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अमेरिका दशकों से समुद्र में सबसे बड़ी ताकत रहा है, लेकिन चीन की बढ़ती नौसैन्य क्षमताओं ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बना दिया है.
अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) की एक हालिया रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि कैसे चीन ने अपनी नौसेना का तेजी से विस्तार किया है, और वो अब हिन्द-प्रशांत में सबसे बड़ी नौसेना और सबसे बड़ी वायु सेना बनने के सपने के करीब है. साथ ही पूरी दुनिया में सबसे बड़ी मिसाइल ताकत बनने के करीब भी है.
2020 के शुरू में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नौसेना (PLAN) के पास 350 से अधिक जहाज थे, वहीं अमेरिकी नौसेना के पास 293 ही थे. अमेरिका अपने प्रभुत्व को छोड़ना नहीं चाहता है और चीन की सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण को बहुत करीब से देख रहा है.
अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने हाल में भविष्य की नौसेना के लिए ‘बैटल फोर्स 2045’ प्लान का अनावरण किया. इसमें अमेरिकी नौसेना के पास 2015 तक 500 से अधिक जहाज होने का खाका खींचा गया है
इंडिया टुडे की ओपनसोर्स इंटेलीजेंस टीम (OSINT) ने अपने विश्लेषण में पाया कि कैसे अमेरिका का नौसैन्य शक्ति को बढ़ाने का प्लान चीन की विस्तारवादी सैन्य प्रगति को काबू में रखने के लिए नाकाफी है.
रिपोर्ट में क्या है?
कांग्रेशनल रिसर्च रिपोर्ट जिसका शीर्षक ‘नेवी फोर्स स्ट्रक्चर एंड शिपबिल्डिंग प्लान्स: बैकग्राउंड एंड इश्यूज फॉर कांग्रेस’ है, हाल ही में सार्वजनिक हुई थी. रिपोर्ट में 2018 की नीति के मुताबिक अमेरिकी नौसेना के लक्ष्य को 355 जहाजों से बढ़ाकर 500 जहाज करने का संकेत दिया गया.
अमेरिका से आने वाली रिपोर्ट्स ज्यादातर चीजों को अस्पष्ट रहने देती हैं और सटीक संख्याओं के बारे में भ्रमित करती हैं, हालांकि वे 500 और 600 जहाजों के बीच की संख्या का सुझाव देते हैं जिनमें करीब 140-245 मानव रहित या वैकल्पिक रूप से मानव के साथ हैं.
‘बैटल फोर्स 2045’ की संभावित तिकड़ी में सबसे शक्तिशाली परमाणु पनडुब्बी फोर्स को माना जाता है, जो 12 के आंकडे के आसपास मंडराएगी लेकिन एक विशिष्ट संख्या नहीं बताई गई है.
ताजा फोर्स स्ट्रक्चर के आकलन के साथ अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) की रिपोर्ट ने संभवत: इतने कम समय के भीतर DoD को अपनी आवश्यकताओं में भारी बदलाव करने के लिए मजबूर किया.
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‘बैटल फोर्स 2045’ ने अधिक बंटे बेड़े के आर्किटेक्चर को पेश किया ताकि ऑपरेशनल जरूरत, तकनीकी व्यवहार्यता और सामर्थ्य का संतुलन बनाया जा सके.
रिपोर्ट बताती है कि नए बंटे फोर्स आर्किटेक्चर का ये स्वरूप होगा-
1. विमान वाहक, विध्वंसक, क्रूजर, आदि जैसे बड़े जहाजों का छोटा हिस्सा;
2. छोटे जहाजों का एक बड़ा हिस्सा जिसमें कोरवेट्स, फ्रिगेट्स, आदि शामिल हैं;
3. तीसरे स्तर पर सतह के जहाजों वाला बाकी हिस्सा कोरवेट्स जितना ही बड़ा, वैकल्पिक रूप से मानव सहित या मानव रहित
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ‘बैटल फोर्स 2045’ से अमेरिका को वो अति आवश्यक क्षमता मिलगी जो ताकत, समुद्रो पर नियंत्रण को प्रोजेक्ट करेगी. साथ ही बहुत लंबी दूरी पर सटीकता के साथ डिलिवर करने के लिए मौजूदगी को प्रदर्शित करेगी.
हाइपरसोनिक तकनीक
अमेरिका ग्लोबल स्ट्राइक प्रोग्राम के हिस्से के रूप में पिछले दो दशकों से हाइपरसोनिक तकनीक के विकास को आगे बढ़ा रहा है. जल्द ही वेपन सिस्टम (हथियार प्रणाली) को तैनात किए जाने की संभावना है, जिसका मार्च 2020 में टेस्ट किया गया था. ये सिस्टम एक सफल और दिशा बदलने में सक्षम हथियार का संकेत देता है जो दुनिया के किसी भी हिस्से में 60 मिनट के भीतर पहुंच सकता है.
कार्यक्रम हालांकि प्रकृति में पारंपरिक माना जाता है लेकिन इसे परमाणु प्रणाली में परिवर्तित होने में अधिक समय नहीं लग सकता है.
हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स (HGV) और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल जिन्हें विकसित किया जा रहा है वे बैलिस्टिक ट्रेजेक्टरी का पालन नहीं करते हैं, लेकिन वायुमंडल के नीचे रहते हैं, जिससे इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है.
मैक 5 से अधिक की गति इसे उन डिफेंस शील्ड्स के लिए इंटरसेप्ट करना बहुत मुश्किल बनाती है जो बैलैस्टिक मिसाइल्स को डील करती है.
अमेरिकी बैटल फोर्स 2045 की दुनिया भर में कहीं भी सटीक हमलों के लिए इन हाइपरसोनिक प्रणालियों पर निर्भरता रहेगी.
दूसरी तरफ चीन इस क्षेत्र में भी अमेरिका से आगे है. चीनी राष्ट्रीय दिवस परेड 2019 में DF-ZF हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) के साथ डोंगफेंग 17 (DF-17) मिसाइल का पता चला. इसने साफ तौर इसकी PLA रॉकेट फोर्स (PLARF) में तैनाती का संकेत दिया.
DF-17 एक दो-स्टेज वाला ठोस ईंधन रॉकेट इंजन है जो 11 मीटर लंबी मिसाइल में 15,000 किलोग्राम का भार ले जाता है, और 2,500 किलोमीटर तक की रेंज तक पहुंच सकता है.
HGV DF-ZF ने अपनी अंतिम टेस्ट फ्लाइट में 1,400 किमी से अधिक उड़ान भरी है, जो 1,500 किमी और 2,500 किमी के बीच की ग्लाइड फ्लाइट का सुझाव देती है.
चीनी परमाणु पनडुब्बी विस्तार
चीनी PLAN पिछले लगभग छह वर्षों से अपने पनडुब्बी उत्पादन को बढ़ाने की योजना बना रही है. चीन बोहाई शिपयार्ड में अपनी मुख्य पनडुब्बी निर्माण सुविधा का विस्तार कर रहा है जिसमें एक साथ छह पनडुब्बियों का निर्माण करने के लिए बड़े हॉल हैं.
इस नई निर्माण सुविधा की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिलता है कि संभवतः एक नया बना हॉल जिसमें दो अतिरिक्त कक्ष हैं.
80 मीटर के साइड प्रवेश द्वार के साथ 300 मीटर x 120 मीटर का आकार बताता है कि यह नया निर्माण हॉल एक साथ कम से कम चार पनडुब्बियों को असेम्बल कर सकता है. इससे इसकी एक साथ कुल निर्माण क्षमता 10 पनडुब्बियों तक बढ़ जाती है.
इससे बोहाई शिपबिल्डिंग हैवी इंडस्ट्री कंपनी पनडुब्बी निर्माण के लिए दुनिया की सबसे बड़ी सुविधा बन जाएगी.
तुलना की जाए तो, अमेरिकी बैटल फोर्स 2045 की योजना में 2045 तक 12 परमाणु पनडुब्बियों की अनुमानित वृद्धि बहुत कम होगी और बहुत देर से होगी.
(कर्नल विनायक भट (सेवानिवृत्त) इंडिया टुडे के लिए एक सलाहकार हैं, वे सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषक हैं, उन्होंने 33 वर्षों तक भारतीय सेना में सर्विस की)