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लाखों भारतीय यूजर्स के नाम, ई-मेल और फोन नंबर समेत तथाकथित डेटा सिर्फ 850 रुपए की फ्लैट कीमत पर ऑनलाइन उपलब्ध है. इंडिया टुडे की जांच में ये सामने आया है. एक नया पोर्टल "80 करोड़ Truecaller वैरीफाइड डेटाबेस" की खुली खरीद की पेशकश कर रहा है. जबकि पोर्टल की ओर से दावा किया जा रहा है कि ये डेटा कॉलर की पहचान करने वाले प्रसिद्ध ऐप Truecaller की ओर से वैरीफाइड है लेकिन Truecaller ने अपने डेटा में किसी भी तरह की सेंध से इनकार किया है.
Truecaller के प्रवक्ता ने इंडिया टुडे ने कहा, "हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि हमारे डेटाबेस का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है और हमारे यूजर्स से जुड़ी सभी जानकारी सुरक्षित है.”
डेटा की खरीद के लिए ट्रेडर की ओर से ऑनलाइन मर्चेंट Razorpay (रेज़रपे) का इस्तेमाल किया जा रहा है. साथ ही उसकी ओर से 10 जीबी के फाइल साइज के साथ CSV फॉर्मेट प्रदान करने का वादा किया गया है. CSV फाइल एक प्लेन टेक्स्ट फाइल होती है जो स्प्रेडशीट या डेटाबेस जैसे टेबुलर डेटा को स्टोर करती है.
वेबसाइट का दावा है "डेटा CSV फॉर्मेट में मुहैया कराया जाएगा, ताकि इसे CRM (कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट) या अन्य इस्तेमाल किए जाने वाले मार्केटिंग टूल के साथ आसानी से इंटीग्रेट (एकीकृत) किया जा सके.”
जबकि सेम्पल डेटाबेस का एक बड़ा हिस्सा व्यावसायिक संस्थाओं से जुड़ा है, इसमें व्यक्तिगत डेटा को भी वर्गीकृत किया गया है.
इसमें विभिन्न कैटेगरी में डेटा को वर्गीकृत किया गया है. डेटाबेस में 100 से ज्यादा ऐसी कैटेगरी उपलब्ध कराने का वादा किया गया है जैसे कि पैन कार्ड धारक, प्रवासी भारतीय, छात्र, शिक्षक, क्रेडिट कार्ड धारक, किसी विशेष शहर में महिला कंज्यूमर्स, फ्रीक्वेंट फ्लायर्स आदि.
स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर अथुल जयराम ने कहा, "यह देखते हुए कि भले ही यह डेटा Truecaller से लीक हुआ है या नहीं, वे 80 करोड़ फोन नंबरों को वैरीफाई करने के लिए Truecaller का इस्तेमाल करने का दावा करते हैं. Truecaller की सुरक्षा से कुछ दुर्घटना हुई होगी अगर किसी द्वेषपूर्ण तत्व ने उनकी सेवा को या तो लीक करने के लिए या यूजर्स की पहचान करने के लिए इस्तेमाल किया होगा. इनमें उपलब्ध नाम, पते और अन्य निजी जानकारी शामिल हैं.”
Truecaller की ओर से कहा गया है कि ‘बैड एक्टर्स’ (खराब तत्व) अक्सर ऐप के नाम का दुरुपयोग करते हैं जिससे कि वो थोड़ी विश्वसनीयता जोड़कर डेटाबेस बेच सकें. हमें मई 2019 में भी इसी तरह की डेटा की बिक्री के बारे में सूचित किया गया था. यह एक पैटर्न है जिसे पहले दोहराया गया है: ‘बैड एक्टर्स’ कई अलग-अलग स्रोतों से डेटाबेस संकलित करते हैं और उस पर एक Truecaller स्टैंप लगाते हैं. ऐसा करने से, डेटा को कुछ विश्वसनीयता मिलती है और उन्हें बेचना आसान हो जाता है.”
जबकि डिजिटल स्पेस में थोक यूजर्स डेटा का व्यापार एक नई घटना नहीं है, लेकिन इस घटना को जो अलग करता है वो है खुल्लम खुल्ला इसे डिस्पले करना. अथुल जयराम के अनुसार, यहां सबसे चिंताजनक संकेत डेटाबेस को बेचने के लिए फेसबुक विज्ञापन का खुला इस्तेमाल किया जाना है. आमतौर पर इस तरह के डेटा को डार्क वेब पर बेचा जाता है, लेकिन इस मामले में, एक नई वेबसाइट को पंजीकृत किया गया है और इसे फेसबुक विज्ञापन के माध्यम से प्रचारित किया गया है.
जयराम ने कहा, “उन्होंने बिक्री के लिए 80 करोड़ डेटा के बारे में फेसबुक प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन दिया है; फेसबुक विज्ञापनों में मॉडरेशन पॉलिसी होती है और यह हैरान करने वाला है डेटा की बिक्री को फेसबुक द्वारा कैसे मंजूरी दी गई.”
फेसबुक की विज्ञापन पॉलिसी में लिखा है- “विज्ञापन के फेसबुक या इंस्टाग्राम पर प्रदर्शित होने से पहले, यह सुनिश्चित करने के लिए समीक्षा की जाती है कि वे हमारी विज्ञापन नीतियों से मेल खाते हैं. आमतौर पर, अधिकतर विज्ञापनों की समीक्षा 24 घंटों के भीतर की जाती है, हालांकि कुछ मामलों में इसमें अधिक समय लग सकता है. लेकिन इस मामले में डेटाबेस के विक्रेताओं ने पिछले हफ्ते तीन विज्ञापन अभियान चलाए हैं.”
सवालों के घेरे में जो पोर्टल है, उसने डेटा को वैरीफाई करने के लिए Truecaller ऐप के इस्तेमाल का दावा किया है, वहीं ऐप ने यूजर्स से ऐसे ‘बैड एक्टर्स’ के झांसे में आने से बचने का आग्रह किया है. ऐप के मुताबिक ऐसे तत्वों का असल मकसद लोगों से पैसा ठगना है.