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वाराणसीः इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ मुस्लिम महिलाएं बना रहीं रामनामी दीपक

हिंदू महिलाओं के साथ ही मुस्लिम महिलाओं ने भी भगवान राम को अपना पूर्वज मानते हुए दीवाली के पर्व पर राम नाम के दीपक की ज्योत से धार्मिक कट्टरपंथ और चाइनीज झालरों पर सफलता पाने की उम्मीद जताई.

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वाराणसी में मुस्लिम महिलाएं बना रही रामनामी दीया (फोटो-रोशन)
वाराणसी में मुस्लिम महिलाएं बना रही रामनामी दीया (फोटो-रोशन)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कट्टरपंथ के खिलाफ रोशनी की अलख जगाने की मुहिम
  • मिट्टी और गोबर से पहले दीपक तैयार किया जा रहा
  • राम नामी दीपक तैयार करके लोगों में बांटा जाएगा

इस्लामिक कट्टरपंथ को लेकर जहां एक ओर पूरी दुनिया में दिक्कतें बढ़ी हैं तो वहीं दूसरी ओर धर्म की नगरी काशी से मुस्लिम महिलाओं ने दीवाली के मद्देनजर राम नाम के दीपक को बनाकर कट्टरपंथ के खिलाफ रोशनी की अलख जगाने की मुहिम छेड़ी है.

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हिंदू महिलाओं के साथ ही मुस्लिम महिलाओं ने भी भगवान राम को अपना पूर्वज मानते हुए दीवाली के पर्व पर राम नाम के दीपक की ज्योत से धार्मिक कट्टरपंथ और चाइनीज झालरों पर सफलता पाने की उम्मीद जताई.

मुस्लिम महिलाएं बना रही रामनामी दीए (फोटो-रोशन)
मुस्लिम महिलाएं बना रही रामनामी दीए (फोटो-रोशन)

एक ओर इस्लामिक कट्टरपंथ से दुनिया के ज्यादातर देशों में उथल पुथल मचा हुआ है तो वहीं दूसरी ओर गंगा जमुनी तहजीब के लिए मशहूर धर्म की नगरी काशी से आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश इस दीवाली पर देने की कोशिश राम नाम के दीपकों से मुस्लिम महिलाओं ने की है. वाराणसी के मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही में मुस्लिम महिला फाउंडेशन के कार्यालय परिसर में इन दिनों खासी तैयारी दीवाली के मद्देनजर दिख रही है. जहां ना केवल हिंदू बल्कि मुस्लिम महिलाएं बढ़-चढ़कर राम नाम के दीपकों को तैयार करने में रमी हैं.

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मिट्टी और गोबर से पहले दीपक को तैयार किया जा रहा है फिर उनके पक्का हो जाने पर उनका रंग रोगन करके राम नाम लिखते हुए स्वास्तिक बनाकर खूबसूरत रूप दिया जा रहा है. राम नाम के दीपकों को बनाने के पीछे मुस्लिम महिला फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नाजनीन अंसारी ने बताया कि इस वक्त इस्लामिक कट्टरपंथ से पूरी दुनिया जूझ रही है. ऐसे में इस कट्टरपंथ के अंधकार को वह आदर्श और पूर्वज राम से जुड़े पर्व दीवाली पर राम नाम के दीपकों को तैयार करके और फिर लोगों में बांटकर दिवाली पर जलाएंगे, ताकि इससे इस्लामिक अंधकार खत्म हो. 

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फाउंडेशन की एक अन्य मुस्लिम महिला सदस्य नजमा ने बताया कि वह मुस्लिम होते हुए भी भारतीय हैं और उनके भी पूर्वज राम ही हैं. इसलिए उनको इस दिवाली के पर्व को खास रूप से मनाने में कोई गुरेज नहीं है.

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