चेन्नई से स्लीपर कोच वाली वंदे भारत ट्रेन का वीडियो सामने आया है. वंदे भारत ट्रेन सेवा के स्लीपर कोच के लॉन्च कार्यक्रम का आयोजन चेन्नई के विल्लीवाकम में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में किया गया. पहली बार वंदे भारत ट्रेनों के स्लीपर कोच इन आईसीएफ रेलवे कारखानों में निर्मित किए गए हैं.
वंदे भारत ट्रेन किफायती मूल्य पर आकर्षक सुविधाएं प्रदान करने के लिए इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में निर्मित खूबसूरती से तैयार किए गए स्लीपर कोचों के साथ रात भर की लंबी दूरी की यात्रा के लिए तैयार है. भारतीय रेलवे के मुताबिक, स्लीपर कोच वाली वंदे भारत ट्रेन में कुल 823 यात्री सफर कर सकते हैं. इस वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में प्रथम श्रेणी का एसी डिब्बा है. इसमें 24 यात्री यात्रा कर सकते हैं. वहीं, चार द्वितीय श्रेणी के एसी कोच हैं, जिनमें 188 यात्री यात्रा कर सकते हैं और 11 तृतीय श्रेणी एसी कोच हैं, जिनमें 611 यात्री यात्रा कर सकते हैं.
बता दें कि विल्लीवाक्कम रेलवे इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में पहले से ही 77 वंदे भारत ट्रेनें निर्मित की गई हैं. अब पहली बार इस फैक्ट्री में वंदे भारत ट्रेन के स्लीपर कोच निर्मित किए गए हैं. देश भर में वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण तीन राज्यों पंजाब, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में किया जाता है. आईसीएफ के महाप्रबंधक सुब्बा राव के अनुसार, भारत में पहली बार स्लीपर सुविधा वाली वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण विल्लीवाक्कम कोच फैक्ट्री में किया गया है.
वंदे भारत स्लीपर कोच में मिलेंगी ये सुविधाएं
आईसीएफ के महाप्रबंधक सुब्बा राव ने बताया कि ट्रायल रन के बाद अगले चरण का परीक्षण होगा और उसके बाद इन स्लीपर कोच को वंदे भारत ट्रेनों में इस्तेमाल किया जाएगा. इन वंदे भारत स्लीपर कोच ट्रेनों को अधिकतम 160 किमी प्रति घंटे की गति से चलाने के लिए डिजाइन किया गया है. वहीं, इसके परीक्षण प्रोटोकॉल के दौरान वंदे भारत की स्पीड 180 किमी प्रति घंटे दर्ज की गई है.
भारतीय रेलवे के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर कोच ट्रेनों में अग्निशामक यंत्र और हर बेड के पास एक आपातकालीन स्टॉप बटन है. एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे में जाने के लिए स्वचालित दरवाजे हैं और प्रत्येक डिब्बे में एक इमरजेंसी टॉक बैक यूनिट है. इसके माध्यम से ऐसी सुविधाएं बनाई गई हैं कि लोको पायलट यात्री से बात कर सकता है और वे प्रतिक्रिया दे सकते हैं. साथ ही लोको पायलट इंजन से सीसीटीवी फुटेज की निगरानी कर सकता है. प्रत्येक डिब्बे में सीसीटीवी कैमरे, शौचालय की सुविधा, एक चार्जिंग केबल और हर बेड के पास एक छोटी सी लाइट है.
वंदे भारत की स्लीपर ट्रेनों को 15 जनवरी से मंजूरी मिलेगी. इसके अलावा ट्रेनों को आपस मे टकराने से रोकने के लिए सुरक्षा ढांचे में सुधार किया गया है. सभी वंदे भारत ट्रेनों की तरह इसमें भी कवच प्रणाली है. वंदे भरत स्लीपर ट्रेन में 16 डिब्बे हैं और इसे 120 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है.