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देशभर में 3 साल में 131 ट्रेन हादसे, पिछले 14 दिन में 8 एक्सीडेंट, कितनी हैप्पी है रेल की जर्नी?

भारतीय रेल में जनता की जान सुरक्षित होने की गारंटी एक बार फिर ट्रेन समेत पटरी से उतर गई है. उतर गए हैं भारतीय रेल के वो डिब्बे, जिन्हें ना जाने कब से सुरक्षा कवच पहनाने के नाम पर वाहवाही लूटी गई है, लेकिन हर बार पटरी से ट्रेन उतर जाती है. 6 हफ्ते में देश में ट्रेन हादसे 17 लोगों की जान ले चुके हैं. झारखंड में ही 6 महीने में तीसरा रेल हादसा हुआ है.

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 झारखंड में हावड़ा एक्सप्रेस की 18 बोगियां पटरी से उतर गईं.
झारखंड में हावड़ा एक्सप्रेस की 18 बोगियां पटरी से उतर गईं.

ट्रेन में सुरक्षित सफर को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. ट्रेन में यात्रा करने वाले लोग अपनी मंजिल तक सुरक्षित पहुंचेंगे या नहीं, कहीं ट्रेन हादसे का शिकार तो नहीं हो जाएगी. ये चिंता आमजन को सताने लगी है. क्योंकि यात्रियों के लिए सुरक्षा कवच का वीडियो बनाने वाले मौजूदा रेल मंत्री के कार्यकाल में हर महीने 2 पैसेंजर ट्रेन और 1 मालगाड़ी पटरी से उतर जा रही है. 

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भारतीय रेल में जनता की जान सुरक्षित होने की गारंटी एक बार फिर ट्रेन समेत पटरी से उतर गई है. उतर गए हैं भारतीय रेल के वो डिब्बे, जिन्हें ना जाने कब से सुरक्षा कवच पहनाने के नाम पर वाहवाही लूटी गई है, लेकिन हर बार पटरी से ट्रेन उतर जाती है. उतर जाता है आम आदमी की सुरक्षा का भरोसा. सुरक्षित घर पहुंचने का विश्वास औऱ बिखर जाता है कि पटरियों पर डिब्बों की तरह ये ऐतबार कि जिस ट्रेन का सफर करने लायक पैसा जनता के पास होता है, उस ट्रेन से सफर सुरक्षित भी होगा. 

6 हफ्ते में ट्रेन हादसों में 17 लोगों की मौत

6 हफ्ते में देश में ट्रेन हादसे 17 लोगों की जान ले चुके हैं. झारखंड में ही 6 महीने में तीसरा रेल हादसा हुआ है. अबकी बार मुंबई-हावड़ा मेल के 18 डिब्बे पटरी से उतरे हैं, दावा है कि ट्रैक के बगल में पहले से मालगाड़ी के उतरे डिब्बे हादसे की वजह हो सकते हैं. इस हादसे में 2 यात्रियों की मौत हुई है और 20 से ज्यादा जख्मी हो गए हैं. 

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पिछले 3 साल में 131 रेल हादसे हुए

RTI के जरिए रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 7 जुलाई 2021 से 17 जून 2024 तक देश में 131 ट्रेन दुर्घटनाएं हुईं हैं, इनमें से 92 ट्रेन डिरेलमेंट की घटनाएं हैं. इन दुर्घटनाओं में 64 पैसेंजर ट्रेन और 28 मालगाड़ी शामिल हैं, पिछले तीन सालों में हर महीने 2 पैसेंजर ट्रेन और 1 मालगाड़ी डिरेल हुई है. 

पिछले 14 दिन में 8 बार बेपटरी हुईं ट्रेनें

सिर्फ जुलाई महीने की ही बात करें तो 18 जुलाई को चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ रेल हादसा हुआ था, इसमें 4 लोगों की मौत हुई थी और 31 लोग घायल हुए थे. 19 जुलाई को गुजरात के वलसाड में मालगाड़ी पटरी से उतरी थी, 20 जुलाई को यूपी के अमरोहा में मालगाड़ी के 12 डब्बे पटरी से उतरे थे. 21 जुलाई को राजस्थान के अलवर में मालगाड़ी के 3 डब्बे पटरी से उतरे थे. 21 जुलाई को ही पश्चिम बंगाल के रानाघाट में मालगाड़ी पटरी से उतरी थी. 26 जुलाई को ओडिशा के भुवनेश्वर में मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी, 29 जुलाई को बिहार के समस्तीपुर में बिहार संपर्क क्रांति के डिब्बे अलग हो गए थी और 30 जुलाई को झारखंड के चक्रधरपुर में हावड़ा से मुंबई जा रही यात्री ट्रेन पटरी से उतर गई. 

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सिर्फ 2% रेल रूट पर कवच सिस्टम इंस्टॉल हुआ

अब आम आदमी पूछने लगा है कि जिस टिकट पर हैप्पी जर्नी रेलवे लिखता है, वाकई वो जनता की जर्नी हैप्पी चाहता भी है या नहीं. क्योंकि अब तक सिर्फ 2% रेल रूट पर ही कवच सिस्टम इंस्टॉल हो पाया है, जिससे दावा होता है कि ट्रेन को टक्कर से बचाया जा सकता है. यानी भारतीय रेलवे नेटवर्क के 97% से ज्यादा हिस्से में टक्कर रोधी सिस्टम अभी लगा तक नहीं है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कितने साल तक रेल कवच के इंतजार में टक्कर आम आदमी सहता रहे?

रेलवे में 1.5 लाख पद खाली

रेलवे की एक हकीकत ये भी है कि आरटीआई के मुताबिक रेलवे में सुरक्षा के लिए जिम्मेदार लगभग 1.5 लाख पद खाली पड़े हैं. RTI के मुताबिक रेलवे में ट्रैक मेंटेनर, पॉइंट्समैन, इलेक्ट्रिक सिग्नल मेंटेनर और सिग्नलिंग सुपरवाइजर जैसे पद खाली पड़े हुए हैं. अधूरी सुरक्षा तैयारी से ट्रैक पर दौड़ती ट्रेन पटरी से पलटती रहेंगी, तो फिर आम आदमी को सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?

रेल कवच के लिए 1100 करोड़ रुपए आवंटित

भारतीय रेलवे में अबकी बार रेल कवच के लिए करीब 1100 करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं. दावा है कि सभी रूट पर रेल कवच के लिए जरूरत 45 हजार करोड़ से ज्यादा की है, इस हिसाब से विपक्ष कहता है कि हर रूट पर टक्कर से ट्रेन को बचाने वाला सिस्टम लगाने में कई दशक लग जाएंगे, तो क्या तब तक जनता की जान सस्ती समझी जाएगी. 

(रिपोर्ट- आजतक ब्यूरो)
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