केंद्र की मोदी सरकार आज (बुधवार) को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने वाली है. केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू इसे लोकसभा में पेश करेंगें. सरकार को NDA सहयोगियों का समर्थन मिला है, जिसमें नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू, चिराग पासवान और जयंत चौधरी की पार्टियां शामिल हैं. विपक्ष एकजुटता से प्रस्तावित कानून का विरोध कर रहा है. विपक्ष ने इस विधेयक को विभाजनकारी और असंवैधानिक बताया है. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि सभी विपक्षी दल इस विधेयक का एकजुटता से विरोध कर रहे हैं.
वक्फ संशोधन विधायक के खिलाफ विपक्ष एकजुट
बुधवार को लोकसभा में पेश होने वाले वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा और पारित करने से पहले विपक्षी दलों की मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. इस बैठक का उद्देश्य रणनीति तैयार करना और सुनिश्चित करना था कि किस तरह से विधेयक को चुनौती दी जाए. इस बैठक में विपक्षी नेताओं ने सरकार की नीतियों और प्रस्तावित विधेयक की आलोचना की, जिसे उन्होंने समुदायों के बीच विभाजन को बढ़ावा देने वाला करार दिया.
कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और सीपीआई (एम) जैसे विपक्षी दलों ने विधेयक की कड़ी आलोचना की है. वे तर्क देते हैं कि यह मुसलमानों के प्रति भेदभावपूर्ण है और धार्मिक स्वतंत्रताओं पर अतिक्रमण करता है. एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इसे 'वक्फ बर्बाद विधेयक' बताया है. ओवैसी ने कहा, 'इसका उद्देश्य वक्फ कानूनों को कमजोर करना और वक्फ संपत्तियों को हड़पने का मार्ग आसान करना है.'
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि विपक्षी दल संसद के पटल पर मोदी सरकार के असंवैधानिक और विभाजनकारी एजेंडे के खिलाफ मिलकर काम करेंगे. इस बैठक का मकसद यह दिखाना था कि विपक्षी दल देश के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक साथ खड़े हैं.
केंद्र सरकार की स्थिति क्या है?
सरकार के पास इस विधेयक को पास कराने के लिए लोकसभा में संख्याबल है. लोकसभा में बिल पास कराने के लिए 272 का आंकड़ा जरूरी होना चाहिए. केंद्र की एनडीए सरकार के पास 293 सांसद हैं. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के दावों को भ्रामक बताते हुए आलोचना का सामना किया है और कहा है कि वक्फ नियम स्वतंत्रता से पहले से ही अस्तित्व में हैं. उन्होंने तर्क दिया है कि ये प्रावधान अवैध नहीं हैं और वक्फ प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार करने के उद्देश्य से हैं.
बीजेपी और कांग्रेस ने जारी किया व्हिप
बीजेपी, कांग्रेस, टीडीपी समेत अन्य पार्टियों ने अपने सदस्यों को बहस और मतदान प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है. लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक पर सियासी संग्राम तय है. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर क्या चर्चाएं होती हैं और इसका क्या परिणाम होता है.
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मोदी सरकार वक्फ में क्या बदलना चाहती है?
केंद्र सरकार वक्फ संपत्ति कानून में बड़े बदलाव लाने जा रही है. नए कानून में धर्मांतरण के बाद वक्फ को संपत्ति देने पर रोक लगेगी. वक्फ बोर्ड में महिलाओं और गैर-मुस्लिमों को भी जगह मिलेगी. वक्फ की संपत्तियों का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखना होगा और सरकार ऑडिट करा सकेगी.कुछ लोगों का मानना है कि यह धर्म के खिलाफ है, जबकि सरकार का कहना है कि यह आवश्यक सुधार है. इस मुद्दे पर धर्मनिरपेक्षता की नई परिभाषा और समाज में बदलाव की जरूरत पर भी चर्चा हो रही है.
क्या पहले हुए हैं वक्फ कानूनों में बदलाव?
इस बिल में इस मामले पर पहले भी संशोधन हो चूके हैं. इससे पहले वर्ष 1995 में और फिर वर्ष 2013 में वक्फ बिल में बदलाव किए गए. दिलचस्प बात ये है कि ये दोनों संशोधित बिल सर्वसम्मति से पास हुए थे. जब ये दोनों बदलाव किए गए 1995 में और 2013 में कांग्रेस और उनके सहयोगियों की सरकारों द्वारा इन बदलावों को सर्वसम्मति से पास किया गया था और किसी भी पार्टी ने वोटिंग के दौरान इसका विरोध नहीं किया था. विरोध ना करने वाली पार्टियों में बीजेपी भी शामिल थी. आज वहीं बीजेपी इस बिल में बदलाव करना चाहती है.
महाराष्ट्र में वक्फ बिल पर सियासत
लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश होने से पहले महाराष्ट्र में सियासी घमासान शुरू हो गया है. शिवसेना ने बिल का समर्थन करने का फैसला किया है जबकि विपक्ष इसका विरोध कर रहा है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसते हुए कहा कि देखना होगा वे बालासाहेब की विचारधारा का पालन करेंगे या राहुल गांधी के नक्शेकदम पर चलेंगे. विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस बिल के जरिए वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर कब्जा करना चाहती है. महाराष्ट्र विधानपिरषद नेता विपक्ष ने कहा कि संसद में शिवसेना (यूबीटी) वक्फ बिल का विरोध करेगी.
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JPC ने वक्फ बिल पर क्या कहा?
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर मुस्लिम समुदाय में फैली भ्रांतियों पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) चेयरपर्सन जगदंबिका पाल ने स्पष्टीकरण दिया है. उन्होंने कहा कि मस्जिदें या कब्रिस्तान नहीं छीने जाएंगे और यह अफवाह है. संशोधन का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता लाना है. उन्होंने बताया कि वक्फ बोर्ड एक धार्मिक संस्था नहीं बल्कि सरकारी निकाय है, जिसमें गैर-मुस्लिम अधिकारी भी हो सकते हैं.
मोदी सरकार की मुस्लिम कल्याण योजनाएं
2014 में सत्ता बदली तो कमान पीएम नरेंद्र मोदी के हाथ में आई. करोड़ों मुसलमानों की आंखों में झांककर पीएम मोदी ने वो कहा जिसे देश और दुनिया भी सुनना चाहती थी. समग्र विकास तभी संभव है जब आप यह देखें कि मुस्लिम युवाओं के एक हाथ में कुरान शरीफ हो तो दूसरे हाथ में कंप्यूटर. मुस्लिम सशक्तिकरण के लिए मोदी सरकार ने योजनाओं की बाढ़ लगा दी, जिसका सीधा फायदा मुस्लिम समाज को मिला. 2024-25 में सरकार ने 5 लाख से ज्यादा मुस्लिम छात्रों को स्कॉलरशिप दी जिससे वो उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके.
नई शिक्षा नीति यानी एनईपी के तहत मदरसों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया, जिससे 10 लाख से ज्यादा मुस्लिम छात्र मुख्यधारा के शिक्षा से जुड़ सके. मोदी सरकार की हुनर हार्ट पहल से 8 लाख से ज्यादा मुस्लिम कारीगरों को रोजगार मिला.
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 2024-25 में 30 फीसदी से ज्यादा ऋण मुस्लिम समाज को मिला. जिससे छोटे व्यापारी और स्टार्टअप को बढ़ावा मिला. पीएम आवास योजना पिछले 10 वर्षों में 10 लाख से ज्यादा मुस्लिम परिवारों को जल जीवन मिशन के तहत 2024 तक 90 फीसदी मुस्लिम बहुल गांव में पाइप से स्वच्छ पानी पहुंचाया गया.
पीएम मोदी ने मुस्लिम बच्चों और महिलाओं के लिए इन 10 सालों में कई बड़े फैसले लिए, जैसे तीन तलाक कानून मोदी सरकार ने तीन तलाक पर रोक लगाकर लाखों मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना मुस्लिम लड़कियों को उच्च शिक्षा में सहायता देने के लिए 2024 25 में 10,000 करोड़ से ज्यादा का बजट आवंटित हुआ.