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साइबर फ्रॉड के तीन केस... गुरुग्राम से मुंबई तक 60 लाख की ठगी, शातिर ऐसे लगा रहे लोगों को चूना

इंटरनेट और स्मार्टफोन्स की दुनिया में हर कदम पर आपको सतर्क रहने की जरूरत है. क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही लाखों की चपत लगवा सकती है. गुरुग्राम से लेकर मुंबई तक साइबर अपराधियों ने अलग-अलग तरीकों से करीब 60 लाख रुपये की ठगी की है.

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सांकेतिक तस्वीर. (फोटो- Vani Gupta/aajtak.in)
सांकेतिक तस्वीर. (फोटो- Vani Gupta/aajtak.in)

देशभर में साइबर फ्रॉड का जाल तेजी से फैलता जा रहा है. शातिर नए-नए तरीकों से भोले-भाले लोगों को चूना लगा रहे हैं. ऑनलाइन धोखाधड़ी के 3 नए मामले सामने आए हैं. इसमें एक कारोबारी समेत 3 लोगों से करीब 60 लाख रुपये की ठगी की गई है. पुलिस के मुताबिक एक कारोबारी को बिजनेस प्रपोजल के नाम पर 42 लाख रुपये की चपत लगाई गई है. वहीं, दूसरे मामले में एक महिला से 15 लाख रुपये की ठगी हुई है, जबकि तीसरा केस मुंबई का है. यहां सस्ती दरों पर डॉलर देने के नाम पर बुजुर्ग से पौने तीन लाख की ठगी हुई है.

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तीनों केसों को सिलसिलेवार तरीके से पढ़ें...

1- पुलिस के मुताबिक गुरुग्राम के कारोबारी सुनील अरोड़ा से श्रेया जोशी नाम की एक महिला 42 लाख रुपये का साइबर फ्रॉड किया है. FIR के अनुसार सुनील ने अपनी शिकायत में बताया कि वह पिछले साल दिसंबर में इंस्टाग्राम पर संपर्क में आया था. श्रेया जोशी ने US की अपनी कंपनी से केसर, जीरा, तेल और केसर पाउडर की बिक्री के लिए एक बिजनेस प्रपोजल दिया था. उन्होंने मुझे यह सामग्री खरीदने के लिए मुंबई में रिया शर्मा से संपर्क करने के लिए कहा था.

सुनील ने बताया कि हमने रिया से सैंपल खरीदे और लैब में जांच के लिए दे दिए. वहां से रिपोर्ट आने के बाद डील हुई. हमने किस्तों में श्रेया नाम की महिला को 42 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. लेकिन पैसा ट्रांसफर करने के बाद उसने फोन कॉल उठाना बंद कर दिया. वह ई-मेल का जवाब भी नहीं दे रही है. श्रेया का कुछ भी पता नहीं है. पुलिस ने श्रेया जोशी और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और आईटी अधिनियम साइबर अपराध की धारा 66-D के तहत FIR दर्ज की है.

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2- दूसरे केस में रश्मि नाम की महिला के साथ 15 लाख का साइबर फ्रॉड हुआ है. दरअसल, उन्होंने कुछ ऑनलाइन ऑर्डर किया था. लेकिन पार्सल नहीं पहुंचने पर उन्होंने कूरियर कंपनी के कस्टमर केयर नंबर की तलाश की. महिला की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने गलत लिंक पर क्लिक कर दिया. इसी लिंक से साइबर फ्रॉड हो गया. महिला के खाते से 9 फरवरी से 23 फरवरी के बीच 15 लाख रुपये निकाल लिए गए.

3- साइबर फ्रॉड की तीसरी वारदात मुंबई में हुई. शातिरों ने सस्ती दरों पर डॉलर देने के नाम पर बुजुर्ग से पौने तीन लाख रुपये की ठगी कर ली. जानकारी के मुताबिक साइबर फ्रॉड बुजुर्ग से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जुड़े थे. उन्होंने बुजुर्ग को अपनी बातों में फंसाया और एक गड्डी बुजुर्ग को थमाई. इसमें ऊपर तो डॉलर थे, लेकिन अंदर सादे कागज वाले नकली नोट थे.  

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इन तरीकों से भी ठग रहे शातिर

साइबर फ्रॉड के बढ़ते केसों के बीच आजतक लोगों को जागरूक कर रहा है. आप इन तरीकों को अपनाकर ऑनलाइन ठगी से बच सकते हैं. 

वीडियो कॉल के जरिए ब्लैकमेलिंग हो या फिर आपके नाम पर लोन लेकर फ्रॉड करना. स्कैम के कई तरीके पिछले कुछ वक्त में सामने आइ हैं. स्कैम... कुछ वक्त पहले तक ये टर्म बड़े घोटालों के लिए इस्तेमाल होता था, लेकिन अब आम हो चुका है. हर दिन यूजर्स के साथ ऑनलाइन फ्रॉड या स्कैम हो रहा है. 

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OTP फ्रॉड 

ये फ्रॉड कुछ ज्यादा ही चलन में है. इस तरह के फ्रॉड्स को स्कैमर्स कई तरह से अंजाम देते हैं. मसलन कुछ मामलों में ये आपसे सीधे OTP मांगते हैं, तो कुछ में प्रोडक्ट रिटर्न के नाम पर आपसे OTP मांगते हैं. बीते दिनों इस तरह के कई मामले सामने आए हैं. इसे लेकर NCIB ने एक ट्वीट भी किया था. स्कैमर्स इस तरह के फ्रॉड में आपके घर एक कैश ऑन डिलिवरी ऑर्डर लेकर पहुंचते हैं. जब लोग इस ऑर्डर को लेने से मना करते हैं, तो वो इसे कैंसिल करने की बात कहते हैं. फिर एक फर्जी कस्टमर केयर के नाम से आपके पास OTP आता है. जैसे ही आप ओटीपी शेयर करते हैं, स्कैमर्स का काम हो जाता है.

कस्टमर केयर फ्रॉड

हमें कोई भी जानकारी चाहिए होती है, तो गूगल कर लेते हैं. कई बार ऐसा करना भारी पड़ जाता है. दरअसल, स्कैमर्स फेक वेबसाइट्स के जरिए गूगल पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर रजिस्टर करते हैं. ऐसे में जब कोई शख्स कस्टमर केयर नंबर सर्च करता है, तो कई बार ये फेक वेबसाइट्स सबसे ऊपर नजर आती हैं. जैसे ही कोई व्यक्ति इन फ्रॉडस्टर्स को कस्टमर केयर समझकर कॉल करता है, ये उनके साथ स्कैम कर लेते हैं. हाल में ही ऐसा एक मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला ने ट्रेन टिकट रिफंड के लिए IRCTC कस्टमर केयर का नंबर सर्च किया था. स्कैमर ने उन्हें झांसे में लेकर 5 लाख रुपये की ठगी कर ली.

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फिशिंग लिंक के जरिए

ऑनलाइन ठगी के शुरुआती तरीकों में से एक फिशिंग लिंक का था, जो आज भी काम करता है. इसमें स्कैमर्स टार्गेट यूजर्स को एक फिशिंग लिंक भेजते हैं. ये लिंक कई तरह से भेजे जा सकते हैं. कभी SMS के जरिए किसी ऑफर के रूप में, तो कभी वॉट्सऐप के जरिए किसी बिल के रूप में. इस तरह के स्कैम में यूजर्स को दो तरह से टार्गेट किया जाता है. पहला तरीका होता है टार्गेट के फोन में किसी ऐप को प्लांट करना. ऐसे मामले आजकल कुछ ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. वहीं दूसरा तरीका होता है, जिसमें यूजर्स खुद स्कैमर्स को अपनी डिटेल्स दे देते हैं. दरअसल, स्कैमर्स फिशिंग लिंक में किसी वेबसाइट का फेक वर्जन क्रिएट करते हैं और उसे ही सेंड करते हैं. ऐसे में जब यूजर अपनी डिटेल्स एंटर कर रहा होता है, तो उसे लगता है कि ये डिटेल्स ओरिजनल वेबसाइट्स पर जा रही हैं. मगर ऐसा होता नहीं है. यूजर्स की एंटर की गई सारी डिटेल्स स्कैमर्स के पास पहुंच जाती हैं और फिर उनके साथ ठगी होती है.

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सिम स्वैपिंग

सिम स्वैपिंग का तरीका भी काफी पॉपुलर है. सिम स्वैपिंग या कार्ड स्वैपिंग में स्कैमर्स किसी टार्गेट के बारे में पहले तो सभी डिटेल्स इकट्ठा करते हैं. इन्हीं डिटेल्स के आधार पर स्कैमर्स यूजर के नाम पर डुप्लीकेट सिम कार्ड खरीद लेते हैं. किसी यूजर की डिटेल्स हासिल करने के लिए स्कैमर्स सोशल इंजीनियरिंग, फिशिंग लिंक और दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. 

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मनी फॉर लाइक

इस तरह के स्कैम का शिकार कई लोग हो रहे हैं. इसमें स्कैमर्स लोगों को YouTube पर किसी चैनल को सब्सक्राइबर करने और वीडियो को लाइक करने के बदले पैसे देने का ऑफर करते हैं. यूजर को फंसाने के लिए शुरुआत में स्कैमर्स कुछ वीडियोज के लिए पैसे भी देते हैं, जिससे किसी को उन पर शक ना हो. 

सेक्सटॉर्शन 

इसके नाम से ही आप इस तरह के स्कैम के बारे में समझ सकते हैं. इसमें सेक्स और एक्सटॉर्शन दोनों होता है. अमूमन स्कैमर्स WhatsApp Video Call के जरिए अपना शिकार खोजते हैं. स्कैमर्स किसी यूजर को वॉट्सऐप मैसेज करते हैं. इसमें महिलाओं का इस्तेमाल किया जाता है. हो सकता है कि वॉट्सऐप अकाउंट पर किसी लड़की की DP लगी हो. थोड़ी बातचीत के बाद आपके फोन पर एक वीडियो कॉल आती है और जैसी ही आप वीडियो कॉल रिसीव करेंगे. एक महिला आपत्तिजनक स्थिति में आपको मिलेगी. जब तक आप फोन काटते हैं स्कैमर्स आपका एक वीडियो बना लेते हैं और फिर इसके आधार पर यूजर्स को ब्लैकमेल किया जाता है. 

लॉटरी के नाम पर फ्रॉड

वैसे तो अब इस तरह के स्कैम कम देखने को मिलते हैं, लेकिन एक वक्त पर इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया गया. स्कैमर्स लोगों को ठगने के लिए लॉटरी के नाम पर उन्हें मैसेज करते हैं. जैसे ही कोई शख्स उनके जाल में फंसता है, तो वो प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे मांगते हैं. चूंकि लॉटरी की रकम इतनी बड़ी रखी जाती है कि यूजर्स प्रोसेसिंग फीस के जाल में आसानी से फंस जाते हैं. 

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फर्जी वेबसाइट और डिस्काउंट का खेल 

कई बार हम ज्यादा डिस्काउंट के लिए ऑनलाइन सर्च करते रहते हैं और फिर ठगों के जाल में फंस जाते हैं. हाल में ऐसे एक मामले का खुलासा हुआ है, जहां स्कैमर्स Dmart, Big Bazar और दूसरी पॉपुलर कंपनियों ने नाम से फेक वेबसाइट बनाकर लोगों के साथ ठगी कर रहे थे. हैवी डिस्काउंट का लालच देकर स्कैमर्स यूजर्स का डेटा और पर्सनल डिटेल्स चुराते हैं. फिर इन डिटेल्स का इस्तेमाल करके लोगों के बैंक अकाउंट से पैसे चोरी करते हैं. दिल्ली-एनसीआर में एक्टिव स्कैमर्स का ये रैकेट इन फर्जी वेबसाइट्स की मदद से लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगा चुका था. ये तरीका सिर्फ पॉपुलर शॉपिंग साइट्स से ही नहीं जुड़ा है. 

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सब्सक्रिप्शन और ऑफर का खेल 

कई बार स्कैमर्स लोगों से ठगी के लिए सब्सक्रिप्शन और ऑफर का खेल खेलते हैं. इस तरह के स्कैम को ईमेल के जरिए अंजाम दिया जाता है. इसमें स्कैमर्स एक मेल भेजते हैं, जो पूरी तरह से ओरिजनल लगता है और इसमें काफी कम कीमत पर किसी प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन ऑफर करते हैं. 

कैसे बच सकते हैं आप? 

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- अब सवाल आता है हैकिंग के इन तरीकों से आप कैसे बच सकते हैं. इंटरनेट की इस दुनिया में साइबर फ्रॉड का जाल हर कदम पर है, तो बचने का सबसे प्रभावी तरीका सावधानी और सतर्कता है. आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा, जिससे आप स्कैम के जाल से बच सकते हैं. 

- सोशल मीडिया पर अपनी पर्सनल डिटेल्स शेयर करते हुए सावधान रहें. स्कैमर्स आपकी डिटेल्स सोशल मीडिया से चुरा सकते हैं. आप चाहें तो अपनी डिटेल्स को हाइड या प्राइवेट भी रख सकते हैं. किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक ना करना. ये साइबर वर्ल्ड का बेसिक रूल है, जो आपको सुरक्षित रखता है. किसी अनजान लिंक पर

- क्लिक करके आप फिशिंग का शिकार हो सकते हैं. 

- कस्टमर केयर का नंबर सर्च करते हुए सावधान रहें. संभव हो तो उस प्लेटफॉर्म के आधिकारिक ऐप से ही कस्टमर केयर का नंबर निकालें. अगर आप गूगल पर सर्च करके किसी वेबसाइट से नंबर उठाते भी हैं, तो उसे ठीक से चेक कर लें. मसलन वेबसाइट का नाम क्या है. नंबर टोल फ्री वाला है या फिर प्राइवेट. 

- किसी भी तरह के अनजान ऐप को अपने स्मार्टफोन में डाउनलोड ना करें. इससे स्कैमर्स के हाथ आपके फोन का एक्सेस लग जाता है. 
सेक्सटॉर्शन जैसे मामलों में भी आपको सतर्क रहने की जरूरत है. ऐसे मामलों में किसी अनजान वीडियो कॉल का जवाब ना दें. अगर आप इस जाल में फंस भी जाते हैं, तो पुलिस को इसकी जानकारी दें. नाकि स्कैमर्स को बात दबाने के लिए पेमेंट करते रहें. 
सब्सक्रिप्शन लेना हो तो भी उस कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या फिर किसी ऑथराइज्ड पार्टनर से ही खरीदें. 

- OTP शेयर ना करें. हालांकि, कुछ मामलों में आपको OTP बताना पड़ता है, तो ऐसे मामलों में चेक करें कि फोन पर आया OTP किस लिए है. बिना मैसेज पढ़े किसी को अपना OTP ना भेजें

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