पैसा काम नहीं हो रहा। और तब यूपी के ही पूर्व मंत्री का जुलाई महीने का बयान याद करिए.पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह, कहते हैं कि 'हमें ये कहने में संकोच नहीं है कि मेरे 42 वर्ष के राजनीतिक जीवन में तहसील औऱ थाने का ऐसा भ्रष्टाचार न सोच सकते थे, न देख सकते थे...वो अकल्पनीय है.

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क्या जो जुलाई में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री समेत कई और नेता कहते आए, वो हकीकत है कि विभाग चाहे जो हो, बिना दिए कैश काम की नहीं होती ऐश और ये सिर्फ एक प्रदेश का मामला नहीं है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, 
- 2023 में भ्रष्टाचार के मामले में भारत भारत 180 देशों में से 93वें नंबर पर है. 
- 2023 में सभी श्रेणी के अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की कुल 74,203 शिकायतें मिलीं. 

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट कहती है कि टॉप फाइव विभाग जहां भ्रष्टाचार की शिकायत मिली वो हैं, 
 - केंद्र स्तर पर रेलवे - 10,447 
- सार्वजनिक बैंक - 7,004 
- दिल्ली सरकार - 6,638 
- आवासीय और शहरी विभाग - 4,476 
- कोयला मंत्रालय - 4,420 
- श्रम मंत्रालय - 3,217 

- ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल इंडिया-लोकल सर्कल्स सर्वे – 2019 की रिपोर्ट में पता चला कि कहां बिना घूस दिए काम नहीं होता तो 
प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और जमीन से जुड़े विभागों - 26 फीसदी 
पुलिस - 19 
फीसदी म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन – 13 फीसदी 
ट्रांसपोर्ट विभाग - 13 फीसदी 
टैक्स विभाग - 8 फीसदी 

रिपोर्ट से साफ है कि केंद्र से लेकर हर राज्य के सरकारी विभागों में अब भी करप्शन की दीमक अच्छे से ईमानदारी को खा रही हैं. इन घूसखोर दीमक को खत्म करने के लिए जरूरी है कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई और तेज की जाए, जो अधिकारी-कर्मचारी घूस लेते पक़ड़े जाएं इन्हें तय समय में सजा दिलाई जाए. घूस लेने वाले अधिकारियों की संपत्ति की भी जांच हो और आय से अधिक संपत्ति मिलने पर तुरंत उसे जब्त किया जाए.

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जंगल का भेड़िया और सिस्टम का भेड़िया !
भ्रष्टाचार की घुन और दीमक के बाद अब सिस्टम के भेड़ियों के खिलाफ दस्तक देने की बारी है. आपने कई दिनों से उत्तर प्रदेश के बहराइच में भेड़िये के आतंक की खबरें देखीं सुनी होंगी. भेड़िया जो रात के अंधेरे में अधिकतर आता है. छोटे बच्चों को उठाकर ले जाता है. हमला करने वाले इस भेड़िये को तो पकड़ लिया जाएगा, लेकिन सवाल है कि वो लोग कैसे पकड़े जाएंगे जो दिन के उजाले में भी आम लोगों का शिकार करते हैं. ये रिपोर्ट सिर्फ जंगल से इंसानी बस्ती में आकर हमला करने वाले भेडियों पर नहीं बल्कि भ्रष्टाचार, लापरवाही, आलसी और जनता को कुछ नहीं समझने वाले सिस्टम के भेड़ियों को उजागर करने के लिए तैयार की है.

हुआ यूं कि भेड़िये के डर से एक बच्ची छत से गिर गई और गंभीर घायल हो गई, आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन यहां अलग ही नजारा देखने को मिला. पीड़िता बच्ची जिसका नाम मोहिनी है, उसे इलाज के बजाय अस्पताल के बाहर पेड़ के नीचे लेटना पड़ा. क्यों, इस सवाल पर उसके पिता ने बताया कि, 'भेड़िए के डर से दूसरे की छत पर लिटाए थे. ये बच्चा नीचे गिर गया. सिर में चोट लगी है. इमरजेंसी में आए तो कहा चिल्ड्रेन वॉर्ड ले जाएं. यहां आए तो कहा कि दस बजे डॉक्टर आएंगे तब देखेंगे, इसलिए बाहर पेड़ के नीचे बैठे हैं.

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मतलब सरकारी अव्यवस्था के जंगल में मोहिनी बुधवार सुबह यूं पेड़ के नीचे लेटा दी गई, जिसे सरकारी कुनीतियों के भेड़ियों के नाखूनों ने ऐसा घाव दिया कि दर्द में भी धूप में बाहर लेटना पड़ा. दरअसल सरकारी अमला अभी सिर्फ भेड़िया को पक़ड़ने और ज्यादा से ज्यादा भेड़िए के हमले से जख्मी का इलाज करने में अपनी तत्परता दिखा रहा है. सरकारी अस्पताल के़ डॉक्टर की प्राथमिकता में अभी वो बच्ची है ही नहीं, जिसके पिता के पास छत वाला घर नहीं. जो गरीब आदमी भेड़िए के डर से बचने को बच्ची को लेकर पड़ोसी की छत पर सोने जाता है. जिस गरीब आदमी की बेटी छत से गिर जाती है और भेड़िए के खौफ से मिले जख्म में तुरंत इलाज की जगह उसे कहा जाता है कि दस बजे तक रुको डॉक्टर साहब आएंगे. इस रिपोर्ट के बाद मोहिनी का इलाज तो शुरू हो जाता है, लेकिन सवाल तो इस बात का बना रहेगा, कि जो सरकारी व्यवस्था में जनता का खून जोंक की तरह चूस लेने वाले नाकारे, अधिकारी, कर्मचारी हैं, उनको कब पकड़ा जाएगा.

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