काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित पूरे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सर्वेक्षण कराने की याचिका पर यहां की एक अदालत सुनवाई के लिए तैयार हो गई.
सरकार के वकील महेंद्र नाथ पांडे ने कहा कि हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील विष्णु शंकर जैन द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए, जिला अदालत के न्यायाधीश एके विश्वेश ने ज्ञानवापी मस्जिद समिति को 19 मई तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 22 मई को तय की है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ज्ञानवापी मस्जिद में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर शिवलिंग होने का दावा करने वाले ढांचे की आयु का निर्धारण करने का आदेश दिया. इसने वाराणसी जिला न्यायालय के 14 अक्टूबर के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मई 2022 में ज्ञानवापी मस्जिद के न्यायालय द्वारा अनिवार्य सर्वेक्षण के दौरान मिली संरचना की कार्बन डेटिंग सहित वैज्ञानिक जांच की याचिका खारिज कर दी गई थी.
हाई कोर्ट ने वाराणसी के जिला न्यायाधीश को 'शिवलिंग' की वैज्ञानिक जांच करने के लिए हिंदू उपासकों के आवेदन पर कानून के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया.
हिन्दू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किया
ज्ञानवापी परिसर में मिले कथित शिवलिंग का साइंटिफिक सर्वे के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद हिन्दू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किया है. कैविएट के जरिए हिंन्दू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि अगर दूसरा पक्ष हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देता है तो उसके पक्ष को सुने बिना कोई आदेश पारित ना किया जाए. शिवलिंग के कार्बन डेटिंग किए जाने का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था.
22 मई को वाराणसी के डिस्ट्रिक जज को मामले की सुनवाई करने का आदेश दिया था. साइंटिफिक सर्वे कब होगा और कैसे ये डिस्ट्रिक्ट जज तय करेंगे. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की ओर से पेश की गई रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया था. कोर्ट में ASI ने कहा कि बिना शिवलिंग को नुकसान पहुंचाए साइंटिफिक सर्वे किया जा सकता है.