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वसुंधरा राजे, बालकनाथ या कोई नया चेहरा… हाईकमान की बैठकों के बीच राजस्थान के CM पर सस्पेंस बरकरार

आज सबसे ज़्यादा बाबा बालकनाथ के नाम की चर्चा है. राजस्थान की तिजारा विधानसभा सीट से जीते बाबा बालकनाथ ने गुरुवार को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और इस्तीफे के फौरन बाद उनसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुलाकात की है. आखिर 39 साल के बाबा बालकनाथ क्यों, आज राजस्थान के सीएम के तौर पर सबसे ज़्यादा चर्चा का विषय बने हुए हैं. 

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बाबा बालकनाथ, वसुंधरा राजे (फाइल फोटो)
बाबा बालकनाथ, वसुंधरा राजे (फाइल फोटो)

राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद BJP में अब मुख्यमंत्री चुनने के लिए बैठकों का दौर जारी है. सीएम पद के लिए तगड़ी रेस चल रही है. राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तीनों ही राज्यों में BJP ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा था. किसी भी राज्य में सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया. ऐसे में चर्चा यही है कि नए चेहरे पर दांव लगाएगी. आज सबसे पहले बात राजस्थान की करते हैं, आपको बता दें कि वसुंधरा राजे सिंधिया दिल्ली में हैं, और बाबा बालकनाथ योगी ने सांसदी से इस्तीफा दे दिया है. उनकी गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात भी हुई है. अब सस्पेंस और बढ़ गया है, राजस्थान में मुख्यमंत्री कौन बनेगा. 

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- वसुंधरा राजे सिंधिया
- बाबा बालकनाथ योगी
- गजेंद्र सिंह शेखावत
- दीया कुमारी
- अश्विनी वैष्णव

5 चेहरों में कौन बनेगा सीएम फेस
अब इन 5 चेहरों में से केंद्रीय नेतृत्व किसे चुनता है, यही जनता जानना चाहती है. सूत्रों की मानें तो वसुंधरा राजे नाम तकरीबन, मुख्यमंत्री की रेस से बाहर माना जा रहा है, तो बालकनाथ योगी की चर्चाएं सबसे प्रबल हैं, वो युवा हैं, फायरब्रांड हिंदू नेता के तौर पर उनकी पहचान है. आपको बता दें अश्विनी वैष्णव भी रेस में चल रहे हैं, उनके नाम भी चर्चाएं रोज़ाना तेज़ हो 
रही हैं. जबकि गजेंद्र सिंह शेखावत भी इस रेस से बाहर नहीं हुए हैं. इस बीच केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से ऐलान कर दिया गया है कि कल यानी शुक्रवार को पर्यवेक्षकों के नाम का ऐलान हो सकता है.

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आज सबसे ज़्यादा बाबा बालकनाथ के नाम की चर्चा है. राजस्थान की तिजारा विधानसभा सीट से जीते बाबा बालकनाथ ने गुरुवार को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और इस्तीफे के फौरन बाद उनसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुलाकात की है. आखिर 39 साल के बाबा बालकनाथ क्यों, आज राजस्थान के सीएम के तौर पर सबसे ज़्यादा चर्चा का विषय बने हुए हैं. 

सीएम को लेकर सस्पेंस... आज 5वां दिन
राजस्थान में सीएम के सस्पेंस को लेकर आज 5वां दिन है और 5वें दिन अचानक से बाबा बालकनाथ योगी के नाम को लेकर चर्चाएं बहुत तेज़ हुई हैं. इसके दो बड़े कारण हैं, पहला, तो बाबा बालकनाथ ने अपनी सांसदी से इस्तीफा दे दिया है. दूसरा बड़ा कारण बालकनाथ और गृहमंत्री अमित शाह की मीटिंग भी हुई है. तो क्या राजस्थान के सीएम के लिए अगला नाम
बालकनाथ का होगा, वैसे बालकनाथ सीएम के दावेदारों में पहले से शुमार हैं. 

बाबा बालकनाथ ने दिया सांसदी से इस्तीफा
बाबा बालकनाथ योगी, बीजेपी के हिंदू पोस्टर बॉय हैं. आजतक के सर्वे में बीजेपी का सबसे लोकप्रिय चेहरा साबित हुए. ओबीसी-यादव समाज से आते हैं. लोग इन्हें राजस्थान का योगी कहते हैं. बीजेपी ने तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत 21 सांसदों को विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारा था. इनमें से 12 सांसद विधानसभा चुनाव में विजयी रहे. विधानसभा चुनाव जीतने के बाद सांसद संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं. कल 10 सांसदों ने इस्तीफा दिया था, अब इसमें बालकनाथ का नाम भी जुड़ा है. 

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फायरब्रांड हिंदू नेता की छवि
बाबा बालकनाथ योगी के कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें उनकी फायरब्रांड हिंदू नेता की छवि दिखाई देती है. उम्र अभी 38 साल है. जैसा कि बीजेपी से खबरें आ रही हैं कि मुख्यमंत्री युवा और चौंकाने वाला चेहरा होगा, तो क्या वो बालकनाथ ही होंगे. बाबा बालकनाथ योगी राजस्थान की जारा विधानसभा सीट से जीते हैं. बीजेपी ने उन्हें खास मकसद से विधानसभा चुनावों में खड़ा किया. इसी वजह से उन्हें राज्य में मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार भी माना जा रहा है. आपको बता दें कि बीच नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने चुटकी लेते हुए बालक नाथ की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये राजस्थान के नए सीएम बनने वाले हैं. इस पर बालक नाथ असहज हो गए.

पहले बने थे अलवर से सांसद, अब बने विधायक
बाबा बालकनाथ उसी नाथ संप्रदाय से आते हैं, जिससे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अगर योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में नाथ संप्रदाय के पीठ गोरखधाम के महंत हैं तो बाबा बालकनाथ हरियाणा के रोहतक में मस्तनाथ मठ के महंत. वो महज 06 साल की उम्र में आध्यात्म की दुनिया में चले गए. बाबा बालक नाथ के गुरु चांदनाथ तो स्नातक थे लेकिन बाबा बालक नाथ बारहवीं पास हैं. पहली बार 2019 में वो अलवर के सांसद बने थे. ये उनका पहला ही चुनाव था और अब वो दूसरा चुनाव विधायकी का जीते हैं. बाबा बालकनाथ ओबीसी कैटेगरी से आते हैं. जब उन्होंने अपना चुनाव घोषणापत्र भरा तो अपने पास 45 हजार रुपए घोषित किए, साथ ही ये भी बताया कि सांसद के वेतन के तौर उन्हें जो पैसा मिला, वो दिल्ली की पार्लियामेंट में मौजूद स्टेटबैंक आफ इंडिया ब्रांच में जमा है.

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वसुंधरा को लेकर पारा हाई
बाबा बालकनाथ राजस्थान में बहुत लोकप्रिय हैं, जब उन्हें सांसद होने के बाद भी विधायक चुनाव लड़ने के लिए राजस्थान के तिजारा भेजा गया तो कयास लगने लगे कि बीजेपी हाईकमान ने उनके लिए कुछ खास योजना बना रखी है. राजस्थान से, राजनीतिक पारा सबसे ज़्यादा वसुंधरा को लेकर चढ़ा हुआ है. वसुंधरा पहले दिन से खुद को सीएम के दावेदार के रूप में देख रही हैं. लेकिन अब वसुंधरा पर सनसनीखेज़ आरोप लग रहे हैं. एक विधायक के पिता ने तो ये कह दिया है कि वसुंधरा के बेटे दुष्यंत ने विधायकों की बाड़ेबंदी की कोशिश की है और वसुंधरा राजे दिल्ली आई हुई हैं. अब उनके दिल्ली दौरे का मतलब क्या है. 

राजस्थान में मची है उथल-पुथल
राजस्थान में रिवाज़ नहीं बदला, लेकिन बीजेपी की तगड़ी जीत के बाद भी, राजस्थान की राजनीति में उथल-पुथल ज़रूर मची है और उस राजनीति के केंद्र में हैं सिर्फ और सिर्फ महारानी वसुंधरा राजे सिंधिया. राजस्थान में सीएम पद को लेकर जारी सस्पेंस के बीच, वसुंधरा राजे सिंधिया की चर्चा जयपुर से लेकर दिल्ली तक हो रही है. कहा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें दिल्ली बुलाया, और वो देर रात जयपुर से सीधे दिल्ली चली आती हैं. अब सवाल ये है कि वसुंधरा को दिल्ली क्यों आना पड़ा? 

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- क्या नतीजों के बाद जिस तरह से वसुंधरा प्रेशर पॉलिटिक्स करती दिखीं, इसके लिए 
उन्हें दिल्ली आना पड़ा?
- दावा ये भी जा रहा है कि वसुंधरा राजे ने राजस्थान में विधायकों की बाड़ेबंदी की, इसलिए
उन्हें दिल्ली बुलाया गया?
- क्या वसुंधरा को ये भनक लग गई कि उनका मुख्यमंत्री बनना मुश्किल है, और उनकी प्रेशर
पॉलिटिक्स काम नहीं करेगी, इसलिए वो हाईकमान को मनाने के लिए दिल्ली आई? 

हालांकि वसुंधरा राजे, अब कह रही हैं कि पार्टी हाईकमान का जो फैसला होगा, वो उन्हें पूरी तरह से  मंज़ूर होगा. वसुंधरा अब ये भी कह रही हैं कि वो पार्टी लाइन से बाहर नहीं है. वो पार्टी की अनुशासित कार्यकर्ता हैं, और पार्टी लाइन से कभी बाहर नहीं जा सकतीं. लेकिन पिछले 5 दिनों की राजनीति में सब देख रहे हैं कि वसुंधरा राजे का ये ह्रदय परिवर्तन अचानक से ही हुआ है. वरना तो, वसुंधरा को लेकर दावा यहां कर है कि पहले तो उन्होंने फोन पर 68 विधायकों से बात की, फिर 28 विधायकों से मुलाकात की और बाद में, विधायकों की बाड़ेबंदी करने की कोशिश भी की. राजस्थान की किशनगंज विधानसभा से विधायक ललित मीणा के पिता और पूर्व विधायक हेमराज मीणा आरोप लगा रहे हैं कि

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सांसद दुष्यंत सिंह पर लगे ये आरोप
वसुंधरा राजे के बेटे सांसद दुष्यंत सिंह ने बीजेपी विधायकों को सीकर रोड पर बने आपणों राजस्थान रिजॉर्ट में रखा हुआ था. इन विधायकों में हेमराज मीणा के बेटे ललित मीणा को भी रखा गया था. जब ललित मीणा शाम को घर पर नहीं लौटा तो उन्होंने ललित से बात की. उसने बताया कि वो सीकर रोड पर एक रिसॉर्ट में है. ये लोग उसे आने नहीं दे रहे हैं. उसके बाद हेमराज रिजॉर्ट पहुंचे, तो वहां पर अंता के विधायक कंवरलाल मीणा ने ललित को लाने से रोका. उसने कहा कि सांसद दुष्यंत से बात करो, और उसके बाद ही इसे ले जाओ. हेमराज कहते हैं कि मैंने दुष्यंत को फोन लगाया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया, इसके बाद काफी जोर-जबरदस्ती हुई, बाद में हम ललित को लेकर आ गए. हेमराज मीणा की मानें तो रिजॉर्ट में झालावाड़ के तीन और बारां के तीन विधायकों को बाड़ेबंदी करके रखा गया था.

क्या उल्टी पड़ जाएगी वसुंधरा राजे की प्रेशर पॉलिटिक्स
जैसे विधायकों के बाड़ाबंदी की खबर राजस्थान में फैली जयपुर से दिल्ली तक हलचल मच गई. उसके बाद, वसुंधरा राजे, सीधे दिल्ली एयरपोर्ट पर दिखाई दीं. हालांकि राजस्थान में बीजेपी के प्रभारी अरुण सिंह, कह रहे हैं कि बाड़ेबंदी जैसी कोई बात नहीं है. अब सवाल आता है कि क्या वसुंधरा राजे को केंद्रीय नेतृत्व सीएम बनाएगा. कहीं ऐसा तो नहीं है कि वसुंधरा राजे की प्रेशर पॉलिटिक्स उल्टी पड़ जाएगी? वैसे आपको एक और बात बता दें कि अभी तक जो भी विधायक वसुंधरा को सीएम बनाने के लिए उनके साथ खड़े दिख रहे थे, अब वो भी कह रहे हैं कि जो फैसला हाईकमान लेंगे, वो सबको मंज़ूर होगा. आपको बता दें कि वसुंधरा राजे, दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी है.

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- पहली दफा 2003 से 2008 तक
- दूसरी दफा 2013 से 2018 तक 

 2018 में बीजेपी की हार के बाद कहा जाने लगा कि पार्टी ने वसुंधरा राजे को किनारे कर दिया है. लेकिन इस बार वो फिर से सीन में आने की भरपूर कोशिश कर रही हैं, और उन्होंने शक्ति प्रदर्शन भी किया है. राजस्थान की सियासत के समंदर में हर दिन नई लहरें उठ रही हैं, राजनीतिक गलियारों में लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार कोई ताज़ा हवा चलने की उम्मीद है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का एकसमूह मान चुका है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अब नई सरकार की कमान सौंपे जाने की संभावना न के बराबर है. 

मरुधरा की धरा राजस्थान की जनता ने जीत का सेहरा बीजेपी के सिर पर बांधा है, लेकिन पार्टी मुख्यमंत्री का ताज किसके सिर पर सजाएगी इसको लेकर अभी स्थिति बड़ी ही दिलचस्प बनी हुई है. भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन मुख्यमंत्री का सर्वसम्मत चेहरा नहीं है. एक तरफ 2 दर्जन से ज्यादा विधायक वसुंधरा राजे के आवास पर अलग से मुलाक़ात कर चुके और अपनी पसंद भी बता चुके हैं, लेकिन उसके बाद मचे बवाल पर वसुंधरा राजे को दिल्ली तलब कर लिया गया. इसी बीच कांग्रेस नेता के होटल में भाजपा विधायकों की बाड़ेबंदी की खबर ने पार्टी में नया बवंडर खड़ा कर दिया.

'आपणो राजस्थान' रिसॉर्ट में ठहराए गए विधायक? 
दरअसल किशनगंज विधायक ललित मीणा के पिता हेमराज मीणा ने खुलासा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र और सांसद दुष्यंत सिंह मंगलवार को कुछ विधायकों को वसुंधरा राजे से मिलाने के लिए जयपुर लाए थे. जहां उन्हें सीकर रोड स्थित 'आपणो राजस्थान' रिसोर्ट में उन्हें ठहराया गया. अब जिस रिसोर्ट में भाजपा विधायकों को ठहराने के आरोप लगे है वह कांग्रेस नेता का है. जानकारी में सामने आया है कि कांग्रेस के नेता सुरेश चौधरी इसके मालिक है. यही नहीं ये नेताजी सेवादल के साथ-साथ प्रदेश टीम में भी रह चुके हैं, साथ ही निवर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भी करीबी हैं.

हेमराज मीणा ने लगाए आरोप
हेमराज मीणा के अनुसार ने उनके बेटे ललित मीणा सहित पांच विधायकों को इसी रिसोर्ट में रोका गया था. जब वह वहां गए तो विधायक कंवरलाल ने उन्हें रोक लिया और उन्ही से उलझ भी गए. यही नहीं उनका आरोप है कि विधायक कंवर लाल यह भी कह रहे थे कि दुष्यंत सिंह से बात करो और वह बोलें तो ले जाओ. फिर उन्होंने दुष्यंत सिंह को फोन लगाया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.

फिर प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी और प्रभारी अरुण सिंह को इस पूरे प्रकरण से अवगत करवाया. तब संगठन के कुछ पदाधिकारी होटल पहुंचे और विधायकों को लेकर भाजपा प्रदेश मुख्यालय लेकर आए. उनके अनुसार रिसोर्ट में कंवरलाल मीणा, राधेश्याम बैरवा, मनोहर थाना विधायक गोविंद रानीपुरिया, ललित मीणा सहित पांच विधायक ठहरे हुए थे. एक साथ विधायकों के ठहरने से 'लॉबिंग' की अटकलें शुरू हो गईं. हालांकि पार्टी नेताओं ने इस तरह की किसी संभावना को खारिज कर दिया.

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