सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक ग्रुप से घर खरीदने वाले 1197 लोगों को फ्लैट के पजेशन और रिफंड में से कोई एक विकल्प एक चुनने के लिए 30 दिन का समय दिया है. ये मोहलत उन घर खरीदारों को दी गई है, जिन्होंने बिल्डर से रकम वापस लेने का विकल्प चुना है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक विकल्प चुनने के लिए वेब पोर्टल को 30 दिनों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा.
कोर्ट ने कहा कि इससे घर खरीदार पैसे वापस लेने के अपने फैसले पर एक बार फिर से विचार कर सकते हैं. अगर वो घर का पजेशन चाहते हैं तो फिर अपना फैसला बदलने का ये उनके लिए आखिरी मौका होगा. इस पोर्टल पर दिसंबर 2019 में रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया गया था.
पीठ ने कहा कि पजेशन में देरी की वजह से रकम वापस चाहने वाले घर खरीदारों को अंतिम मौका दिया जाए, जिससे उन्हें अपने फैसले पर एक बार फिर से विचार करने का मौका मिल सके. सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक लिमिटेड के नए मैनेजमेंट को निर्देश दिया है कि वो उन घर खरीदारों को प्राथमिकता दें जो रिफंड चाहते हैं.
खुशखबरी...पूरा होगा घर का सपना! Supertech अगले साल तक करेगी इतने फ्लैट्स की डिलीवरी
कैसे होगा रिफंड का इंतजाम?
यूनिटेक ग्रुप की 650 करोड़ रुपये की जब्त की गई प्रॉपर्टी रिफंड की रकम का इंतजाम कर सकती है. प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में यूनिटेक लिमिटेड ग्रुप की जो प्रॉपर्टी जब्त की है, उसमें से 450 करोड़ रुपये वापस मिल सकते हैं.
आमदनी का जरिया नहीं तो पहले मिले रिफंड
जो लोग रिफंड का विकल्प चुनेंगे उनकी प्राथमिकता के लिए कुछ पैमाने भी सुप्रीम कोर्ट ने तय किए हैं. कोर्ट ने कहा है कि यूनिटेक लिमिटेड के नए प्रबंधन को रिफंड का विकल्प चुनने वाले घर खरीदारों को पैसा वापस करने के लिए उनकी उम्र देखनी चाहिए. यानी जो लोग उम्रदराज हैं और जिनके पास आमदनी का कोई खास जरिया नहीं हैं तो उन्हें पहले रिफंड देना चाहिए.
स्वास्थ्य से जूझ रहे ग्राहकों को भी प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि स्वास्थ्य और निजी परेशानियां भी रिफंड का आधार होनी चाहिए क्योंकि अगर कोरोना या किसी दूसरी बीमारी ने घर खरीदारों को आर्थिक तौर पर कमजोर बनाया है तो भी वे रिफंड की प्राथमिकता लिस्ट में ऊपर रहें. प्रोजेक्ट की हालत भी रिफंड का आधार हो. यानी अगर किसी प्रोजेक्ट में काम शुरु ही नहीं हुआ या नाममात्र हुआ है तो फिर उन्हें पहले रिफंड मिलना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने इन बिंदुओं के आधार पर कैटेगरी बनाकर रिफंड देने की बात कही है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ये भी कहा है कि कुछ घर खरीदार ऐसे हैं जिन्होंने अपना मूलधन वापस ले लिया है लेकिन उन्होंने अपनी टाइटल डीड और अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा नहीं किया है. कोर्ट ने कहा है कि ऐसे लोगों को, नया मैनेजमेंट डाक्यूमेंट्स को जमा करने के लिए 30 दिनों का आखिरी मौका दे, जिससे उनके फ्लैट को अनसोल्ड प्रॉपर्टी की कैटेगरी में रखा जा सके.
यह भी पढ़ें-