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UP: संभल की जामा मस्जिद के सामने पूजा करने की कोशिश, पुलिस हिरासत में युवक

उत्तर प्रदेश के संभल में जुमे की नमाज से पहले जामा मस्जिद के मेन गेट के समाने अचानक एक युवक आया और पूजा करने की कोशिश करने लगा.

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संभल जामा मस्जिद (फाइल फोटो)
संभल जामा मस्जिद (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के संभल की जामा मस्जिद को लेकर एक नया मामला सामने आया है. जानकारी के मुताबिक, संभल की जामा मस्जिद में जुमे की नमाज से पहले मस्जिद के मेन गेट के समाने अचानक एक युवक आया और पूजा करने की कोशिश करने लगा. घटना के तुरंत बाद ही पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत लिया. युवक से पूछताछ के लिए पुलिस उसे थाने लेकर गई.

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संभल के एसएसपी श्रीशचंद्र और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने मामले पर जानकारी देते हुए बताया, "संभल की जामा मस्जिद के सामने पहुंचने वाला संदिग्ध युवक मंदबुद्धि निकला. उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. इसके बाद कार्रवाई की जाएगी.

पिछले दिनों संभल की जामा मस्जिद को लेकर उस वक्त विवाद शुरू हो गया, जब कुछ लोगों ने दावा किया कि इस जगह पर पहले मंदिर थी और उसको तोड़कर मस्जिद का निर्माण करवाया गया था.

संभल में मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई थी हिंसा 

हिंदू पक्ष की ओर से किए गए दावे और कोर्ट के आदेश के बाद जब सर्वे करने के लिए टीम पहुंची तो, वहां हंगामा हो गया था. इस दौरान पत्थबाजी की भी घटना सामने आई थी. हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस की ओर से फायरिंग की गई, जिससे इलाके के पांच मुस्लिम युवकों की मौत हो गई थी. 

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मस्जिद को लेकर क्या कहते हैं लोकल मुस्लिम?

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि सूफी विचारक बादशाह शमशुद्दीन अल्तमश जब बदायूं आए थे, तब उन्होंने यहां पर अल्लाह की इबादत करने के लिए मस्जिद बनवाई थी. यहां पर कभी मंदिर या मूर्ति होने का कोई सबूत नहीं है. इसको लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वो झूठ है और हकीकत के खिलाफ हैं.   

 यह भी पढ़ें: Sambhal Mosque Case: संभल जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट आज भी नहीं होगी पेश! अब सामने आई ये वजह

संभल मस्जिद में नियमों का हो रहा उल्लंघन: ASI का दावा

भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) ने कोर्ट में दाखिल किए अपने हलफनामे में कहा है कि उनकी टीम को संभल जामा मस्जिद में दाखिल नहीं होने दिया गया. एएसआई ने कोर्ट से कहा कि 1920 से ही इस मस्जिद के संरक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी हमारे पास है. लेकिन लंबे वक्त से हमारी टीम को मस्जिद में जाने से रोका जाता रहा है. इसलिए इसके मौजूदा स्वरूप के बारे में जानकारी हमारे पास नहीं है.

ASI के मुताबिक समय-समय पर जब भी इस हेरिटेज मस्जिद का मुआयना करने टीम गई, लोग आपत्ति जताते हुए उसे आगे जाने रोक देते थे. लिहाजा ASI को मस्जिद परिसर में अंदरूनी तौर पर हुए मनमाने निर्माण कार्यों की कोई जानकारी नहीं है. ASI ने 1998 में इस मस्जिद का दौरा किया था. सबसे आखिरी बार इस साल जून में ASI अधिकारियों की टीम स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सहयोग से मस्जिद मे दाखिल हो पाई थी. 

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उस समय एएसआई ने मस्जिद की इमारत में कुछ अतिरिक्त निर्माण कार्य देखा था. उसने कोर्ट को बताया है कि मस्जिद परिसर में प्राचीन इमारतों और पुरातात्विक अवशेषों के संरक्षण अधिनियम 1958 के प्रावधानों का सरासर उल्लंघन हो रहा है. लेकिन जब भी एएसआई की टीम दौरा करने जाती, उसे रोकने के साथ हर बार स्थानीय लोग पुलिस में शिकायत भी करते रहे. एएसआई ने इस हेरिटेज मस्जिद में अवैध निर्माण कराने के लिए जिम्मेदार लोगों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए.

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