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'जिस बनारस में करघे पर...', इमरान प्रतापगढ़ी ने राज्यसभा में उठाया बुनकरों का मुद्दा

महाराष्ट्र से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सदन में शून्यकाल के दौरान बुनकर उद्योग की बदहाली और बुनकरों की दुर्दशा का मुद्दा उठाया. उन्होंने महाराष्ट्र के भिवंडी से लेकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी, मऊ और आंध्र प्रदेश के गुंटूर का जिक्र किया.

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इमरान प्रतापगढ़ी
इमरान प्रतापगढ़ी

गुरुवार को राज्यसभा में बुनकर उद्योग और बुनकरों की बदहाली का मुद्दा उठा. राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही महाराष्ट्र से कांग्रेस के सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने बुनकरों का मुद्दा उठाया. इमरान प्रतापगढ़ी ने शायरी के साथ अपनी बात शुरू की और महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश तक की बात की.

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मेरे हाथों ने तो पोशाकें बिनी रेशमी लेकिन, मेरी पोशाकें सदा पैबंद रहे... शायरी के साथ इमरान प्रतापगढ़ी ने अपनी बात शुरू की. उन्होंने महाराष्ट्र के मालेगांव, भिवंडी से लेकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी, मऊ, मुबारकपुर और आंध्र प्रदेश के गुंटूर का जिक्र किया. इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि एक ऐसे समाज का दर्द आपको सुनाने जा रहा हूं जो अपने हाथ से धागे से धागा जोड़कर हमारे लिए लिबास तैयार करता है.

उन्होंने कहा कि ये उद्योग कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार सृजित करता है. जिस उद्योग से लाखों परिवारों का चूल्हा जलता है. वह उद्योग आज सरकार की उदासीनता का शिकार है. इमरान प्रतापगढ़ी ने बुनकरों का दर्द, बुनकर उद्योग की बदहाली बयान करते हुए कहा कि जिस बनारस में कभी करघे पर बैठकर कबीर दासजी झीनी बीनी चदरिया बीना करते थे, आज वहां के बुनकर भाई ईंट भट्टों पर काम करने को मजबूर हैं.

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उन्होंने धागे पर जीएसटी लगाए जाने, जीएसटी की लिमिट 10 लाख रुपये किए जाने का जिक्र किया और कहा कि ये इस उद्योग की बदहाली का प्रमुख कारण है. इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि पिछले कुछ साल में जिस भिवंडी में एशिया में सबसे ज्यादा हैंडलूम हुआ करते थे, वहां आज बुनकर बदहाल है. दो लाख से अधिक मशीनें कबाड़ में बिक गईं. उन्होंने जीएसटी की लिमिट 50 लाख तक बढ़ाए जाने की मांग की.

मनोज झा बोले- अमृत काल में सचमुच बरसने लगेगा अमृत

शून्यकाल के दौरान आरजेडी के सांसद डॉक्टर मनोज झा ने अमीर-गरीब के बीच बढ़ती खाई का मुद्दा उठाया और कहा कि 1986 से पहले देश में एक खास टैक्स की व्यवस्था थी. उन्होंने कहा कि आज भी दुनिया के कई देशों में इस तरह के टैक्स की व्यवस्था है. मनोज झा ने कहा कि आज हम क्यों नहीं इस तरह की व्यवस्था को वापस ला सकते.

उन्होंने कहा कि इस तरह का टैक्स फिर से शुरू करने पर हमें पक्ष-विपक्ष सबको मिलकर विचार करने की जरूरत है. आरजेडी सांसद ने कहा कि इससे अमृतकाल में सचमुच अमृत बरसेगा. उन्होंने इस दौरान एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया और कहा कि हम जानते हैं कि आप ऑथेंटिकेट करने के लिए कहेंगे इसलिए ये रिपोर्ट साथ लेकर आए हैं.

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