वक्फ (संशोधन) विधेयक लोकसभा और राज्यसभामें मैराथन चर्चा के बाद देर रात हुए मतदान में पारित हो गया है. संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब ये बिल कानून का रूप लेने से महज एक कदम दूर है और ऐसे में बात अब इसके प्रावधानों में हुए बदलाव और उससे वक्फ बोर्ड पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर होने लगी है. इस संशोधन विधेयक में ऐसा ही एक बदलाव है लिमिटेशन एक्ट को लेकर. सरकार ने इस बिल के जरिये अब वक्फ बोर्ड को भी लिमिटेशन एक्ट के दायरे में ला दिया है.
लिमिटेशन एक्ट से वक्फ को थी छूट
वक्फ अधिनियम 1995 में वक्फ को लिमिटेशन एक्ट से छूट मिली हुई थी. वक्फ अधिनियम की धारा 107 में इस बात का प्रावधान था कि वक्फ संपत्तियों पर लिमिटेशन एक्ट 1963 के प्रावधान लागू नहीं होंगे. लिमिटेशन एक्ट के तहत ये प्रावधान है कि किस मामले में कितने दिनों के अंदर शिकायत दर्ज कराना, केस कराना जरूरी है. तय अवधि के बाद किया गया दावा कोर्ट में खारिज हो जाता है. निजी संपत्ति के मामले में यह सीमा 12 साल है.
इस बात को इस से समझा जा सकता है कि अगर कोई व्यक्ति आपकी जमीन पर कब्जा कर लेता है तो उस जमीन को वापस पाने के लिए आपको 12 साल के भीतर कोर्ट में केस करना होता है. वक्फ को लिमिटेशन एक्ट से मिली छूट को इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि कोई कोई व्यक्ति किसी जमीन पर 50 साल से खेती कर रहा है. वक्फ बोर्ड उस जमीन पर भी दावा कर सकता था कि ये हमारी जमीन है.
संबंधित व्यक्ति के पास अपने बचाव के लिए लिमिटेशन एक्ट को आधार बनाकर कोर्ट में ये दलील देने का अधिकार नहीं था कि आपने क्लेम करने में बहुत देर कर दी. 50 साल से ये संपत्ति मेरे कब्जे में है और इसलिए अब इस पर आपका दावा नहीं बनता. ये मेरी जमीन हो गई.
अब लिमिटेशन एक्ट के दायरे में वक्फ
वक्फ संशोधन विधेयक में सरकार ने पुराने कानून की धारा 107 को समाप्त कर दिया है. इसका सीधा मतलब है कि वक्फ बोर्ड भी अब लिमिटेशन एक्ट 1963 के दायरे में आएगा. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद के दोनों सदनों में वक्फ संशोधन बिल पेश करते हुए स्पष्ट कहा कि अब वक्फ पर लिमिटेशन एक्ट भी लागू होगा.
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सरकार का तर्क है कि इस एक्ट के लागू नहीं होने की वजह से वक्फ बोर्ड कभी भी किसी भी जमीन पर दावा कर दे रहा था जिससे विवाद बढ़ रहे थे. लिमिटेशन एक्ट लागू हो जाने के बाद यह तय हो जाएगा कि दावा एक निश्चित समय तक ही किए जा सकेंगे और वक्फ बोर्ड की मनमानी पर लगाम लगेगी. आम लोगों को यह भरोसा होगा कि अब उनकी जमीन अचानक वक्फ के नाम पर नहीं छिनी जाएगी और वक्फ संपत्तियां भी सामान्य कानून के दायरे में आएंगी.
लिमिटेशन एक्ट लागू होने का प्रभाव क्या
वक्फ संपत्तियों पर भी लिमिटेशन एक्ट लागू होने के बाद वक्फ बोर्ड अब किसी संपत्ति पर चाहे जितने समय बाद भी दावा नहीं कर सकेगा. वक्फ बोर्ड ऐसी किसी भी संपत्ति पर अपने मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकेगा जिस पर 12 साल या इससे अधिक समय से किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था का कब्जा हो. वक्फ बोर्ड के लिए भी किसी संपत्ति पर दावा करने की एक तय समय सीमा होगी.
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वक्फ के भी लिमिटेशन एक्ट के दायरे में आने का सीधा मतलब यह होगा कि एडवर्स पजेशन एक्ट भी लागू हो जाएगा. अब अगर किसी ने 12 साल तक वक्फ की संपत्ति पर कब्जा बनाए रखा तो वह खुद को स्थायी मालिक घोषित कर सकता है.