आरजी कर अस्पताल में तैनात दो डॉक्टर अब उसी अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में जांच के घेरे में हैं. सीबीआई सूत्र ने पुष्टि की है कि डॉ. सुजाता घोष और डॉ. देबाशीष सोम की भूमिका की केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच की जा रही है, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के रूप में संदीप घोष के कार्यकाल के दौरान करोड़ों के घोटाले में उनकी कथित संलिप्तता है. दोनों को आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का करीबी माना जाता है.
मेडिकल कॉलेज में प्रभावशाली हैं डॉक्टर
डॉ. सुजाता घोष आरजी कर अस्पताल की एनेस्थिसियोलॉजी विभाग में तैनात एसोसिएट प्रोफेसर सह डॉक्टर हैं और डॉ. देबाशीष सोम आरजी कर अस्पताल में फोरेंसिक और राज्य चिकित्सा विभाग में तैनात प्रोफेसर और डेमोस्ट्रेटर हैं. अस्पताल के एक सूत्र का दावा है कि दोनों डॉक्टर मेडिकल कॉलेज में प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं, क्योंकि वे पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के करीबी थे.
सीबीआई सूत्र ने दावा किया है कि वित्तीय अनियमितताओं में इन दोनों की अहम भूमिका थी, जिसकी जांच एजेंसी हर पहलू से कर रही है. सीबीआई के सूत्र ने इंडिया टुडे को बताया, 'अगर हमारी चल रही जांच में घोटाले में उनकी सीधी संलिप्तता सामने आती है, तो दोनों डॉक्टरों को कानून के मुताबिक जल्द ही गिरफ्तार भी किया जा सकता है.'
सीबीआई ने मारा था छापा
डॉ देबाशीष सोम के घर पर सीबीआई ने पहले भी छापा मारा था. छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की थी. छापेमारी के बाद डॉ सोम को कई बार पूछताछ के लिए कोलकाता स्थित सीबीआई कार्यालय बुलाया गया था. एक बार सीबीआई कार्यालय में पूछताछ के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और अगले कुछ दिनों तक उनका इलाज चला. डॉ सुजाता घोष से भी सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में कई बार पूछताछ की है.
सूत्र के मुताबिक, सीबीआई ने स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रमुख सचिव को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को एक पत्र लिखकर उन सरकारी डॉक्टरों की भूमिका की चल रही जांच के बारे में जानकारी दी है.