वक्फ संशोधन विधेयक 2024 राज्यसभा से भी पारित हो गया है. राज्यसभा में आधी रात के बाद तक चली मैराथन चर्चा का अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब दिया. इसके बाद बिल पर क्लॉज बाई क्लॉज वोटिंग हुई. इस बिल को राज्यसभा में डिवीजन के बाद पारित कर दिया गया है. वक्फ बिल के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 वोट पड़े.
राज्यसभा में मणिपुर पर भाषण देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, 'मणिपुर के मुद्दे पर विपक्ष बस राजनीति कर रहा है. मैं इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहता. डेरेक ओ'ब्रायन ने मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मुद्दे को उठाया. वहां, नस्लीय हिंसा हुई और कई महिलाओं को अत्याचार का सामना करना पड़ा. लेकिन, पश्चिम बंगाल में ऐसा कुछ नहीं था. संदेशखाली में सैकड़ों महिलाओं का शोषण हुआ. आपके ही पार्टी (टीएमसी) का व्यक्ति दुर्व्यवहार करने में शामिल था, जिसे बाद उसे सस्पेंड करना पड़ा. मणिपुर में 250 से ज्यादा लोगों की मौत को मैं स्वीकार करता हूं. मगर बंगाल में चुनावी हिंसा में ही 250 लोग मार दिए गए.'
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने का वैधानिक प्रस्ताव को राज्यसभा से पारित कर दिया गया है. इस दौरान सदन में विभिन्न दलों के सदस्यों ने इस फैसले का समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने राज्य की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि जल्द दोनों समुदायों की बैठक होगी. मणिपुर हिंसा पर विपक्ष बस राजनीति कर रहा है.
राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मणिपुर हिंसा की जांच की मांग की है. साथ ही केंद्र की मोदी सरकार से श्वेत पत्र जारी करने को कहा है. खरगे ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताया और कहा कि मणिपुर में हुई हिंसा के कारणों और इससे जुड़े पक्षों का विस्तार से विश्लेषण होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को दोहराया ना जा सके.
राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मणिपुर पर चर्चा के दौरान कहा कि लगभग दो सालों से मणिपुर जल रहा है. केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह से इस विवाद को खत्म करने और हिंसा रोकने में विफल रही है. मणिपुर में अब तक 260 लोगों की मौत हो चुकी है. 60 से ज्यादा लोग दूसरे जगह शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं. अस्पताल, स्कूल, व्यापार और पूजा के स्थल पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं. परिवार बिखर गए हैं. लेकिन, मोदी सरकार हिंसा को बस शांति से देख रही है. 4700 से ज्यादा घर जला दिए गए हैं. मई 3 से 30 जुलाई 2023 तक मर्डर, लूट, हिंसा, यौन उत्पीड़न और रेप से जुड़े मामले में 3000 एफआईआर दर्ज किए गए हैं.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में मणिपुर राज्य में राष्ट्रपति शासन के संबंध में प्रस्ताव पेश किया है. गृहमंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 356(1) के तहत 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति द्वारा जारी उद्घोषणा को सदन की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया है.
वक्फ संशोधन बिल राज्यसभा में भी पास हो गया है. इसके पक्ष में 128 वोट पड़े. वहीं विपक्ष में 95 सांसदों ने वोट किया. अब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, वहां से मंजूरी मिलने के बाद ये कानून बन जाएगा.
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन बिल को मतदान पारित किए जाने के लिए पेश किया. विपक्ष ने इस पर डिवीजन की मांग की है. सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि जयराम रमेश जी के लगातार इंटरवेंशन को देखते हुए लॉबी पहले से ही क्लियर हैं और प्रक्रिया वही है. राज्यसभा में इस बिल पर वोटिंग शुरू हो गई है.
तिरुचि शिवा के संशोधन प्रस्ताव पर डिवीजन हुआ. इस प्रस्ताव के पक्ष में 92 और विपक्ष में 125 वोट पड़े. तिरुचि शिवा का ये संशोधन प्रस्ताव वोटिंग में गिर गया है.
डीएमके के राज्यसभा सदस्य तिरुचि शिवा ने वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के प्रावधान में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था. ध्वनिमत से मतदान के बाद सभापति ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने की बात कही. तिरुचि शिवा ने इस पर डिवीजन की मांग की. अब इस संशोधन प्रस्ताव पर मतदान हो रहा है. लॉबी क्लियर करा ली गई है और राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल ने वोटिंग की प्रक्रिया को लेकर जानकारी दी और बताया कि वोटिंग प्रक्रिया की शुरुआत अलार्म साउंड के साथ होगी और इसी साउंड के साथ यह प्रक्रिया समाप्त भी होगी.
क्लॉज बाई क्लॉज संशोधन प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान आसन से जगदीप धनखड़ ने आरजेडी सांसद मनोज झा का नाम लिया. मनोज झा ने कहा कि सर विकल्प नहीं है, मूव कर रहा हूं. इस पर सभापति ने कहा कि विकल्प है आपके पास. अगर मूव नहीं करना है तो बोलो, चेयर प्रोटेक्ट करेगा.
राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल को मतदान के लिए ले लिया गया है. क्लॉज बाई क्लॉज मतदान शुरू हो गया है. क्लॉज एक में नसीर हुसैन का संशोधन गिर गया है. वहीं, क्लॉज टू विधेयक का अंग बन गया है. क्लॉज तीन में चार संशोधन प्रस्ताव लिए गए. ध्वनिमत से हुई वोटिंग में एए रहीम, जॉन ब्रिटास, वी शिवदासन के संशोधन प्रस्ताव गिर गए. संतोष कुमार पी, पीपी सुनील, हरीश वीरान के संशोधन प्रस्ताव भी गिर गए. क्लॉज फोर में संशोधन के 28 प्रस्ताव पेश किए गए. ये सभी प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गए. क्लॉज फाइव में संशोधन के प्रस्ताव भी ध्वनिमत से हुई वोटिंग में अस्वीकार कर दिए गए. क्लॉज फाइव में संशोधन के लिए विपक्ष की ओर प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव भी गिर गए और ये क्लॉज विधेयक का अंग बना. क्लॉज सिक्स में संशोधन के लिए विपक्षी सदस्यों की ओर से 11 प्रस्ताव पेश किए गए. ये सभी संशोधन प्रस्ताव भी ध्वनिमत से वोटिंग में नकार दिए गए.
किरेन रिजिजू ने कहा कि आप चाहते हैं कि वक्फ बोर्ड में बस मुस्लिम ही बैठे. हिंदू या किसी दूसरे धर्म के लोगों के साथ कोई विवाद होगा तो कैसे तय होगा. इस तरह की बॉडी जो है, वह सेक्यूलर होना चाहिए. इसमें चार लोग हैं तो वह निर्णय कैसे बदल सकते हैं. वह तो बस अपने एक्सपर्टाइज का उपयोग कर सकता है. आपको कभी भी ये नहीं भूलना चाहिए कि अगर आप एक बार वक्फ डिक्लेयर कर देते हैं तो उसका स्टेटस नहीं बदल सकते. वंस अ वक्फ, ऑलवेज अ वक्फ. इसलिए आप सोचकर करिए. क्या इसमें मनमानी करने दिया जाए. आगाखानी, शिया, सुन्नी, हर समुदाय के लोग हमारे पास आए और कहा कि जल्दी से जल्दी इस बिल को पारित करिए क्योंकि चंद लोग पूरा का पूरा प्रॉपर्टी कब्जा करके रखे हुए हैं. कल से इसका कितना स्वागत होता है, देखिएगा. हम नहीं, मुसलमानों को आप डरा रहे हैं और मुख्यधारा से बाहर करने की कोशिश कर रहे हैं. सीएए पर जिन्होंने कहा था कि इसके पारित होने के बाद मुसलमानों की नागरिकता छिन जाएगा. किसी की नागरिकता छिनी. ये बिल आज पारित हो जाएगा और इससे किसी एक मुसलमान का नुकसान नहीं होने वाला, करोड़ों मुसलमानों का फायदा होने वाला है. जितने सदस्यों ने इस चर्चा में भाग लिया, सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं. मिलकर इतनी रात तक काम किया है हमने. ये अच्छा संदेश यहां से जाएगा. इस बिल को पारित करने में बड़ा दिल दिखाते हुए सर्वसम्मति से सपोर्ट करिए.
राज्यसभा में वक्फ बिल पर चर्चा पूरी हो गई है. अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू अब चर्चा का जवाब दे रहे हैं. किरेन रिजिजू ने कहा कि जब आ रहा था, लॉबी में कई सदस्यों ने कहा कि कितना समय और लगेगा. हमने उनसे कहा कि अभी एक और बिजनेस हम लेंगे. इसलिए जल्दी जवाब समाप्त करूंगा. उन्होंने कहा कि शुरू के बिल और आज राज्यसभा से पारित होने जा रहे ड्राफ्ट में कितना अंतर है. हम सुनने वाले लोग हैं. जेपीसी में ठीक है कि आप जितना चाहते होंगे, उतना समय नहीं मिला होगा लेकिन फिर भी कई सुझाव हैं जो आप लोगों के कहने पर ही वक्फ प्रॉपर्टी बाई यूजर में हमने लिया है और जो एग्जिस्टिंग प्रॉपर्टी में छेड़छाड़ नहीं करेंगे, ये भी आपके सुझाव पर हुआ है. कलेक्टर से ऊपर के अधिकारी को आपके कहने पर ही बनाया. लोकतंत्र बहुमत से चलता है. जिसका बहुमत होता है, उसी की सरकार होती है. आपने कहा ट्रिब्यूनल में तीन मेंबर होने चाहिए, हमने वो भी माना है. उन्होंने आगे कहा कि एक सवाल बार-बार दोहराया गया कि प्रैक्टिसिंग मुस्लिम कैसे तय होगा. हम सब कोई न कोई धर्म लिखते ही हैं न यहां चुनकर आए हैं तो. अभी कैसे तय होता है. वैसे ही तय होगा. किरेन रिजिजू ने कहा कि आप 70 साल से सत्ता में थे. आप जो काम नहीं कर पाए, वह मोदी जी को करना पड़ रहा है. दिनभर इतने वरिष्ठ लोग अपना ही पर्दाफाश कर रहे थे. सोच रहा था कि बाहर बोलूंगा. वक्फ प्रॉपर्टी में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है. कोई कर भी नहीं सकता. गैर मुस्लिम किसी धार्मिक बॉडी में सदस्य नहीं बनेगा. वक्फ बोर्ड एक स्टैचुएटरी बॉडी होती है.
आरएलएम के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने वक्फ बिल का समर्थन किया है. उपेंद्र कुशवाहा ने विपक्ष से भी समर्थन की अपील करते हुए कहा कि इस बिल को क्यों लाना पड़ रहा है, इसके कारणों पर अधिक चर्चा नहीं हुई. सरकार पर आपको भरोसा नहीं है, मत कीजिए लेकिन अपनी ही बनाई सच्चर कमेटी पर तो कीजिए. ये ऐतिहासिक क्षण है.
सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने राज्यसभा में वक्फ बिल को धार्मिक मामलों में सरकार का हस्तक्षेप बताया और कहा कि इस पर नियंत्रण भी मुसलमानों का ही होना चाहिए. वक्फ बोर्ड में मुसलमानों के अलावा अन्य लोगों को जोड़ा जाना चिंता का विषय है. वक्फ मुसलमानों का है और इस पर उनका ही हक होना चाहिए. पिछले 11 साल से नरेंद्र मोदी जी की सरकार देश में है. मुसलमानों के खिलाफ नफरत पैदा करना, शक करना, ये सिलसिला पिछले 11 महीनों से चल रहा है. कैसे विश्वास किया जाए इन पर. सरकार को वक्फ संपत्तियों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. ये मुसलमानों के खिलाफ है.
राज्यसभा में वक्फ बिल पर वोटिंग को लेकर वाईएसआर कांग्रेस ने भी व्हिप जारी नहीं किया है. कहा जा रहा है कि पार्टी को कुछ सांसदों के क्रॉस वोटिंग करने की आशंका थी और इसी को देखते हुए पार्टी ने व्हिप जारी नहीं करने का फैसला किया है. बीजू जनता दल ने भी राज्यसभा में वोटिंग के लिए व्हिप जारी नहीं किया है.
एनसीपी (शरद पवार) की राज्यसभा सांसद डॉक्टर फौजिया खान ने कहा कि ये नहीं कह रही कि सुधार की आवश्यकता नहीं है. सुधार की आवश्यकता है. वक्फ बोर्ड के सामने जो अतिक्रमण और अवैध कब्जे की चुनौती है. वक्फ को रिफॉर्म करने की मंशा होती तो अतिक्रमण हटवाने में मदद, भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई के प्रावधान होते. यहां तो पहले जिसे गंभीर अपराध माना जाता था, उसे भी आप जमानती बनाकर प्रावधान लाए हैं. अगर वक्फ बोर्ड को आप सशक्त करना चाहते तो स्टाफ देने, कार्यालय की बात होती. स्वायत्तता की बात होती. स्वायत्तता छिनने की बात हो रही है. क्या दूसरे समुदाय के लोग बोर्ड का सदस्य बनाए जाएंगे तो ये सशक्त हो जाएगा. क्या लॉजिक है इस बात में. वक्फ के लिए जो जमीन लोगों ने धार्मिक कार्य के लिए दान किए हैं, उसे आप कह रहे हैं कि धार्मिक नहीं है. वक्फ जमीनों का सबसे बड़ा इनक्रोचर कौन है, ये पूछती हूं. सच्चर कमेटी के अनुसार राज्य सरकारें बड़ी इनक्रोचर हैं. आपने उनको ही अथॉरिटी दे दी है. क्या ये अन्यायकारी नहीं है. बचपन में कहानी सुनी थी कि एक भेड़िया बकरे की खाल ओढ़कर शिकार करता है. आज वो कहानी याद आ रही है. इस बिल में हर आर्टिकल का उल्लंघन हो रहा है. ये पूछना चाहती हूं कि आप गरीब मुसलमानों के फायदे की बात हो रही है. किस तरह करोगे. जिस तरह सेना की आरक्षित 13 हजार एकड़ जमीन अडानी जी, बाबा रामदेव को दे दिया. क्या उसी तरह मुसलमानों का भला करोगे. आपके पास बजट है, उससे भला करिए. सुधांशु त्रिवेदी ने जो कहा था कि एक कम्युनिटी माफिया, गुनहगारों के साथ है. मेरा सवाल है कि बिल्किस बानो के बलात्कारियों का साथ कौन दे रहा है, क्या वे फरिश्ते हैं.
प्रमोद तिवारी ने सदन की कार्यवाही के संचालन में अनियमितता का मुद्दा उठाते हुए रूल 237 के तहत आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही छह बजे के बाद अगर चलती है तो सदन की सहमति लेना जरूरी है. आप बहुत खींचेंगे तो आठ घंटे चर्चा का समय तय हुआ था यानी एक से नौ बजे तक. इसके बाद सदन किसके सेंस पर चल रहा है. इस पर मंत्री ने कुछ कहा. प्रमोद तिवारी ने कहा कि बैठो यार, आप मंत्री हो. आपको ध्यान देना चाहिए था इस तरफ और मैं अनियमितता को ठीक कराने की बात कर रहा हूं तो बोल रहे हो. हरिवंश ने कहा कि प्रमोद जी इसके लिए पहले से ही बीएसी और पीएसी का अप्रूवल है.
सपा के राज्यसभा सांसद जावेद खान ने कहा कि मंत्री जी को भी ये ऑथेंटिकेट करना चाहिए कि किस तरह से संसद भवन वक्फ की प्रॉपर्टी बन गया होता. किस आधार पर वो यह बात कह रहे थे. वक्फ प्रॉपर्टी में 60 फीसदी कब्रिस्तान ही है. उससे कौन से आमदनी हो सकती है. वहां तो बस कब्र खोदने का ही एक काम हो सकता है. केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि नरेंद्र मोदी जी तो मुस्लिमों की बात करते हैं. कांग्रेस वाले आघात करते हैं.
सुधांशु त्रिवेदी ने बोलते-बोलते इशरत जहां, अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी के नाम लिए और कहा कि आज मुसलमान इनके साथ हैं. इस पर एनसीपी (शरद पवार) की सांसद फौजिया खान ने आपत्ति की और एक्सपंज करने की मांग की. इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि फौजिया जी, आप पूरी बात सुनेंगी तो समझ आएगा कि किस कॉन्टेस्ट में बोले हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सुधांशु जी ने इंडी अलायंस को लेकर कहा है. उन्होंने कहा कि इशरत जहां, यही एनसीपी ने इशरत के घर जाकर इनाम भी दिया और शहीद बताया. दूसरा कहा अतीक अहमद, इंडी अलायंस. तीसरा मुख्तार अंसारी, ये भी इंडी अलायंस. ये सारे नाम आपके इंडी अलायंस से जुड़े हुए थे. डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि याकूब मेमन के नमाज-ए-जनाजा में कितने लोग गए, कितने लोग अब्दुल कलाम के नमाज-ए-जनाजा में गए. एक सांसद तो ये कहते हैं कि अफजल की ज्यूडिशियल किलिंग हुई है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुझे लेकर जो कहा गया है, उसकी निंदा करता हूं. इस पर अमित शाह ने कहा कि माइक चालू करा दीजिए और दिग्विजय सिंह जी कह दें कि उन्होंने नहीं कहा है कि 26-11 हमले में संघ का हाथ था. दिग्विजय सिंह ने कहा कि हमने ये बात नहीं कही है. गृह मंत्री जी बता दें कि गुजरात के दंगों के समय वे वहां के गृह मंत्री थे, उन लोगों की क्या भूमिका थी. इस पर अमित शाह ने कहा कि जब दंगे हुए, उसके 18 महीने बाद गृह मंत्री बना था. इनको मेरा हौवा ऐसा है कि हर जगह मैं ही दिखाई देता हूं.
डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इस्लाम में साफ है कि अल्लाह गैर मुस्लिम की दुआ कुबूल नहीं करते. जब इबादत कुबूल नहीं हो सकती तो जायदाद कैसे कुबूल हो सकती है. जो हमारी सरकार ने किया है, मुस्लिम भावना के सम्मान में किया है. इस वक्फ ने कई अद्भुत नजारे दिखाए. कम्युनिस्ट जो धर्म को अफीम बताते हैं, वे खुदाई-खुद्दार हो गए. वक्फ और शिवसेना (यूबीटी) एक हो गए. दोनों मिलकर हो गए हम. ब्रिटिश हुकूमत आई तो मुगलों से सारा हक ले लिया था, फिर गुजरात से लखनऊ तक उनका मालिकाना हक निकलने कहां से लगा. पावर डीड ट्रांसफर हुआ था, तब आप पढ़े नहीं थे क्या. किन हुकुमतों की बात कर रहे हैं, सूरत नगर निगम पर दावा है वक्फ का तो ये वो हुकुमतें थीं जो जाजिया लगाती थीं. क्या संविधान में उन हुकुमतों के फरमान को मान्यता देना सही है क्या. जमींदारी उन्मुलन 1948 में हो गया. बाद में जमींदार कहां से आ गए. 2013 के एक्ट ने ये व्यवस्था कर रखी थी कि गरीबों की जमीन लेकर वक्फ को दे दी गई. गांधी जी के शिष्य विनोबा भावे जी का वो भूदान आंदोलन था तो आज के गांधियों का ये भू हड़प आंदोलन था. किसी क्रिश्चन ने तो नहीं कहा कि इंडिया गेट, चर्च गेट हमारा है. हमारी सरकार ने जो संशोधन किए हैं, ये मजहबी फरमान से नहीं बाबा साहब के संविधान से चलेगा. किसी ने आजादी के समय डिमांड की थी क्या कि हमें वक्फ बोर्ड चाहिए. फिर क्यों दिया गया. मुस्लिम समाज को मुख्यधारा में आने में प्रॉब्लम नहीं थी.
बीजेपी सांसद डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जेपीसी के प्रमुख दूसरे सदन के सदस्य जगदंबिका पाल जी हों या किरेन रिजिजू जी हों या प्रधानमंत्री मोदी जी, सबने इबादत की तरह काम किया है. कहावत कही जाती है कि नया मुल्ला प्याज ज्यादा खाता है लेकिन यहां तो पुराना मुल्ला प्याज बहुत खा रहा था और इतना खा रहा था कि गरीब मुसलमान की आंखों से आंसू निकल रहे थे. इतना ही प्यार है तो ये शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड अलग क्यों है भाई. उन्होंने कई केस का उल्लेख किया और कहा कि ताजमहल पर भी दावा कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि शाहजहां के जमाने का लिखा हुआ लेकर आइए तब मानेंगे कि दावा बनता है या नहीं. हमने ईमानदारी से मुस्लिम समाज के कल्याण के लिए काम किया है. ये मुकाबला शराफत अली और शरारत खान के बीच मुकाबला है. इन जरूरतमंद मुस्लिमों की लड़ाई के लिए गरीबों के मन की कसक और कट्टरपंथी की ठसक के बीच हमारी सरकार ने गरीबों का साथ दिया है. ईमानदार मुस्लिम के लिए ये उम्मीद है लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो उम्मां का ख्वाब पाले हुए थे, उनके ख्वाब पर पानी फिर गया है. ये उम्मीद और उम्मां के बीच का भी मामला है. खुदाई से भी बहुत लोगों को डर लगने लगा है. जहां जहां खुदा है, वहां-वहां भगवान हैं. नदीमुल हक साहब ने जो बोला था न किसी के बाप का हिंदोस्तान थोड़ी है. कहना चाहता हूं कि जिसने खून बहाया न, उसके बाप का ये हिंदुस्तान जरूर है.
एआईएडीएमके सांसद डॉक्टर थंबी दुरई ने वक्फ बिल का विरोध किया है. राज्यसभा में डॉक्टर थंबी दुरई ने कहा कि हमारे राज्य के साथ ही आसपास बहुत मुस्लिम आबादी है, मुस्लिम नेता हैं. उनकी चिंताओं का ध्यान रखें.
केरल से कांग्रेस की राज्यसभा सांसद जेबी माथेर हीशम ने कहा कि मैं और मेरी पार्टी मुणंबम के छह सौ परिवारों के साथ बगैर किसी कंडीशन के खड़ी है. हमारा समर्थन उनको है. उन्हें कोई उनकी खून-पसीने की कमाई से खरीदी गई जमीन से बेदखल नहीं कर सकता. फारुख कॉलेज ट्रस्ट ने भी वक्फ में ये कहा है कि हमने ये जमीन बेची है. केरल को कम्युनल करने की कोई कोशिश सफल नहीं होगी.कोझिको़ड में दुर्गा भगवती मंदिर ने ईद के लिए सभी इंतजाम किए और सेलिब्रेशन हुआ. ये बिल देश के सेक्यूलर ढांचे के अनुरूप नहीं है. ये धार्मिक आजादी पर आघात है. आज मुसलमानों के अधिकार पर हमला किया जा रहा है, कल अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाएगा. ये बिल सत्ताधारी दल का राजनीतिक एजेंडा है. हम इस असंवैधानिक बिल का विरोध करते हैं.
हरियाणा से राज्यसभा के निर्दलीय सांसद कार्तिकेय शर्मा ने वक्फ बिल का समर्थन किया है. कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि वक्फ बोर्ड और इसके प्रशासन की कुनीतियों ने मुसलमानों को उनके हक से वंचित रखा है. ये विषय सिर्फ और सिर्फ संपत्ति के मैनेजमेंट और उसे नियमों के तहत लाने का है. इसे धर्म के चश्मे से नहीं देखना चाहिए. क्या कोई भी ये कह सकता है कि वक्फ के प्रावधानों का पालन उसके सिद्धांतों के हिसाब से हो रहा है. क्या वक्फ ने जमीनों पर गैरकानूनी कब्जा नहीं किया है और क्या उसकी जमीनों पर कब्जा नहीं हुआ है. यमुनानगर के जठलैना गुरुद्वारा पर 1967 में क्लेम किया और तब से वह गुरुद्वारा वहीं अटका हुआ है क्योंकि केस पेंडिंग है. ये बिल ऐतिहासिक है और इसका समर्थन करता हूं.
महाराष्ट्र से बीजेपी की राज्यसभा सांसद डॉक्टर मेधा विश्राम कुलकर्णी ने कहा कि ये कागज भी नहीं दिखाएंगे और ये भी कहेंगे कि यह प्रॉपर्टी हमारी है. यूपी की बात करें तो लोकसभा चुनाव के समय एक डॉक्यूमेंट आया था, जिसमें पीएम आवास योजना के ज्यादातर लाभार्थी हैं. इसका लाभार्थी कोई कैसे बनता है, ऐसे ही न कि अपनी प्रॉपर्टी नहीं है. फिर वहां इतनी प्रॉपर्टी कैसे बनी. यूपी में ऐसी 61 फीसदी प्रॉपर्टी ऐसी हैं जिनका एरिया जीरो मार्क किया गया है. वक्फ डीड कितने हैं, दो लाख 32 हजार में से केवल चार हजार 345. क्यों भाई, कोई माता-पिता भी अपने बच्चे को गिफ्ट करते हैं तो डीड करते हैं. आपको किसी ने ओरली प्रॉपर्टी गिफ्ट कर दी. ये देश हदीस और कुरान से नहीं, संविधान से चलता है. जो कायदा हिंदू, जैन के लिए है, वह मुसलमान के लिए क्यों नहीं हो सकता. जिन्होंने ये मान लिया है कि हमें जागृत नहीं होना है. एक मंदिर के ट्रस्ट और वक्फ बोर्ड की तुलना कैसे हो सकती है. मंदिर की तुलना मस्जिद से होगी न, उसमें किसी का हस्तक्षेप नहीं है.
संजय झा ने कहा कि बिहार के पूर्व के मुख्यमंत्री रहे, उन्हीं का लोकसभा में बयान है. कल गृह मंत्री जी ने लोकसभा में कोट भी किया कि कैसे उन्होंने कहा है कि कठोर कानून लाए जाने की जरूरत है. इस पर मनोज झा ने आपत्ति की. गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर कहा कि संजय झा जी ने थोड़ी गलती कर दी. लालू यादव जी ने लोकसभा में कहा था. बताइए कहा था कि नहीं. इस पर मनोज झा ने कहा कि साइटेशन के रूल हैं. साइटेशन ऐसे नहीं होता है. अमित शाह ने कहा कि साइटेशन बस आपको ही नहीं मालूम है. इस पर मनोज झा ने कहा कि आपको भी मालूम है लेकिन केवल चेरी पिकिंग मत करिए. अमित शाह ने कहा कि मैंने उनके भाषण में से एक पैरा पढ़ा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सभी लोग राज्यसभा के डिबेट की सराहना कर रहे थे.
जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि जब ये बिल आया था तब जरूर एक संशय की स्थिति हुई. नीतीश कुमार जी के पास भी मुस्लिम समाज के लोग मिलने के लिए आए. मैं भी उस मीटिंग में था. उन्होंने अपनी चिंताएं बताईं और उनकी मेन चिंता यही थी कि उनकी धार्मिक संस्थाओं पर क्या असर पड़ेगा. क्या वो खतरे में आ जाएगा. जो हमारे जेपीसी में थे, उन्होंने भी ये बात रखी. कल गृह मंत्री जी का भाषण सुना, बात साफ हो गई कि कोई मस्जिद खतरे में नहीं आएगी. मुस्लिम समाज के लोगों ने बताया कि उनके बीच यही फैलाया जा रहा था कि आपके जितने मस्जिद, कब्रिस्तान हैं, उन पर कोई बात नहीं है. लागू होने के बाद जो स्थिति बनेगी, उनपर लागू होगा. पुरानी स्थिति बहाल रहेगी. बिहार में पसमांदा मुस्लिम 73 परसेंट हैं. उसमें राइन, अंसारी, मंसूरी समाज के लोग हैं. आजतक उनको वक्फ में कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया था. मेजॉरिटी है पसमांदा का, उनको पहली बार इसमें जगह मिला है. महिलाओं का भी स्थान इसमें रहेगा. यह बहुत ही प्रोग्रेसिव है. इस बिल के आने से निश्चित रूप से जिस उद्देश्य के लिए लोग दान करते हैं, वह पूरा होगा. पसमांदा समाज में इतनी खुशी है, इतना फोन आ रहा है. पहली बार उन लोगों को लग रहा है कि ये कानून लागू हो जाएगा तो गरीब मुसलमान के बीच में काम होगा. जो भ्रांतियां थीं, वह भी खत्म हुई है. जब हमारी सरकार बनी थी, तब भागलपुर दंगा हुआ था. हजारों लोग मारे गए थे, 15 साल जांच नहीं हुआ. जो दंगा कराया, उसको सम्मानित किया जाता था और जब हमारी सरकार आई, 2006 में कमीशन बैठाकर के दंगा करने वालों को सजा दिलाई गई और उनको सजा दिलवाई. 1984 दंगे में जिस तरह सिख समाज को मासिक पैसा मिलता है, उस तरह से वहां के लोगों को दिया है.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि ज्यादा बड़ी बातें बोलने वाले लोग सत्य से परे बोलने वाले लोग हैं. 1995 के एक्ट को इन्होंने सर्वसम्मति से स्वीकार किया. आज वही लोग कहते हैं कि ये ठीक नहीं है. लोगों को तबाह करने के लिए नए क्लॉज जो डाले गए हैं, उनको छोड़कर कुछ नया नहीं है. लोकतंत्र में निर्वाचित सदस्य तो ठीक हैं न, उनको निकालकर सत्ता अपने हाथ में लेने के लिए आप नॉमिनेटेड की बात कर रहे हैं. इरादा ठीक नहीं है. वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी का लैंडबैंक बनाकर बिजनेसमैन को देंगे या किसको देंगे, पता नहीं है. मुफ्त का मिला तो सबको खिलाएंगे बफे सिस्टम के जैसा. आज किरेन रिजिजू ने बफे सिस्टम रखा है. जो पहले जाएगा, वही अच्छा खाना खाएगा. लास्ट में हम जाएंगे तो जो रहेगा वही मिलेगा. पहले जो था, गवर्नमेंट प्रॉपर्टी वक्फ पाई जाती है तो वह वक्फ नहीं रहेगी. रेवेन्यू रिकॉर्ड चेक करके कलेक्टर सरकार को अपडेट करेंगे. कलेक्टर अपने पक्ष में करेगा, न्याय करने के लिए नहीं. पहले सांसद, पूर्व जज का सेंट्रल वक्फ बोर्ड में मुस्लिम होना जरूरी था, अब इस अनिवार्यता को हटा दिया है. मुस्लिम तो छोड़ो, मैं हिंदू हूं, मेरे जैसे दलित समाज के लोगों को भी नहीं रखते आप मंदिरों में. अब क्या कर दिए, मुसलमानों को निकाल दिए और गैर मुस्लिमों को डाल दिए. मुसलमानों को तंग करने के लिए हर चीज में आप हाथ डाल रहे हैं. ये अच्छा नहीं है. आप झगड़े का बीज डाल रहे हैं. आप उनको दबाने की कोशिश करेंगे तो ये आपको ही सुलझाना पड़ता है. अपने गृह मंत्री से अपील करूंगा कि आप इसे प्रेस्टिज इश्यू मत बनाओ. मुसलमानों के लिए ये अच्छा नहीं है और संविधान के ये खिलाफ है. सौहार्द के माहौल को कायम रखने की कोशिश करो, छेड़ने की नहीं. नजर नहीं है, नजारों की बात करते हैं... के साथ खड़गे ने अपनी बात समाप्त की.
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने वक्फ बिल पर कहा कि अल्पसंख्यकों को तंग करने के लिए ये बिल लाया गया है. 1995 के एक्ट में जो है, उसे डाल दिए और जो नहीं डालना चाहिए, वो भी डाल दिए. इस बिल में कई खामियां हैं. उधर से जो भी वक्ता बोलते हैं, पसमांदा-पसमांदा, महिला-महिला कर रहे हैं. ठीक है. उन्होंने पिछले वित्तीय वर्षों में अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट आवंटन और खर्च के आंकड़े भी सदन में गिनाए और कहा कि एक तो 4 हजार से घटाते घटाते 2800 करोड़ पर आए. एक तरफ बजट काट रहे हो और दूसरी तरफ आवंटित बजट को भी खर्च नहीं कर रहे. अल्पसंख्यकों को सुविधाएं देने के लिए आप तैयार नहीं हैं. उनकी पांच स्कीम को बंद कर दिए. योजनाएं बंद कर रहे हो और कहते हो पसमांदा के लिए, महिलाओं के लिए. बातें बड़ी-बड़ी करते हैं.
यूपी से बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉक्टर के लक्ष्मण ने कहा कि ये बिल जब से पेश हुआ है, कांग्रेस और अन्य विरोधी पार्टियां अल्पसंख्यकों को भटकाने का प्रयास कर रही हैं. पसमांदा मुस्लिम और अन्य मुस्लिमों की तरक्की के लिए लाए गए इस बिल को कांग्रेस सहन नहीं कर पा रही है. दशकों से हिंदू और मुसलमान के बीच नफरत की दीवार खड़ी कर वोट लेने की जो राजनीति चलती आ रही है, उसे हम देख रहे हैं.
किरेन रिजिजू ने कहा कि अभी कई सदस्यों को बोलना है. इस बिल के बाद सेकंड बिजनेस भी है. 9 बजे के बाद हमने डिनर का इंतजाम किया है. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इतने अच्छे से चर्चा चल रही है, ये बिल पारित किए जाने तक हम बैठेंगे. वो तो रेजोल्यूशन है, दो तीन घंटे लगेंगे उसमें. उसे हम कल ले लेंगे. क्यों हड़बड़ी में लेना चाहते हो उसे.
टीएमसी और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने राज्यसभा में वक्फ बिल का विरोध किया है. टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने कहा कि जब भी बीजेपी हारेगी, हारेगी जरूर. हम जब सत्ता में आएंगे तो सबसे पहले इस बिल के असंवैधानिक प्रावधान हटाएंगे. बीआरएस के सांसद केआर सुरेश रेड्डी ने कहा कि आपको सुधार की जरूरत लगी तो राज्यों के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए था. उन्होंने कहा कि हमें आपके इंटेंट पर शंका है. दरगाहों पर जाता रहता हूं, 55 फीसदी हिंदू जाते हैं, मन्नतें मांगते हैं. आप आज ये बिल लाए हैं कि गैर मुस्लिम वक्फ को नहीं दे सकते तो आप करना क्या चाहते हैं. क्या आप कन्वर्जन को बढ़ावा देना चाहते हैं या दरगाहों पर जाने से रोकना चाहते हैं. बड़े-बड़े लोग जाते हैं, अडानी जी भी जाते हैं. देश के सेक्यूलर ताने-बाने के खिलाफ है ये बिल. तेलंगाना में आज भी कई लोग जुबानी, सादा बैनामा करते हैं. सरकार रिफॉर्म लाती है तो हम कागज की भी इज्जत करते हैं. हम चाहते हैं कि आप बिल वापस ले लें. सेक्यूलरिज्म यहां शहीद हो रहा है. हम बिल का विरोध करते हैं.
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने वक्फ बिल को संविधान विरोधी बताते हुए कहा कि संविधान कहता है कि देश में सभी बराबर हैं. सभी को अपने मजहबी कामों के लिए मंदिर-मस्जिद, गुरुद्वारे के निर्माण और रखरखाव का अधिकार है. अल्पसंख्यक कार्य मंत्री असत्य बोलते हैं, देश को गुमराह कर रहे हैं. ये उम्मीद नहीं है. वक्फ को लेकर असत्य फैलाया जा रहा है. वक्फ ट्रिब्यूनल को ऐसे बताया जाता है जैसे मजहबी खाप पंचायत हो. उसमें भी तो सरकार के नियुक्त किए जज होते हैं. वक्फ बोर्ड खुद अपनी संपत्तियों के लिए मुकदमे लड़ रहा है. दिल्ली की जिन 123 संपत्तियों का जिक्र अल्पसंख्यक कार्य मंत्री और नेता सदन कर रहे थे, उसकी भी सच्चाई जानते हैं. 1911 में जब अंग्रेज राजधानी कोलकाता से दिल्ली लाए, तब रायसीना के आसपास की प्रॉपर्टी को एक्वायर किया गया. 1943 से 1945 के बीच समझौता हुआ और सुन्नी मजलिस के तहत संपत्तियां की गईं. गृह मंत्री जी जिन संपत्तियों की बात कर रहे हैं, ये वही संपत्तियां है. इंदिरा गांधी ने बर्नी कमेटी बनाई थी जिसकी रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने ये संपत्तियां दिल्ली वक्फ बोर्ड को सौंपा. विश्व हिंदू परिषद कोर्ट गया और 2011 तक मामला पेंडिंग रहा. को4ट ने कहा कि इसका निपटारा करो और यूपीए सरकार ने ये संपत्तियां दिल्ली वक्फ को सौंप दिया जिसका जिक्र कर गृह मंत्री जी कांग्रेस को कोस रहे हैं. जिस बिल को ये मुस्लिमों के हित में बता रहे हैं, लोकसभा में इनके पास ये बताने के लिए एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है. वक्फ की जमीनें भी देश की ही हैं. जब भी इस जमीन को लहू की जरूरत होगी, आपसे दो कदम आगे इमरान खड़ा मिलेगा. हमारी इबादतगाहें तो मत छीनिए ना, हमारी कब्रों में तो हमें सुकून से सोने दीजिए ना. बिल्किस के बलात्कारियों की रिहाई के बाद उन्हें माला पहनाने वाली पार्टी के नेता ये कह रहे हैं कि मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाएंगे. धन्यवाद मोदी जी, पहले गुजरात-ए-मोदी दिया अब सौगात-ए-मोदी दे रहे हैं. इसी सदन में बड़ी बड़ी बातें सीएए को लेकर कही गईं. दो हजार लोग भी नागरिकता लेने नहीं आए और 15 लाख लोग नागरिकता छोड़ गए. जम्हूरियत अकड़ से नहीं चलती है. मैं आज जद्द पे हूं तो इतना खुशगुमां न हो, चराग सबके बुझेंगे, हवा किसी की नहीं. सबको समझना पड़ेगा कि जब जंगल में आग लगती है तो न बरगद बचते हैं ना बांस. जब देश को सौगात-ए-मोदी मिलता है तो देश को वक्फ जैसा एक्ट मिलता है, इलेक्टोरल बॉन्ड मिलता है. ये सरकार रात के तीन बजे तक अपने ही नागरिकों को नीचा दिखाने के लिए जगाकर बिल ला रही थी तो अमेरिका टैरिफ लगा रहा था. नेता सदन जेपी नड्डा जी ने अच्छी बातें भी कीं. मैं भावुक हूं. देश की बहुत बड़ी आबादी को ये लगता है कि आप उनका भला करने का नहीं, उनकी इबादतगाहों को कब्जाने का बिल लेकर आ रहे हैं तो ये आपकी नाकामी है. पहले समझाइए फिल बिल लाइए. वामसी पोर्टल देख लीजिए, सरकार का झूठ समझ आ जाएगा. आप ताकत में हैं, संख्याबल के बल पर आप बिल पास करा लें. आपको ये बात समझनी पड़ेगी. आप सुझाव सुनने को तैयार नहीं हैं, शंका को दूर करने के लिए तैयार नहीं है. ये उम्मीद की नहीं, नाउम्मीदी की किरण है. ये बिल कहीं से अच्छा नहीं है. मुस्लिम नागरिकों को नीचा दिखाने का बिल है. अपने एक मतदाता वर्ग को खुश करने की कोशिश है जिन्हें इस बिल के पास हो जाने से कुछ मिलेगा भी नहीं. सबका साथ के नारे को रत्तीभर तो चरितार्थ करिए.
यूपी से बीजेपी के राज्यसभा सांसद बृजलाल ने बेट द्वारका द्वीप पर वक्फ के दावे का जिक्र किया और कहा कि भगवान कृष्ण से संबंधित ये तीर्थनगरी भी यूपीए सरकार होती तो वक्फ की हो गई होती. उन्होंने ये भी कहा कि 2017 में एक मौलाना ने कहा कि बद्रीनाथ मंदिर पर भी दावा करते हुए कहा कि ये बदरुद्दीन शाह हैं. अगर सरकार ये हमें नहीं देती है तो हम इस पर कब्जा कर लेंगे. बृजलाल ने इनेमी प्रॉपर्टी पर वक्फ के दावों का भी जिक्र किया.
राज्यसभा में निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल ने वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि प्रॉपर्टी मेरी, चैरिटी में मैं देना चाहता हूं. आप कौन हैं भाई. उन्होंने वक्फ सुधारों पर कहा कि सुधार तो हिंदू धर्म में भी होना चाहिए. तमिलनाडु और एक दो जगह गड़बड़ियों की बात हुई. अरे भाई, गड़बड़ियां तो आपकी सरकार में भी हैं. कपिल सिब्बल ने कहा कि वक्फ और ट्रस्ट में अंतर है. ट्रस्ट की संपत्ति बेची जा सकती है लेकिन वक्फ की संपत्ति नहीं. सभी धार्मिक स्थलों पर सरकार का नियंत्रण है. उन्होंने कहा कि इनको ये भी जानकारी नहीं है कि वक्फ क्या है और बीच में हस्तक्षेप करते हैं. इससे पहले किरेन रिजिजू ने कहा कि वरिष्ठ सदस्य हैं, ये अपनी बात कहकर चले जाते हैं. जवाब देंगे जब, ये रहेंगे नहीं. उन्होंने कहा कि आप ये कह रहे हैं, क्या मुस्लिम के लिए अलग मंत्रालय होना चाहिए. सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि कपिल जी, आपने एक ही झटका दिया है अभिषेक मनु सिंघवी जी कई झटके देकर चले गए. सेल्फ अक्वायर्ड प्रॉपर्टी में बेटे को भी दो, बेटी को भी दो. अरे सेल्फ अक्वायर्ड प्रॉपर्टी आप किसी को भी दें ये किसी को भी न दें, यही देश का कानून है.
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने इस बिल को विवादास्पद बताते हुए कहा कि कल लोकसभा में मध्यरात्रि के बाद तक चर्चा चली और बिल पास हुआ. कल रिजिजू साहब और बाकी वक्ताओं के भाषण सुने. बहुत अच्छे भाषण सुने. संसद में जब ये कन्फ्यूजन हो जाए कि ये बोल रहे वही सही और वो बोल रहे वही सही. तो आम जनता में भी यही स्थिति है. यही अपेक्षा करता हूं सरकार से, विपक्ष में जो बैठे हैं वो बना-बिगाड़ नहीं सकते. सत्ता वाले बहुत कुछ बना-बिगाड़ सकते हैं. उदार बने रहिए. नड्डा जी ने अच्छी बात कही कि राजनीति हुई और अंत में खुद राजनीति में प्रवेश कर गए. सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए. बहुत बड़ी आबादी है देश में मुसलमान की. लोगों को ये लगे कि अन्याय हो रहा है, फिर आप जितना भी कहिए कि तुष्टिकरण की बात कर रहे हैं, इससे काम नहीं चलना है. जजमेंट तो अतीत से होता है. आपने अतीत में जो किया है, जनता उससे संतुष्ट नहीं है. भले ही आप येन-केन प्रकारेण चुनाव जीत जाएं. हमारे पहले वक्ता बोल रहे थे, ऐसा लगता था कि जानें कितना प्रेम मुसलमानों के प्रति इनके मन में है. किसी एक आदमी से डरकर यहां आ गए लेकिन अच्छे आदमी है, अच्छी बात है. जमीन और फंड, जब पैसे की बात आती है. 10 साल आपको याद ही नहीं रहा कि वक्फ बोर्ड के पास इतनी संपत्ति है. जब सारी संपत्ति बेच ली, तब देखा गया कि कहां बची हुई है और वक्फ बोर्ड पर आ गए. ऐसा मत करिए. हमें मिलकर काम करना होगा तभी तरक्की हो सकती है. बुरा न मानो, इतना कटु सत्य कभी नहीं बोलता और इसलिए नहीं बोलता कि सबका बड़ा लिहाज करता हूं. प्रोफेसर मनोज झा ने इशारा किया था कि हम डेमोक्रेटिक स्टेट से टोटलटेरियन स्टेट की तरफ धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं. ऐसी स्थिति मत आने दीजिए, खतरनाक स्थिति होगी. यूपी में लोग नमाज नहीं पढ़ सकते, घर की छत पर नमाज नहीं पढ़ सकते. संभल में ईद के दिन जब लोग नमाज पढ़ रहे थे, तब बाहर अधिकारी हाथ में रिवॉल्वर लेकर घूम रहे थे. जब ये स्थिति हो जाए तो आप अच्छे मन से बिल लाएंगे तो भी भरोसा नहीं होगा. पहले तो आप यूपी सरकार को संभालिए कि अल्पसंख्यकों से व्यवहार ठीक करे. इस बिल को लागू करने में कितनी दिक्कतें आएंगी. कौन कहां पैदा हुआ, ये तो ईश्वर-अल्लाह के हाथ में है. सारा अधिकार कलेक्टर को दे देंगे तो आर्टिकल 26 का उल्लंघन तो है ही. आप आर्टिकल 13 और 26 को साथ पढ़ें तो खुद समझ जाएंगे कि असंवैधानिक है. ईश्वर से डरिए, अहंकार व्यक्ति का दुश्मन होता है. कुछ लोग तो ऐसे बोलते हैं जिनकी बोलचाल से ही अहंकार टपकता है. सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि आपने एक बड़ी आपत्तिजनक बात कही. आपने डॉ्टर राधामोहन दास अग्रवाल की तरफ इशारा करके कहा कि एक व्यक्ति से डरकर यहां आ गए. इनको आपत्ति हो या नहीं हो, हमको है. यहां बैठा कोई व्यक्ति डर ही नहीं सकता.
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि ये जो बिल है, वह कानून नहीं, कानूनी भाषा में सत्ता की मनमानी है. उन्होंने रतिलाल केस और तिलकायत गोविंद जी महाराज के केस का उदाहरण दिए और कहा कि क्लॉज 11 में राज्य सरकार की ओर से सौ फीसदी नॉमिनेटेड सदस्यों का प्रावधान है. क्या स्वायत्तता बची, क्या अधिकार बचा धर्म के लोगों का अपने सदस्य चुनने का. लिखा है कि 11 में से तीन मुसलमान होने चाहिए. इसे विपरीत भाषा में पढ़ें तो 8 गैर मुस्लिम हो सकते हैं. वक्फ काउंसिल में गनीमत है कि 22 में से कम से कम 12 मुसलमान होने चाहिए. वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के खिलाफ कोई अविश्वास मत नहीं ला सकता. क्या स्वायत्तता बची है. बचा है तो सिर्फ सरकारी नियंत्रण. पुराने कानून में वक्फ बोर्ड के सीईओ का मुसलमान होना अनिवार्य था. दो में से एक को नियुक्त करना अनिवार्य था जिनके नाम बोर्ड देता था. उन्होंने पांच साल प्रैक्टिसिंग इस्लाम के साथ अगली लाइन का जिक्र किया और कहा कि ड्राफ्ट तैयार करने वाले साहब या साहिबा या तो बड़े भोले हैं या शातिर हैं. 30 साल से इस्लाम प्रैक्टिसिंग करने वाला भी दफ्तरों के चक्कर काटेगा ये साबित करने के लिए कि कोई नहीं है. लिमिटेशन एक्ट लागू करने के फैसले से वक्फ की प्रॉपर्टी पर कब्जा करने वाला 12 साल बाद परमानेंट ऑनरशिप का दावा करेगा. हमारी खुद की छत भी छिनी जाती है हमसे और कहते हैं कि वक्त का तकाजा यही है. जिस जगह सजदों के निशां थे, आज वहां दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. अगर इस पर पुनर्विचार नहीं किया जाएगा तो इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है कि अगले कुछ वर्षों में इसे असंवैधानिक करार दिया जाएगा.
राज्यसभा में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने वक्फ बिल का समर्थन किया है. जनता दल (सेक्यूलर्) के एचडी देवगौड़ा ने वक्फ बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यहां हमने वर्षों तक एक-एक, दो-दो मिनट के लिए सफर किया है. उम्मीद है कि वक्फ प्रॉपर्टी का भविष्य सुरक्षित होगा.
जेपी नड्डा ने सरकारी संपत्तियों को वक्फ घोषित कर दिए जाने का जिक्र किया और कहा कि सार्वजनिक डोमेन में दिल्ली की 123 संपत्तियां वक्फ घोषित की गई हैं. कर्नाटक में भी झील, मंदिर, कृषि भूमि, सरकारी जमीन को भी वक्फ घोषित किया गया है. गलत चल रहा था, उसे हम ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं. इसमें कांग्रेस पार्टी को भी साथ देना चाहिए. जमीन माफियाओं ने बहुत मलाई खाई है. उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी मलाईखोरों से दूर रहे. हालांकि, रहना मुश्किल है. लोग सवाल उठाते हैं और झोला उठाकर चल देते हैं. सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि मुझे यहां से कुछ ज्यादा दिखता है. कुछ लोग भाषण देने के लिए ही आते हैं. संसदीय कार्य कैजुअल नहीं, जिम्मेदारी का है. ये बहुत दुखद है. जेपी नड्डा ने कहा कि आधी स्पीच उनकी एक्सपंज हो गई. उन्हें विवेचना करनी चाहिए कि ऐसी स्पीच का फायदा क्या. वह बोले कि बड़ी-ब़ड़ी सत्ता आई और चली गई. भूल गए कि उन्हीं के नेता कह रहे थे कि मोदी जी दिल्ली में सरकार बनाने के लिए अगला जन्म लेना पड़ेगा. दिल्ली की जनता ने सबक सिखा दिया. इसमें कोई अहम की बात नहीं है. मैं न मानूं का कोई उत्तर नहीं है. भगवान करें कि सुबुद्धि आए और आप भी मान जाओ और हमारे साथ चल पड़ो.
जेपी नड्डा ने पांच साल प्रैक्टिसिंग इस्लाम के प्रावधान पर कहा कि धर्म से जुड़े मामलों में बहुत अंदर नहीं जाना चाहता. जो दान देने वाला व्यक्ति है, वो प्रमाणिक तो होना चाहिए न. आप कह दीजिए कि पांच साल से नमाज पढ़ता हूं, इस्लाम मान रहा हूं, मौलवी बोल दे हो जाएगा. वक्फ बोर्ड बगैर दस्तावेज किसी भी संपत्ति को क्लेम कर देता था. इस पर आपत्ति करते हुए सैयद नसीर हुसैन ने आपत्ति करते हुए ऑथेंटिकेट करने की मांग की. जेपी नड्डा ने तमिलनाडु के गांव को वक्फ प्रॉपर्टी घोषित किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि जेपीसी में जो दस्तावेज आए, वही रख दें तो ऑथेंटिकेट हो जाता है. सैयद नसीर ने इस पर कहा कि उस गांव की 20 फीसदी जमीन वक्फ प्रॉपर्टी थी. 2000 में डिजिटाइजेशन के समय रेवेन्यू अधिकारियों ने गलती से इसे वक्फ प्रॉपर्टी के तौर पर दर्ज कर दिया. इसे वक्फ ने ऑन रिकॉर्ड कहा है कि हमारी प्रॉपर्टी नहीं है.
जेपी नड्डा ने कहा कि वक्फ की संपत्ति का सही रखरखाव जरूरी है. वक्फ संपत्ति में गड़बड़ी की जवाबदेही तय होनी चाहिए. जानना चाहता हूं कि 70 साल तक किसने मुस्लिमों को डराकर रखा. आपने 70 साल ये करके देख लिया और इसीलिए वहां बैठे हुए हो. उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक तो बहुत पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया था कि खत्म हो जाना चाहिए. क्या मजबूरी थी. आपने मुस्लिम महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक बनाकर रखा. जेपी नड्डा ने इराक, सीरिया समेत मुस्लिम देशों के उदाहरण देकर कहा कि यहां पहले ही तीन तलाक समाप्त हो गया था. भारत में इसे समाप्त कर मुस्लिम बहनों को मुख्य धारा में लाने का काम पीएम मोदी ने किया. मुस्लिम बहनों को मुख्यधारा में लाने से कांग्रेस ने रोका. उन्होंने वक्फ को लेकर मुस्लिम देशों में हुए सुधार भी गिनाए और कहा कि टर्की में पूरी वक्फ संपत्ति 1924 में ही सरकारी नियंत्रण में ले ली गई थी. 70 साल में विकास कैसे हुआ, देखा है. कांग्रेस ने मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाकर रखा. हमारी कोशिश बस नियमों के दायरे में लाने की है. हम 2013 के संशोधन में समर्थन में थे लेकिन इसका दुरुपयोग हुआ. जेपी नड्डा ने कहा कि ये संविधान के रक्षक हैं, जेब में रखते हैं लेकिन इस्तेमाल हम करते हैं. नागरिक सिविल कोर्ट में वक्फ के निर्णय को चुनौती नहीं दे सकते, ये हम 21वीं सदी में जी रहे हैं क्या. वक्फ कानून ओवर पावरिंग था कि नहीं था. संविधान के बेसिक स्पिरिट को चैलेंज करने वाला नहीं है क्या. उन्होंने वक्फ एक्ट की एक-एक धारा पर विस्तार से अपनी बात रखी.
राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि मुझे उम्मीद है कि उम्मीद का समर्थन होगा. इस बिल का उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट को सुव्यवस्थित करना है. इस सदन के माध्यम से जो नैरेटिव बनाया जा रहा है, उसका पुरजोर विरोध करता हूं. पीएम मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप आगे बढ़ रही है. जेपीसी आपने कहा, हमने बना दी. 2013 में इसी बिल पर जब जेपीसी बनी थी तब सिर्फ 13 सदस्य थे. इसमें 31 सदस्य थे. आप समझ सकते हैं कि लोकतांत्रिक मूल्यों को फॉलो करने के क्या पैमााने हो सकते हैं. वाद-विवाद तर्क पर होगा या जबरदस्ती होगा. जेपीसी की 36 मीटिंग हुईं. 200 घंटे से ज्यादा जेपीसी की गतिविधियां चलीं. क्लॉज बाई क्लॉज चर्चा की बात आई, डिस्कशन क्या होता है. आपके जमाने में 2013 में केवल 22 बैठकें हुई थीं. उस समय तो जम्मू कश्मीर ही था. श्रीनगर, जम्मू, लेह, आप वहां गए. जगदंबिका पाल तो 10 स्थानों पर गए. जेपी नड्डा ने दोनों जेपीसी से जुड़े आंकड़े गिनाए और कहा कि कुछ लोग इस बिल पर गुमराह कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस बिल पर चर्चा के दौरान किसी को बिहार का चुनाव दिख रहा है तो किसी को केरल का सिनेमा. जॉन ब्रिटॉस लीगली स्ट्रॉन्ग हैं, स्मार्ट मूव लिया. पूरी बात अंग्रेजी में कही लेकिन जब कुछ अवांछित कहना था तब मलयाली में कहा. इसलिए मैंने सुरेश गोपी को भी कहा कि बैठ जाओ. ये बिल पार्टी नहीं, देश के हित में है. हमें वोटबैंक पॉलिटिक्स के इंट्रेस्ट से बाहर निकल के नेशनल इंट्रेस्ट में सोचने की जरूरत है. मोदी जी के नेतृत्व का सपना ये है कि सबका विकास होगा. हम लिप सर्विस नहीं, रियल सर्विस करते हैं.
राज्यसभा में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा कि आपको मुसलमानों के हित की इतनी चिंता क्यों हो रही है. इतनी चिंता तो बैरिस्टर मोहम्मद अली जिन्ना ने भी नहीं की थी. मंत्री जी को सुनकर ऐसा लगा जैसे मोहम्मद अली जिन्ना की आत्मा कब्र से उठकर प्रवेश कर गई है. हिंदू राष्ट्र बनाने की बात करने वाले लोग थे, अब लग रहा है कि हिंदू पाकिस्तान बनाने जा रहे हैं. जो बिल लाए हैं, उसका उद्देश्य साफ नहीं है. अभी तो आप मीठी मीठी बातें कर रहे हो लेकिन आप व्यापारी लोग हो. व्यापारी लोग ऐसा ही करते हैं और फिर सबकुछ बेचकर भाग जाते हैं. ये बिल देश के हित में नहीं है. आप फिर देश में तनाव उत्पन्न करना चाहते हैं, दंगे भड़काना चाहते हैं.
राज्यसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सांसद डॉक्टर सरफराज अहमद ने कहा कि इस बिल का समर्थन नहीं करूंगा. आपकी 10 साल से सरकार है और आपको अब मुसलमान की चिंता हुई है. आपने इतना बुल्डोजर चलाया है कि आप पर भरोसा नहीं होता. आपकी नीयत पर शक है. क्या नमाज पढ़ने जाने पर मौलवी रजिस्टर लेकर खड़े रहेंगे क्या कि सरफराज अहमद मुस्लिम प्रैक्टिसिंग हैं.
सीपीआई (एम) के जॉन ब्रिटास ने अपनी स्पीच में सुरेश गोपी का नाम लिया और केरल चुनाव में बीजेपी को हराने की बात कही. इसके बाद सुरेश गोपी ने एक फिल्म में 51 कट का मुद्दा उठाते हुए जॉन ब्रिटास को बगैर कट के दो फिल्में रिलीज कराने की चुनौती दी. राज्यसभा में इस पर हंगामा हुआ. सीपीआई (एम) के संतोष कुमार पी ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर रेज किया. किरेन रिजिजू ने कहा कि जॉन ब्रिटास ने सुरेश गोपी का नाम लिया और इसी पर उन्होंने जवाब दिया है. तिरुचि शिवा ने सुरेश गोपी के संबोधन से कई शब्द एक्सपंज करने की मांग की.
सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद डॉक्टर जॉन ब्रिटास ने वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि रिजिजू जी, आपको वक्फ बोर्ड की एबीसीडी नहीं पता है. पांच साल प्रैक्टिसिंग मुस्लिम, ये घर वापसी कराने वाले लोग हैं. अगर ये संविधान में भरोसा करते हैं, सांप्रदायिक सौहार्द में भरोसा करते हैं तो इस बिल को वापस ले लें.
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज झा ने राज्यसभा में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम्स में इलाजरत हैं. कल उनका एक वीडियो कट करके सोशल मीडिया पर खूब चलाया गया. उन्होंने कहा कि देश बंटवारे के बाद ट्रस्ट इश्यू थे. जानता हूं कि दोनों ही पक्ष आए हैं तैयारियों के साथ, हम गर्दनों के साथ हैं वो आरियों के साथ. देश का माहौल कैसा है, इस पर एक नजर डाला जाए. गाहे-बगाहे आर्थिक बायकॉट की बात होती है, मस्जिद के नीचे कुछ ढूंढा जाता है. ऐसे माहौल में आपका कंटेंट और इंटेंट, दोनों मैच करता है तो डर लगता है. आप भी चुनकर आए हैं, हम भी चुनकर आए हैं. मनोज झा ने प्रेमचंद की कहानी ईदगाह का जिक्र करते हुए कहा कि कोई बता सकता है कि दुकानदार हरखू था या हरेंद्र. आज कैसा माहौल है. हमें बचपन से मार्जिन छोड़ने की आदत हो गई है. इस देश के हिंदुओं को मुस्लिमों की, मुस्लिमों को हिंदुओं की आदत है. ये आदतें मत बदलवाइए. लखनऊ के एक मशहूर शायर थे, बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए. नेहरू से दोस्ती थी, वापस चले आए. लोगों ने पूछा तो कहा कि वहां बहुत मुसलमान थे, मिलाजुला देखने की आदत है. लोकतंत्र में सौगात और तोहफा नहीं होते. कल गृह मंत्री को सुन रहा था. बहुत अच्छे से वक्फ का मतलब बता रहे थे. कुछ तो समान है तैयारी के मामले में. आप पहली बार सुधार नहीं कर रहे हैं, सुधार आगे भी होंगे. बाबा साहब को कोट करते हुए कहा कि आज आइसोलेशन और एक्सक्लूजन, दोनों चीजें बहुतायात में हैं. ये उचित नहीं है. राधा मोहन जी कह रहे थे कि 20 करोड़ मुसलमान हैं. उनकी शिकायतें बैठकर दूर होंगी. अलग करना चाहोगे तो उचित नहीं है. इतना सेक्यूलर मिजाज इस देश का कर दीजिए कि हर धर्म की संस्थाओं में दूसरे धर्म के लोग हों. तारीफ करूंगा. संयोग या प्रयोग मुस्लिम में ही होगा, ये उचित नहीं होगा. एक बहुत बेहतर चीज आपने कही थी, नोट किया था. इन्होंने कहा कि 30 बरस में सिर्फ आठ केसेज आए. अब वक्फ बाई यूजर, किसी भी समुदाय की एक स्मृति होती है. हम बहुत छोटी जोत के किसान परिवार से आते हैं. वहां सर्वे हो रहा है, कागज ही नहीं मिल रहा है. पुरानी संपत्ति है, कहां से लाए. आप डीएम को बहुत काम पकड़ाते हो, वह लोकल लेवल पर ट्रैक्टर बनकर रह गया है. डीएम को एक-एक महकमे की मीटिंग का टाइम नहीं मिलता है. क्या क्या करेगा डीएम. अपने हिंदू समाज में भी पसमांदा बहुत पड़े हैं. जाति जनगणना की मांग करता हूं तो आप चुप हो जाते हैं. भगवान के समक्ष क्यों ये व्यवस्था बनी रहे, क्यों पूजा पद्धति एक जाति विशेष के हाथ में बनी रहे. रिजिजू ने कंसल्टेशन के इतने आंकड़े बता दिए. भूपेंद्र जी आप उठते हैं तो लगता है पॉइंट ऑफ ऑर्डर ले लीजिएगा. संवाद सुना देने को नहीं कहते हैं. संस्थागत गैर मौजूदगी मुसलमानों की आप सुनिश्चित कर रहे हैं. दो मिनट के बाद मेरी कही गई बात इतिहास बन जाएगी. मुसलमान का इस मिट्टी पर और इस मिट्टी का मुसलमान पर कर्ज है. इस कर्ज के रिश्ते को तिजारत की नजर से मत देखिए. नूर मियां का सूरमा का भी जिक्र कर सकता था. विद्रोही जी से पहले केदारनाथ जी ने भी लिखा. अदम गोंडवी जी ने लिखा- कुर्सी के लिए जज्बात को मत छेड़िए.
राज्यसभा में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और बीजू जनता दल ने राज्यसभा में वक्फ बिल का विरोध किया है. बीजेडी के राज्यसभा सांसद् मोहिबुल्ला खान ने कहा कि सबके मन में डर है. सरकार को मुस्लिमों के मन से ये डर निकालना होगा. मेरे गांव में मेरा परिवार ही इकलौता मुस्लिम परिवार है, बाकी सब हिंदू रहते हैं लेकिन गांव में धार्मिक यात्रा जब निकलती है, हमारे परिवार से एक सदस्य वहां खड़ा रहता है. ये सौहार्द है. प्रभु जगन्नाथ की भक्ति हर धर्म के लोग करते हैं. भगवान जगन्नाथ के बड़े भक्त थे सलार बेग. उनकी मजार पर रथयात्रा रुकती है और भोग चढ़ाया जाता है, इसके बाद रथयात्रा आगे बढ़ती है. सरकार का दायित्व है सभी धर्मों के लोगों को आगे बढ़ाना. इस बिल में से पांच साल प्रैक्टिसिंग मुस्लिम का प्रावधान हटा देना चाहिए.
संजय सिंह ने कहा कि आप कहते हैं कि पिछड़ों और महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए बिल लाए हैं. चलिए लाइए अगले सत्र में एक बिल छुआ-छूत मिटाने के लिए. दिलाइए मंदिरों के ट्रस्ट में 80 फीसदी पिछड़ों, दलितों और जनजातियों के लोगों को जगह. मैं आपका अभिनंदन करूंगा. उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट में अयोध्या के जिलाधिकारी के हिंदू न होने पर एडीएम को सदस्य बनाए जाने के प्रावधान का जिक्र किया और कहा कि हम इसका समर्थन करते हैं. 2013 में आपके समर्थन से संशोधन विधेयक पारित हुआ था, कह दीजिए कि गलत बोल रहा हूं. 2009 का आपका मैनिफेस्टो लेकर आया हूं, ये मेरे घर नहीं बना है. आपने उसमें कहा था कि रहमान कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक वक्फ की जमीन से अवैध कब्जा खाली कराने का काम करेंगे. 2020 में भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दिया कि 99 फीसदी वक्फ संपत्तियां डिजिटाइज हो चुकी हैं. मुख्तार अब्बास नकवी का बयान था कि सौ फीसदी संपत्तियां डिजिटाइज हो चुकी हैं. जब सब डिजिटाइज कर चुके हैं तो क्या फसाद कराने के लिए कागज मांग रहे हैं. आप फसाद कराने वाले हिंदू हैं. आपको करोड़ों मुसलमानों की चिंता है आपको. एक नीरव मोदी को पकड़कर लाइए और 12 हजार करोड़ दे दीजिए मुसलमानों को, आठ हजार करोड़ का आपको मुनाफा होगा. सच्चर कमेटी की पूरी रिपोर्ट बताइए. सुविधाजनक सत्य मत बोलिए. सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सैकड़ों वक्फ प्रॉपर्टियां राज्य और केंद्र की सरकारों ने कब्जा कर रखा है. कैसे तय करेंगे कि कौन प्रैक्टिसिंग मुस्लिम है. आपने कई ऐसे प्रावधान रखे हैं जो बताते हैं कि आपकी मंशा मुस्लिमों का भला करने की नहीं है. आप मुसलमानों को ठीक करने के नाम पर नुकसान करोड़ों हिंदुओं का कर रहे हैं. अभी भी मौका है, इस बिल को वापस लीजिए. किरेन रिजिजू ने कहा कि संजय सिंह तर्कहीन बात करते हैं. पॉइंट पर बात कीजिए, जवाब दूंगा.
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उदय प्रताप की पंक्तियों 'न तेरा है, न मेरा है ये हिंदुस्तान सबका है. जो आकर मिल गई इसमें वो नदियां दिखलाई नहीं देतीं, महासागर बनाने में योगदान सबका है' से अपनी बात शुरू की. उन्होंने कहा कि बचपन से ये बात सुनते आए हैं कि सरकार माई बाप. सरकार मां-बाप होती है जो अपने सभी बच्चों का खयाल रखती है. बाबा साहब ने संविधान में अधिकार दिए हैं जिसको गैर संवैधानिक बिल लाकर आप छीन रहे हैं. सरकार कह रही है कि मुसलमानों के भले के लिए ये कानून ला रहे हैं. जब आपसे ये सुनता हूं तो लगता है कि कपिल शर्मा की कॉमेडी सुन रहा हूं. आप मुसलमानों का भला कर रहे हैं, दोनों सदनों में एक गुलाम अली को छोड़कर एक भी सदस्य आपका मुसलमान नहीं है. आपने शाहनवाज हुसैन और मुख्तार अब्बास नकवी की राजनीति खत्म कर दी, आप मुसलमान का भला कर रहे हैं. धार्मिक संपत्तियों को कब्जा करने की ये कोशिश है. इस बिल पर किसी को खुश नहीं होना चाहिए क्योंकि नंबर सबका आएगा. आज वक्फ की संपत्तियां कब्जा करके आप अपने दोस्तों को देंगे, फिर गुरुद्वारे, चर्च, मंदिर की जमीनें कब्जा करके अपने दोस्तों को देंगे. आप राम मंदिर की जमीन में घोटाला करने वाले लोग हैं. ये राम मंदिर में घोटाला करने वाले लोग हैं. भगवान राम के मंदिर का चंदा खाते हो. चंदा चोरों बैठ जाओ, तुम लोग चंदा चोर हो. संजय सिंह की इस बात पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा कर दिया. भूपेंद्र यादव ने संजय सिंह की बात पर पॉइंट ऑफ ऑर्डर रेज किया.
डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने सरदार पटेल को कोट करते हुए कहा कि सभी समुदाय देश के लिए महत्वपूर्ण हैं और समान हैं. इस सरकार की मंशा ठीक नहीं है. आज मुस्लिम समाज के साथ ये कर रहे हैं, कल ईसाई और दूसरे समुदायों की बारी आएगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि राजनीतिक बातों का जवाब हमारे वक्ता देंगे. मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि तिरुचि जी हिंदी गाने बहुत अच्छा गाते हैं लेकिन ऐसा इंप्रेशन बना रहे थे कि हिंदी अच्छी नहीं है.
टीएमसी सांसद नदीमुल हक ने कहा कि ये महज कानूनी मसला नहीं, पुरानी रवायत से जुड़ा मामला है. क्या हम उन रवायतों को भुला सकते हैं जिन्होंने हमें एक देश एक कौम बनाया है. ये मामला बस मुसलमानों से जुड़ा नहीं है. ये सिर्फ एक मजहबी मसला नहीं, संवैधानिक मुद्दा भी है. हमारे लिए संविधान महज एक किताब नहीं, मार्गदर्शक है. वक्फ बिल में कई खामियां हैं. ये बिल एंटी फेडरल है. इस बिल का मकसद वक्फ बोर्ड में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व कम करना है. जब ये बिल लोकसभा में पेश किया गया था, एक गलती रह गई थी जो जेपीसी में जाकर पकड़ा गया था. बहुत सारी कमेटियों की सिफारिश पर ये बिल लेकर आए हैं, मंत्री जी ने कहा. आपको रिफॉर्म करना है तो तीन सुझाव तो मान लीजिए. मुसलमानों की शिक्षा को लेकर एजुकेशन बोर्ड, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों से अवैध कब्जा हटाने की सिफारिशें भी मान लीजिए. इस बिल में इन सबका कोई जिक्र नहीं किया गया.
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जब व्यक्तिगत आरोप लगाए जाएं तब स्पष्टीकरण का मौका दिया जाना चाहिए. निर्मला सीतारमण ने कहा कि गृह मंत्री के बोलने के बाद उन्हें मौका दिया गया था. उन्होंने (नसीर हुसैन ने) जो कहा, वो दोहरा सकती हूं. इस पर हंगामा हो गया.
राधा मोहन दास अग्रवाल का संबोधन पूरा होने के बाद कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर रेज किया और कहा कि कोई भी सदस्य किसी सदस्य पर मानहानिकारक, अपराध के आरोप बगैर किसी पूर्व सूचना के आरोप नहीं लगा सकता. इस पर ट्रेजरी बेंच से मंत्री ने कुछ कहा. इस पर प्रमोद तिवारी ने कहा कि ये मंत्री का आचरण है. हम तो बस इतना चाहते हैं कि सदन में चर्चा शांतिपूर्वक चले. गृह मंत्री अमित शाह अपनी सीट पर खड़े हुए और कहा कि मान्यवर माननीय सदस्य ने नसीर हुसैन पर कोई आरोप नहीं लगाए. इन्होंने बस इतना ही कहा कि नसीर हुसैन जब जीते, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे. नारे इन्होंने नहीं लगाए, इन पर आरोप नहीं लगे. नसीर हुसैन ने कहा कि मेरा नाम लिया गया है. जब ये नारे लगे, सिवाय एक जर्नलिस्ट के कोई वहां नहीं था.
बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल ने वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान वक्फ बोर्ड की तुलना पुरानी फिल्मों के गुंडों से की. उन्होंने कहा कि जिस तरह से फिल्मों में गुंडे जिस औरत पर हाथ रख देते थे, वह उनकी हो जाती थी. उसी तरह से ये जिस जमीन पर हाथ रख देते थे, वह जमीन इनकी हो जाती थी. वक्फ बाई यूजर इनका बड़ा हथियार था. किसी की जमीन पर कुछ दिन नमाज क्या पढ़ ली, वक्फ बाई यूजर वो जमीन वक्फ बोर्ड की हो गई. तमिलनाडु में 1500 साल पुराना मंदिर भी वक्फ प्रॉपर्टी घोषित कर दिया गया. हमने मौलाना से पूछा कि ये बताओ कि कुरान में कहां लिखा है, किस हदीस में लिखा है कि जो संपत्ति किसी ने दान की ही नहीं, वह आपकी कैसे हो गई. इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं था. ओवैसी साहब उस सदन में बैठते हैं, उन्होंने मेरा नाम रख दिया मौलाना राधा मोहन दास अग्रवाल. उन्होंने कर्नाटक में वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा करने वाले नेताओं के नाम की लिस्ट पढ़ी और कहा कि ये रिपोर्ट जेपीसी में टेबल हुई थी. बीजेपी सांसद ने कहा कि एक नाम इस सदन की मर्यादा में लेने से इनकार करता हूं, वो सदन में हैं भी नहीं. सबको पता है कि वो नाम क्या होगा.
बीजेपी सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि नसीर हुसैन जब राज्यसभा चुनाव जीते थे, तब बेंगलुरु में था. वहां कर्नाटक की विधानसभा में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लग रहे थे. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विरोध किया तो उन्हें जेल में डाल दिया गया. इस पर विपक्ष की ओर से हंगामा शुरू हो गया. हंगामें पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बीच में टोकाटाकी नहीं होगी. ये दोनों पक्षों के लिए होना चाहिए. इसके बाद राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि आज ऐतिहासिक दिन है महिलाओं और पिछड़ा मुसलमानों के लिए. उन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह, विधवा विवाह को लेकर आए कानून गिनाए और कहा कि मुस्लिमों के लिए 75 साल बाद सुधार के लिए इस ऐतिहासिक विधेयक को पहली बार लाने का काम किया. उन्होंने जनधन से लेकर उज्ज्वला योजना तक, मुस्लिम लाभार्थियों के डेटा गिनाए और कहा कि पीएम ने हम सांसदों से कहा कि लोग कहते हैं कि मुस्लिम बीजेपी को वोट नहीं देते. ये गलत बात है. वे देते हैं और नहीं भी देते तो क्या वे देश के नागरिक नहीं हैं. क्या उनका काम नहीं होना चाहिए. सरकार के स्तर पर जो कुछ भी कर सकती है मुस्लिमों की बेहतरी के लिए, हम करने का प्रयास करेंगे.
डॉक्टर सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि पांच साल के प्रैक्टिसिंग मुस्लिम का प्रावधान है. ये कैसे तय होगा. क्या हमको दाढ़ी रखनी पड़ेगी, टोपी पहननी पड़ेगी, घर में सीसीटीवी कैमरे लगवाएंगे कि कोई पांच वक्त की नमाज पढ़ रहा है कि नहीं. क्या आप इसके लिए अलग से कोई डिपार्टमेंट बनाएंगे जो सर्टिफिकेट जारी करेंगे. क्या उस सर्टिफिकेट पर भी मोदी जी की फोटो होगी. उन्होंने कहा कि ये बस दंगे फसाद कराने के लिए विवाद को जन्म देना चाहते हैं जिससे इनका वोटबैंक बढ़ता रहे. ये वोटबैंक की राजनीति कर रहे हैं. क्या हम अपने इंस्टीट्यूशंस को चलाने के लिए काबिल नहीं हैं. क्या आप हमें दोयम दर्जे का नागरिक बनाना चाहते हैं. क्या आप हमें हिंदू इंस्टीट्यूशंस में जगह देंगे. नसीर हुसैन ने किरेन रिजिजू के ईदगाह, कब्रिस्तान वाले बयान पर ऑथेंटिकेट करने की चुनौती दी और कहा कि लूटियंस दिल्ली की 123 प्रॉपर्टी अंग्रेजों ने ली थी और कहा था कि जब शहर बस जाएगा तब आपको वापस दे देंगे. वन मैन कमीशन बनाया था आपने, उसकी रिपोर्ट देश के सामने क्यों नहीं रख देते. ये भ्रम फैलाना बंद करो. केरल की बात इन्होंने कही, जिनकी जमीन ली गई है, उनके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी.
नसीर हुसैन को बीच में रोकते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2013 के संशोधन में इन्होंने कोर्ट जाने का प्रावधान रखा ही नहीं. कोर्ट जा सकते हैं तो रिट पिटीशन में जा सकते हैं, सिविल सूट में नहीं जिसके तहत आपके अधिकार जाते रहते हैं. इसके बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हमने शांति से रिजिजू जी को पूरा सुना. ये भी जो बोल रहे हैं, तैयारी करके आए हैं. कोई ऐसी वैसी बात नहीं बोल रहे हैं.
अगर देश में हम खोदना शुरू कर दें तो किसके नीचे क्या मिलेगा, पता नहीं है. इसमें भी इसका प्रावधान कर दिया. रिजिजू जी ने वक्फ का मायना बताया, वक्फ का मायना दान है जो कोई भी किसी को भी कर सकता है. मोहम्मद साहब के जमाने में गैर मुसलमानों ने भी दान किए. दान का कॉन्सेप्ट हर मजहब में है. हमारे यहां दान को रेग्युलेट करने के लिए वक्फ बोर्ड बना. इस देश में एसजीपीसी है, टेंपल ट्रस्ट हैं, आखिर ये क्यों भ्रम फैला रहे हैं. अंग्रेजों को जमाने में वक्फ एक्ट आया था जिसमें सुधार करने के लिए कई संशोधन आए. कांग्रेस के जमाने में जो संशोधन आए थे, उसमें पूरा सहयोग और सपोर्ट इनका था. वक्फ बोर्ड के खिलाफ सबसे बड़ा भ्रम फैलाया गया है कि वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को अपनी जमीन घोषित कर देता था. क्या देश में रेवेन्यू रिकॉर्ड नहीं है, कानून नहीं है, कोर्ट नहीं है. हम ट्रेन में नमाज पढ़ते हैं तो क्या ट्रेन हमारी हो गई. उन्होंने कहा कि वक्फ को लेकर किए जा रहे दावे गलत हैं. कहा जा रहा है कि आप कोर्ट नहीं जा सकते, कोर्ट जा सकते हैं. बिल्कुल जा सकते हैं कोर्ट. हाईकोर्ट है, सुप्रीम कोर्ट है.
कांग्रेस सांसद डॉक्टर सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि ये बिल पूरी तरह से फेक नैरेटिव पर आधारित है जिसके लिए पिछले कुछ महीनों से कोशिश की जा रही थी. ये बिल बीजेपी के लिए सिर्फ ध्रुवीकरण का टूल है. ये कह रहे हैं कि हम गरीब को ताकत देंगे, ट्रांसपैरेंसी देंगे. 10 साल से आप सत्ता में हैं, क्या किया. सेंट्रल वक्फ काउंसिल है, उसमें काउंसिल नहीं है, सिर्फ किरेन रिजिजू का नाम नजर आएगा. बीजेपी शासित राज्यों में बोर्ड नहीं है. देश को गुमराह करने के लिए ये बातें यहां पर कर रहे हैं. जेपीसी में मैं भी सदस्य था. जब शुरू हुआ, एक्सपर्ट्स आने लगे तो 97 फीसदी लोगों ने बिल के खिलाफ बातें कीं. एक लाख आंकड़ा दे रहे हैं, सदन पटल पर रख दें कि कितने लोगों ने बिल का विरोध किया था. पहली बार जेपीसी में नॉन स्टेक होल्डर्स को बुलाया गया. कुछ तो ऐसे थे जो सांप्रदायिक बयान दे रहे थे. ये कह रहे हैं कि जेपीसी की सिफारिशों पर लाए हैं. इनसे पूछिए कि क्लॉज बाई क्लॉज डिस्कशन हुआ था. पहली बार बिना क्लॉज बाई क्लॉज सिफारिशें बुल्डोज करके ये बिल लेकर आए हैं. वो जेपीसी के नहीं, एनडीए के सांसदों की सिफारिशें हैं. जेपीसी गठित ही नहीं करना था. जेपीसी में भेजकर और वर्सन किया है. जितने संशोधन लाए हैं, संविधान के खिलाफ हैं. आप सिर्फ ये संदेश देना चाहते हैं कि एक समुदाय को हम दोयम दर्जे का नागरिक बनाकर रहेंगे.
राज्यसभा में वक्फ बिल पर चर्चा की शुरुआत हो गई है. चर्चा की शुरुआत कर्नाटक से कांग्रेस के सांसद डॉक्टर सैयद नसीर हुसैन ने की है. उन्होंने लोकसभा में गृह मंत्री के 1995 के बिल और 2013 के संशोधन को लेकर बयान का जिक्र कर कहा कि इनसे पूछना चाहता हूं कि तब आपने क्यों इस बिल का आपने समर्थन किया था. 2013 के संशोधन का क्यों समर्थन किया था. 2009 के चुनाव में बीजेपी ने ही अपने मैनिफेस्टो में कहा था कि रहमान खान कमेटी की रिपोर्ट को एग्जामिन करेंगे. इस कमेटी की रिपोर्ट और सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही 2013 का बिल आया था. अगर ये एक समुदाय के तुष्टिकरण का बिल था तो क्यों आपने समर्थन किया था.
किरेन रिजिजू ने कहा कि अब वक्फ किसी संपत्ति पर सीधे कब्जा नहीं कर सकेगा. संपत्ति पर दावे के लिए दस्तावेज जरूरी होंगे. संपत्ति का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा. आदिवासी इलाकों में किसी प्रॉपर्टी को वक्फ प्रॉपर्टी घोषित नहीं किया जा सकेगा. ट्रिब्यूनल के लिए पांच साल का कार्यकाल निर्धारित किया गया है. राइट टू अपील का प्रावधान भी हमने किया है. यूपीए सरकार ने ऐसा कर दिया था कि ट्रिब्यूनल में आपकी सुनवाई नहीं हो सकी तो आप कोर्ट नहीं जा सकते. केवल रिव्यू पिटीशन में जा सकते हैं. हमने राइट टू अपील का दरवाजा खोल दिया है. हम ये मानते हैं कि ट्रिब्यूनल और कोर्ट जल्दी काम करेंगे और जल्दी न्याय मिल सकेगा. वार्षिक सहयोग जो आप बोर्ड में देते हैं, सात फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया जिससे ज्यादा पैसा आप कल्याणकारी कार्यों पर खर्च कर सकें. लिमिटेशन एक्ट लागू किया गया है. प्राइवेट जमीन पर 12 साल, सरकारी जमीन पर 13 साल का लिमिटेशन तय किया गया है. ये बिल देश के लिए सोच-समझकर लाए हैं. इसमें हमें एक नया पैसा का लाभ नहीं मिलने वाला. ये बिल करोड़ों मुसलमानों के हित में है. हम सबके सुझाव सुनने के लिए तैयार हैं. चर्चा का स्तर ऊंचा होगा, इस उम्मीद के साथ इस बिल का समर्थन करने की अपील करता हूं.
किरेन रिजिजू ने कहा कि थोड़ा सा अगर मिलकर काम करेंगे तो तीन-चार साल के अंदर में करोड़ों मुसलमानों की जिंदगी आबाद हो जाएगी. कोई भी प्रॉपर्टी हो, प्रूफ तो चाहिए. वक्फ बाई यूजर के नाम पर हम मुंह से कह देंगे कि ये प्रॉपर्टी हमारे इनकी है, उनकी है. सेक्शन 40 में कोई किसी प्रॉपर्टी को क्लेम करता था तो उसे वक्फ प्रॉपर्टी घोषित कर दिया जाता था. इसे हमने हटा दिया. वक्फ बाई यूजर में जो सेटल केस है, उसे हम कोई छेड़छाड़ नहीं करेंगे. अगर कोई विवाद है तो कोर्ट का अधिकार हम खत्म नहीं कर सकते. जमीन राज्यों का विषय है, उसमें भारत सरकार कुछ नहीं कर सकती.
किरेन रिजिजू ने कहा कि यहां कहा गया है कि हम जो कदम उठा रहे हैं, मुसलमानों को नुकसान होगा. ये संशोधन गैरकानूनी है, असंवैधानिक है. सभी को अपनी बात कहने का हक है. जो आरोप लगाए गए हैं, हम उसका खंडन करते हैं. मुसलमानों के धार्मिक क्रियाकलापों में किसी तरह का हस्तक्षेप कोई गैर मुस्लिम नहीं करेगा. मुतवल्ली मुस्लिम ही होता है. वक्फ क्रिएट करने वाला भी मुस्लिम ही होगा. प्रॉपर्टी मैनेजमेंट में वक्फ बोर्ड को ताकतवर बनाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है, ये सुझाव हमको चाहिए. वक्फ बोर्ड के माध्यम से अपना ट्रस्ट चलाना चाहते हैं, इजाजत है. अगर कोई अलग से चलाना चाहता है तो उसे भी अनुमति होगी. हमने ट्रांसपैरेंसी, अकाउंटेबिलिटी, एक्यूरेसी पर केंद्रित बदलाव किए हैं. हम किसी की धार्मिक भावना को चोट पहुंचाने के लिए नहीं हैं. मुसलमान वक्फ क्रिएट कर सकते हैं, फितरा और जकात में भी हस्तक्षेप कोई कैसे कर सकता है.
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 राज्यसभा में पेश कर दिया है. उन्होंने ये बिल पेश करते हुए कहा कि व्यापक चर्चा के बाद तैयार किए गए बिल को जेपीसी के पास भेज दिया गया था. वक्फ को लेकर जेपीसी ने जितना काम किया, उतना काम किसी कमेटी ने नहीं किया. देर रात तक चर्चा के बाद आज सुबह इस बिल को लोकसभा से पारित कर दिया गया. कई सदस्यों ने कहा कि संशोधनों के लिए जितना समय मिलना चाहिए था, नहीं मिला. बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने तय किया था कि इसे आज ही चर्चा के लिए लेना है. उन्होंने कांग्रेस की सरकार के समय गठित कमेटियों और सच्चर कमेटी की सिफारिशों का भी जिक्र सदन में किया. किरेन रिजिजू ने कहा कि आप जो नहीं कर सके, वह करने की हिम्मत हमने दिखाई है और ये बिल लेकर आए हैं. आप इसका समर्थन करेंगे, ऐसी उम्मीद है. उन्होंने ये भी कहा कि हम कोई नया काम नहीं कर रहे, इतिहास गवाह है कि पहले भी ऐसा हुआ है और संशोधनों का इतिहास भी गिनाया.
लोकसभा में शून्यकाल के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारतीय जमीन पर चीनी कब्जे और अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ का मुद्दा उठाया. राहुल गांधी ने कहा कि भारत की जमीन पर चीनी कब्जा क्यों है. देश की जमीन वापस मिलनी चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाया है. इसका देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा. राहुल गांधी ने सरकार से सीधा सवाल किया कि टैरिफ पर आप क्या करने जा रहे हो. हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से बीजेपी के सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि वह किसकी सरकार थी जिसके समय अक्साई चीन का इलाका चीन ने कब्जा लिया. वह कौन से नेता थे जो चीनी नेताओं के साथ सूप पीते रहे. वह कौन सी फाउंडेशन है जिसे चीन से पैसा मिलता है. क्या वह राजीव गांधी फाउंडेशन है.
हैदराबाद में 400 पेड़ रातोंरात काटे जाने का मुद्दा राज्यसभा में उठा. प्रश्नकाल के दौरान इससे संबंधित सवाल के उत्तर में पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है. हमें समझ नहीं आया कि ऐसी क्या जरूरत आ पड़ी कि लाइट लगाकर, बुल्डोजर लगाकर पेड़ काटे गए. हमने इसका संज्ञान लेकर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. निश्चित रूप से इस मामले में कार्रवाई की जाएगी.
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संसदीय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू आज दोपहर एक बजे राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल को पेश करेंगे. राज्यसभा में इस समय 236 सांसद हैं, जिस वजह से यहां बहुमते के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ती है. राज्यसभा में बीजेपी के 98 सांसद हैं.
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सोनिया गांधी ने गुरुवार को कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कि केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में जबरन पारित करवाया है. उन्होंने कहा कि यह हमारे समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में रखने की भाजपा की जानबूझकर बनाई गई रणनीति का हिस्सा है.
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कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि अनुराग ठाकुर के आरोपों ने उनके राजनीतिक करियर पर बड़ा दाग लगा दिया है और उन्होंने बीजेपी से माफी मांगने की मांग की. अपने हमले को तेज करते हुए कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि अगर पूर्व केंद्रीय मंत्री अपने आरोपों को साबित नहीं कर सकते तो उन्हें "संसद में बैठने" का अधिकार नहीं है और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने आगे कहा, 'अगर उनके आरोप साबित हो जाते हैं, तो मैं इस्तीफा दे दूंगा... अगर वह साबित कर देते हैं कि वक्फ की एक भी जमीन पर मेरा या मेरे बच्चों का कब्जा है, तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। मैं इन चीजों से नहीं डरता। मैं एक मजदूर का बेटा हूं.'
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वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में देर रात तक चली मैराथन चर्चा के बाद पारित हो गया था. अब राज्यसभा की बारी है. आज ये विधेयक राज्यसभा में आएगा. दोपहर एक बजे प्रश्नकाल की कार्यवाही समाप्त होने के बाद अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ये बिल राज्यसभा में पेश करेंगे.
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लोकसभा में प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद अब शून्यकाल की कार्यवाही चल रही है. शून्यकाल के दौरान सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित जनहित से जुड़े विषय उठा रहे हैं. वहीं, राज्यसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही चल रही है. प्रश्नकाल के दौरान राज्यसभा में टेलीकॉम से जुड़े सवालों के जवाब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया दे रहे हैं.