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हिंसा, पार्टी में विरोध और सरकार गिरने का खतरा... जानें इस्तीफा देने को क्यों मजबूर हुए मणिपुर के CM बीरेन सिंह?

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने रविवार को इस्तीफा दे दिया. ये इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब राज्य में पिछले 20 महीने से हिंसा जारी है और बीरेन सिंह को लेकर विरोध बढ़ रहा था. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर बीरेन सिंह ने इस्तीफा क्यों दिया...

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एन बीरेन सिंह. (फाइल फोटो)
एन बीरेन सिंह. (फाइल फोटो)

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने रविवार को इस्तीफा दे दिया. ये इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब राज्य में पिछले 20 महीने से हिंसा जारी है और बीरेन सिंह को लेकर विरोध बढ़ रहा था. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर बीरेन सिंह ने इस्तीफा क्यों दिया... 

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दरअसल, 7 फरवरी को मणिपुर कांग्रेस ने घोषणा की थी कि वह 10 फरवरी को बीरेन सिंह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी. इससे पहले, 3 फरवरी को मणिपुर सरकार में मंत्री युन्नम खेमचंद सिंह दिल्ली पहुंचे थे. उन्होंने भाजपा नेतृत्व को चेतावनी दी थी कि यदि मुख्यमंत्री को नहीं बदला गया तो सरकार गिर सकती है. इसके बाद 4 फरवरी को मणिपुर के गवर्नर एके भल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें राज्य की स्थिति के बारे में बताया.

वहीं, विधानसभा अध्यक्ष ठाकचोम सत्यब्रत सिंह  भी बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले थे और उन्होंने नड्डा को अविश्वास प्रस्ताव के बारे में बताया था. एक सूत्र के अनुसार, जब नड्डा से पूछा गया कि क्या अविश्वास प्रस्ताव को रोका जा सकता है, तो सत्यब्रत सिंह ने कहा कि वह इसे रोकने में सक्षम नहीं होंगे.

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बीरेन सिंह के कथित ऑडियो क्लिप पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश...

3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला से बीरेन सिंह के कथित लीक हुए ऑडियो टेप की जांच रिपोर्ट मंगवाने का आदेश दिया था. इस क्लिप में मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह पर आरोप था कि वह इस हिंसा को भड़काने में शामिल थे. इस मामले में सुनवाई 24 मार्च 2025 को होगी.

विधायकों में असहमति

8 फरवरी को बीरेन सिंह ने NDA के विधायकों की बैठक की, जिसमें नागा पीपुल्स फ्रंट और जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक शामिल थे. इस बैठक में गठबंधन के 46 में से केवल 20 विधायक मौजूद थे. एक बागी भाजपा विधायक ने कहा, 'पिछले दो वर्षों से न तो राज्य नेतृत्व और न ही केंद्र ने शांति के लिए कोई रोडमैप पेश किया है. वे केवल ध्यान भटकाने के उपायों की बात कर रहे हैं जैसे ‘सीमा सील करना’, ‘एनआरसी लागू करना’ या ‘मादक पदार्थों के खिलाफ युद्ध शुरू करना’. लेकिन असली मुद्दा शांति और सामान्य स्थिति की बहाली है.'

सहयोगियों ने समर्थन वापस लिया

17 नवंबर 2024 को मणिपुर में बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार से राष्ट्रीय पीपुल्स पार्टी (NPP) के सात विधायकों ने समर्थन वापस ले लिया. उनका कहना था कि राज्य में जारी अस्थिरता और संकट को हल करने में सरकार पूरी तरह से विफल रही है. एनपीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कोंराड संगमा ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को एक पत्र लिखकर इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की और समर्थन वापस लेने की घोषणा की.

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22 जनवरी 2025 को जनता दल (यूनाइटेड) ने भी बीरेन सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया. हालांकि इस कदम के तुरंत बाद पार्टी ने अपनी मणिपुर राज्य अध्यक्ष को "अवज्ञा" के लिए हटाया और फिर NDA के साथ समर्थन जारी रखने की घोषणा की. 6 अगस्त 2023 को कूकी पीपुल्स अलायंस (KPA) ने भाजपा सरकार से अपना समर्थन वापस लिया था.

यह भी पढ़ें: मैतेई, कुकी या कोई न्यूट्रल चेहरा... कौन लेगा मणिपुर में एन बीरेन सिंह की जगह?

ट्रुथ फॉरेंसिक की रिपोर्ट

Truth Labs Forensic Services द्वारा की गई जांच में यह पाया गया कि लीक हुए टेप में आवाज की पहचान मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की आवाज के रूप में की गई थी. फॉरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, उनके सार्वजनिक भाषणों के नमूनों से तुलना करते हुए यह पाया गया कि आवाज का 93% मिलान था.

मुख्यमंत्री पद के लिए प्रतिस्पर्धा

बीरेन सिंह के खिलाफ आलोचनाओं का दौर जारी था और मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में युन्नम खेमचंद सिंह, ठाकचोम सत्यब्रत सिंह और थोंगाम बिष्वजीत सिंह के नाम सामने आ रहे थे. इनमें से युन्नम खेमचंद सिंह ने पहले ही बिरेन सिंह के नेतृत्व की आलोचना की थी, खासकर राज्य में जातीय संघर्ष के मामले में.

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यह भी पढ़ें: दिल्ली में आतिशी, मणिपुर में बीरेन सिंह... आखिर कार्यवाहक CM के पास क्या पावर होती है?

मणिपुर विधानसभा की स्थिति

मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में, भाजपा के पास 37 विधायक हैं, जबकि जनतादल (यूनाइटेड) के पास एक और पांच विधायक नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के हैं, जो सरकार के समर्थन में हैं. कांग्रेस के पास पांच विधायक हैं, जबकि कूकी पीपुल्स अलायंस के दो विधायक हैं, जिन्होंने अगस्त 2023 में सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया.

2025: मणिपुर हिंसा में अब तक की घटनाएं! 

17 जनवरी, 2025: केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने कुकी-जो परिषद के सदस्यों से कहा है कि संघर्षग्रस्त मणिपुर में किसी भी राजनीतिक वार्ता को शुरू करने के लिए हिंसा को खत्म करने की सख्त जरूरत है. 

जनवरी 2025: मणिपुर के सीएम बीरेन सिंह ने नागा नेताओं से संकट को हल करने में मदद करने की अपील की. 

8 फरवरी, 2025: मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि उनकी सरकार संघर्षग्रस्त पूर्वोत्तर राज्य में शांति बहाल करने और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कोशिशें कर रही है कि लोग पहले की तरह एक साथ रहें.

9 फरवरी, 2025: एन. बीरेन सिंह ने मणिपुर के सीएम पद से इस्तीफा दे दिया.

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