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खुलासा: UBER ने ड्राइवरों के खिलाफ हिंसा, दिल्ली में रेप...जैसी घटनाओं का इस्तेमाल फायदे के लिए किया

इंटरनेशनल कंसॉर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने द गार्डियन को मिले एक लाख 24 हजार से ज्यादा दस्तावेजों का एनालिसिस किया है. इस एनालिसिस में कुछ ऐसी बातें सामने आई हैं, जिससे उबर पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इन दस्तावेजों में उबर के सह-संस्थापक और पूर्व मुख्य कार्यकारी ट्रैविस कलानिक के अन्य अधिकारियों के साथ बातचीत के अनवांटेड टेक्स्ट और ईमेल के कैशे शामिल हैं.

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प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उबर ने अपने विस्तार के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाईं
  • उबर पर कई देशों में सरकार के साथ सांठगांठ का आरोप

राइड कंपनी उबर (Uber) को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. करीब 1 दशक पहले शुरू हुई उबर ने अपने वैश्विक विस्तार के लिए संदिग्ध और अवैध रणनीति का सहारा लिया. इतना ही नहीं उबर ने बिजनेस विस्तार के दौरान कानूनों की धज्जियां उड़ाईं, ड्राइवरों के खिलाफ हिंसा का फायदा उठाया और गुप्त रूप से सरकारों और अधिकारियों के साथ सांठगांठ की. यह खुलासा उबर के गोपनीय दस्तावेजों की इंटरनेशनल कंसॉर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स के पड़ताल में सामने आई है. इसमें भारत का अखबार द इंडियन एक्स्प्रेस भी शामिल है. 

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इंटरनेशनल कंसॉर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने द गार्डियन को मिले एक लाख 24 हजार से ज्यादा दस्तावेजों का एनालिसिस किया है. इस एनालिसिस में कुछ ऐसी बातें सामने आई हैं, जिससे उबर पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इन दस्तावेजों में उबर के सह-संस्थापक और पूर्व मुख्य कार्यकारी ट्रैविस कलानिक के अन्य अधिकारियों के साथ बातचीत के अनवांटेड टेक्स्ट और ईमेल के कैशे शामिल हैं. ट्रैविस कलानिक को 2017 में कंपनी ने इस्तीफा देने के लिए कहा था. 

 

कलानिक ने कंपनी के अन्य अधिकारियों को मैसेज किया था कि 'Violence guarantee(s) success' ('हिंसा सफलता की गारंटी') है. उन्होंने पेरिस में उबर के खिलाफ 2016 में हुए उग्र प्रदर्शनों का सहारा लिया. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, उबर का तेज विस्तार ड्राइवरों को सब्सिडी और रियायती किराए पर निर्भर है. इतना ही नहीं इससे टैक्सी उद्योग पर भी असर पड़ा. उबर द्वारा लाइसेंस नियमों का भी उल्लंघन किया गया.

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कानून की उड़ाई गईं धज्जियां 

इतना ही नहीं पड़ताल में यह भी सामने आया है कि कैसे उबर ने कई देशों में प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपतियों, अरबपतियों और मीडिया से साठगांठ कर अपने लिए समर्थन जुटाया. उबर ने कई स्तरों पर कानून और टैक्सी से जुड़े नियमों की धज्जियां उड़ाईं. 

यूरोप भर में ड्राइवरों को हिंसक प्रतिशोध का सामना करना पड़ा क्योंकि टैक्सी ड्राइवरों को डर सता रहा था कि इससे उनकी अजीविका को खतरा लगा है. पड़ताल में सामने आया है कि जब ड्राइवरों पर हमला किया गया था, तो उबर के अधिकारियों ने इनका इस्तेमाल सार्वजनिक और नियामक समर्थन प्राप्त करने के लिए किया. 

गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, उबेर ने बेल्जियम, नीदरलैंड, स्पेन और इटली समेत अन्य यूरोपीय देशों में इसी तरह की रणनीति अपनाई. उन्होंने हिंसा से पीड़ित ड्राइवरों को तुरंत पुलिस में शिकायत करने के लिए प्रेरित किया, ताकि मीडिया कवरेज का इस्तेमाल कर नियामक से समर्थन मिल सके. उधर, उबर के सह-संस्थापक कलानिक के प्रवक्ता ने इन रिपोर्ट्स को झूठा एजेंडा बताया. उन्होंने कहा, कलानिक ने कभी यह सुझाव नहीं दिया कि ड्राइवर पर हिंसा का लाभ उठाना चाहिए.  
 
दिल्ली में रेप की घटना से मचा हाहाकार

दिल्ली में दिसंबर 2014 में एक उबर ड्राइवर ने 25 साल की महिला से रेप किया था. इस घटना के बाद दिल्ली सरकार सख्त थी, यहां तक की कंपनी के यहां से जाने की नौबत आ गई थी. लेकिन सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने ड्राइवरों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और लाइसेंस सिस्टम पर ठीकरा फोड़ दिया. 

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रेप की घटना के बाद उबर कंपनी भी दहशत में आ गई. इसके बाद कंपनी ने डैमेज कंट्रोल करना शुरू किया. उस समय उबर द्वारा अपने कर्मचारियों को लिखा गया कि याद रहे सब कुछ हमारे कंट्रोल में नहीं है. कई बार हमारे सामने ऐसी समस्याएं आ जाती हैं जो हमें कानून तोड़ने की ओर से जाती हैं. इसके बाद कंपनी ने तमाम तरह के सुरक्षा कदम उठाने का दावा किया. हालांकि, ये सब खोखले दावे थे. ये 6 साल बाद भी शुरू नहीं हुए. इसमें कैब में लगने वाला पैनिक बटन भी शामिल था. 


 

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