प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देशभर में 48 स्थानों पर तलाशी के बाद विवो इंडिया (VivO India) के 66 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट सहित 465 करोड़ रुपये के विभिन्न संस्थाओं के 119 बैंक खातों को जब्त कर लिया है. ईडी के मुताबिक, वीवो इंडिया ने 62,476 करोड़ रुपये (भारत से बाहर के कारोबार का लगभग 50%) चीन को भेजा है. भारत में टैक्स के भुगतान से बचने के लिए ऐसा किया गया.
कई स्थानों की तलाशी
वित्तीय जांच एजेंसी ने वीवो मोबाइल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और इसकी 23 संबद्ध कंपनियों जैसे ग्रैंड प्रॉस्पेक्ट इंटरनेशनल कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड (GPICPL) से जुड़े स्थानों पर तलाशी ली थी. ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दो किलोग्राम गोल्ड बार और 73 लाख रुपये नकद भी जब्त किए हैं.
सोलन, हिमाचल प्रदेश और गांधीनगर का पता
विवो मोबाइल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को 1 अगस्त 2014 को हांगकांग स्थित कंपनी मल्टी एकॉर्ड लिमिटेड की सहायक कंपनी के रूप में शामिल किया गया था और यह दिल्ली में रजिस्टर्ड थी. GPICPL को 3 दिसंबर 2014 को शिमला में रजिस्टर्ड किया गया था, जिसमें सोलन, हिमाचल प्रदेश और गांधीनगर, जम्मू के रजिस्टर्ड पते थे.
चीनी नागरिकों ने छोड़ा देश
GPICPL को चीनी नागरिकों और चार्टर्ड एकाउंटेंट, नितिन गर्ग की मदद से शामिल किया गया था. चीनी नागरिक बिन लू ने 26 अप्रैल 2018 को भारत छोड़ दिया. जबकि झेंगशेन ओयू और झांग जी 2021 में भारत से बाहर चले गए.
ईडी ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से दायर शिकायत के आधार पर GPICPL, उसके निदेशकों, शेयरधारकों के खिलाफ दिसंबर 2021 में दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज FIR के आधार पर फरवरी 2022 में मामला दर्ज किया था.
जाली पते का इस्तेमाल
FIR के अनुसार, GPICPL और उसके शेयरधारकों ने निगमन के समय जाली पहचान दस्तावेजों और जाली पतों का इस्तेमाल किया था.
ईडी ने एक बयान में कहा, आरोप सही पाए गए, क्योंकि जांच से पता चला कि GPICPL के निदेशकों द्वारा बताए गए पते उनके नहीं थे, लेकिन यह एक सरकारी भवन और एक वरिष्ठ नौकरशाह का घर था. ईडी ने आरोप लगाया है कि GPICPL के निदेशक बिन लू भी वीवो के पूर्व निदेशक थे.