ओडिशा के भाजपा नेता जुएल उरांव ने मोदी सरकार 3.0 में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. जुएल उरांव 1999 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में मंत्री रहे. बता दें कि ओराम 2014 से 2019 तक जनजातीय मामलों के मंत्री के रूप में पीएम मोदी के पहले मंत्रिमंडल का भी हिस्सा रहे हैं, लेकिन उनके बाद अर्जुन मुंडा ने कार्यभार संभाला था.
अर्जुन मुंडा के झारखंड के खूंटी से इस बार लोकसभा चुनाव हारने के बाद जुएल उरांव ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल में कमबैक किया है. भाजपा के पुराने सदस्य जुएल उरांव का राजनीतिक करियर शानदार रहा है, वे साधारण पृष्ठभूमि से उठकर भारत सरकार में कैबिनेट मंत्री बने.
ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में एक गरीब आदिवासी परिवार में जन्मे उरांव का शुरुआती जीवन गरीबी और कठिनाई से भरा रहा. चुनौतियों के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया.1989 में राजनीति में आने से पहले उन्होंने 6 साल तक भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में सहायक फोरमैन के रूप में काम किया. उरांव साल 1989 में भाजपा में शामिल हुए.
1989 में भाजपा में शामिल हुए थे उरांव
उरांव 1990 में बोनाई विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने और 1998 तक दो कार्यकाल तक सेवा की. इस दौरान उन्होंने पार्टी के भीतर विभिन्न पदों पर कार्य किया, जिसमें भाजपा एसटी मोर्चा (अनुसूचित जनजाति विंग) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव शामिल थे.
1998 में सुंदरगढ़ सीट से जीतकर लोकसभा पहुंचे
1998 में उरांव सुंदरगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए, एक सीट जिसे उन्होंने कई बार जीती. 1999 में उरांव ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा बनाए गए पहले केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री बनकर बेहतरीन काम किए थे. जुएल ओराम ने 2018 में भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर पूरे आदिवासी समुदाय की ओर से गहरा दुख व्यक्त किया था. आदिवासी विकास के लिए अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा था कि उनके प्रयासों और उनके नेतृत्व में ही स्वतंत्रता प्राप्ति के 52 वर्षों के बाद 1999 में एक अलग आदिवासी मामलों के मंत्रालय की स्थापना की गई, जिसके माध्यम से आदिवासी कल्याण के कार्यों को गति और गति मिली.
उरांव ने कई पदों पर संभाली जिम्मेदारी
उरांव ने ओडिशा की राज्य इकाई के लिए पार्टी अध्यक्ष और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सहित विभिन्न पदों पर काम किया. 2014 में वह फिर से सांसद बने और नरेंद्र मोदी के पहले मंत्रिमंडल में आदिवासी मामलों के मंत्री के रूप में शपथ ली.