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भारत में वक्फ संशोधन बिल पर मचा हंगामा, बाकी देशों में क्या है? जानिए किन-किन देशों में मौजूद है ऐसी इस्लामिक बॉडी

वक्फ संशोधन बिल पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में बना हुआ है और मुस्लिम संगठन के अलावा कई विपक्षी दल इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं. सरकार का मत है कि वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार को खत्म करके पारदर्शिता लाने के लिए यह बिल लाया गया है. वहीं विपक्ष का मानना है कि सरकार इस बिल के जरिए मुस्लिमों का अधिकार छीन रही है.

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वक्फ बिल का विपक्ष कर रहा जबरदस्त विरोध
वक्फ बिल का विपक्ष कर रहा जबरदस्त विरोध

वक्फ संशोधन बिल पर सियासी हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे लोकसभा में बुधवार को पेश कर दिया. इससे पहले बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में बिल पेश करने को लेकर सहमति बन गई थी.

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लोकसभा में बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का वक्त तय किया गया है और सदन की मांग के मुताबिक इसे बढ़ाया भी जा सकता है. बिल पेश होने से पहले सत्ताधारी बीजेपी, मुख्य विपक्ष कांग्रेस समेत तमाम दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर सदन में मौजूद रहने को कहा.

वक्फ बिल पर मचा बवाल

वक्फ संशोधन बिल पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में बना हुआ है और मुस्लिम संगठनों के अलावा कई विपक्षी दल इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं. सरकार का मत है कि वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार को खत्म करके पारदर्शिता लाने के लिए यह बिल लाया गया है. वहीं विपक्ष का मानना है कि सरकार इस बिल के जरिए मुस्लिमों का अधिकार छीन रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वक्फ बोर्ड सिर्फ भारत में ही है या बाकी देशों में भी ऐसी कोई संस्था या व्यवस्था मौजूद है.

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ये भी पढ़ें: पुरानी मस्जिदों से छेड़छाड़ नहीं, गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या में इजाफा... वक्फ बिल में हुए ये बड़े संशोधन
  
इस बारे में फरंगी महली लखनऊ के प्रमुख इस्लामी विद्वान और धार्मिक नेता मौलाना खालिद रशीद बताते हैं कि दुनियाभर में वक्फ की ज्यादातर जमीनें धार्मिक स्थलों के रूप में मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि 90 फीसदी से ज्यादा वक्फ संपत्तियां मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों और इमामबाड़ों के रूप में मौजूद हैं. वे इस बात पर जोर देते हैं कि यह परंपरा शुरू से व्यक्तिगत स्तर पर रही है, न कि किसी शासक या सम्राट की ओर से संगठित रूप में शुरू की गई.

कई मुल्कों में मंत्रालय के अधीन है वक्फ

वक्फ बोर्ड के इतिहास के बारे में उन्होंने बताया कि किसी सम्राट, राजा या मुगल बादशाह ने वक्फ को एक संगठित समिति के रूप में स्थापित नहीं किया. उन्होंने कहा कि पहले वक्फ बोर्ड जैसा कुछ नहीं था, भारत के आजाद होने और संविधान बनने के बाद अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग एंडोमेंट (Endowment) और ट्रस्ट बोर्ड बने. यह सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि हर धर्म के अपने बोर्ड हैं. मुसलमानों के लिए भी वक्फ बोर्ड इसी तरह से बना था.

क्या इस्लामिक कानून में वक्फ का कोई उदाहरण मिलता है? इसके जवाब में उन्होंने बताया कि इस्लामी संविधानों में वक्फ के लिए पूरा मंत्रालय होता है. मिसाल के तौर पर, सऊदी अरब में 'मिनिस्ट्री ऑफ वक्फ' है. इसी तरह कतर, इराक और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे इस्लामी देशों में भी वक्फ के लिए अलग मंत्रालय है. वे आगे बताते हैं कि इन देशों में यह 'मिनिस्ट्री ऑफ रिलीजियस अफेयर्स' यानी धार्मिक मामलों के मंत्रालय के तहत आता है. यह पूरी तरह से धार्मिक मामला है. मौलाना इस बात पर जोर देते हैं कि हर इस्लामी देश में वक्फ का अपना नाम और अपना अलग ढांचा हो सकता है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य वही रहता है- समाज और धर्म के लिए संपत्ति का इस्तेमाल.

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तुर्की में होता है 'फाउंडेशन' 

इतिहासकार इरफान हबीब भी यह मानते हैं कि वक्फ जैसी व्यवस्थाएं दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों और रूपों में मौजूद हैं. लेकिन उनका मूल उद्देश्य धर्मार्थ कार्यों के लिए संपत्ति का इस्तेमाल करना ही होता है. Aajtak.in से बातचीत में उन्होंने कहा, 'यह भी जरूरी नहीं है कि अगर बाकी मुल्कों में ऐसी संस्था मौजूद है तो उसका नाम वक्फ ही हो, कुछ और नाम भी हो सकता है, आखिर हर जगह चैरिटेबल काम तो होते ही हैं.' इसलिए उनके मुताबिक यह एक अनुमान है कि वक्फ की मौजूदगी किसी न किसी रूप में भारत के बाहर भी है, खासकर इस्लामी देशों में, (जैसे कि मिस्र, सीरिया, तुर्की) हालांकि वहां उनका क्या नाम है, वह इसे स्पष्ट तौर पर नहीं कह सकते हैं.

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वक्फ को कई देशों में संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय के तहत भी रखा जाता है. उदाहरण के लिए तुर्की में इसे 'फाउंडेशन' कहा जाता है और वहां फाउंडेशन डायरेक्टरेट के नाम से मंत्रालय का एक विभाग है. इसके बारे में लिखा गया है कि दानकर्ताओं की इच्छा के मुताबिक भविष्य की पीढ़ियों के लिए फाउंडेशन को बनाए रखना और विकसित करना ही इसका मिशन है. इसी तरह मिस्र में Ministry of Endowments नाम से एक विभाग है जो कि मस्जिदों का निर्माण और देखरेख करता है. इसके अलावा जनसेवा से जुड़े काम करता है. बता दें कि वक्फ का अंग्रेजी अनुवाद Endowment होता है.

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पाकिस्तान में भारत जैसी व्यवस्था

इसी तरह पाकिस्तान में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन इस्लामाबाद और प्रांतीय सरकारों की अलग-अलग अथॉरिटी के तहत किया जाता है. इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी वक्फ प्रॉपर्टीज एक्ट और हर प्रांत के लिए वक्फ एक्ट बनाया गया था. वहीं बांग्लादेश में वक्फ की संपत्ति धार्मिक मामलों के मंत्रालय के अधीन आती है. ज्यादातर मुल्कों में वक्फ का नियंत्रण केंद्र सरकार के पास ही है और मंत्रालयों की निगरानी में ऐसे विभाग या व्यवस्था काम करती हैं. 

इंडोनेशिया में बदन वकाफ़ इंडोनेशिया (BWI) नाम की संस्था वक्फ संपत्ति के इस्तेमाल के लिए समुदाय के लोगों का मार्गदर्शन करती है. BWI के पास वक्फ संपत्ति के प्रबंधकों को नियुक्त करने और वक्फ संपत्तियों के लिए योजना बनाने का अधिकार है. यह संस्था सरकार को बंदोबस्ती से संबंधित नीतिगत मामलों पर सलाह भी देती है. इसके सदस्यों की नियुक्ति और बर्खास्तगी राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जिनका कार्यकाल 3 साल का होता है. वहीं कुवैत में वक्फ और इस्लामी मामलों का मंत्रालय ऐसी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है.

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