वायनाड में हुए भीषण भूस्खलन में अपने परिवारों को खोने वाले बच्चों को गोद लेने के लिए कई लोग आगे आए हैं. लोगों की इस पेशकश के बाद केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने शनिवार को बच्चों को गोद लेने की एक विस्तृत प्रक्रिया के बारे में बताया है.
केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने फेसबुक पोस्ट में जॉर्ज ने लोगों की दयालुता के लिए आभार व्यक्त किया और स्पष्ट किया कि सरकार केंद्रीय किशोर न्याय अधिनियम के तहत उन बच्चों की देखभाल करती है, जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि लोग सही प्रक्रिया का पालन करके बच्चों को गोद ले सकते हैं.
उन्होंने कहा कि बच्चों की देखभाल और गोद लेना सभी कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाता है जो लोग CARA (सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी) के साथ पंजीकृत हैं. वह बच्चों को गोद ले सकते हैं. 6 साल से 18 साल तक के बच्चों को भी फॉस्टर केयर की सुविधा प्रदान की जाती है. इसे भी ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए, क्योंकि बच्चे का हित सबसे पहले हैं.
आपको शब्द आंखें नम करने वाले हैं: वीना जॉर्ज
उन्होंने बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में बताने से पहले कहा कि यह टिप्पणी हमारे ध्यान में नहीं आई, क्योंकि हम वायनाड में स्वास्थ्य विभाग से संबंधित मामलों की व्यवस्था करने में लगे थे. आपकी इस दयालुता के लिए दिल से धन्यवाद. ये दर्द पूरी तरह से समझ आता है. आपके शब्दों से मेरी आंखें भर आई हैं. आपको और आपकी पत्नी को बहुत-सा प्यार.
'हम पूरे प्यार से करेंगे बच्चों की देखभाल'
जॉर्ज ने ये टिप्पणी एक व्यक्ति के वायनाड भूस्खलन में अपने परिवारों को खोने वाले बच्चों को गोद लेने की पेशकश के बाद की है. उन्होंने लिखा था कि मेरी पत्नी और मेरे बच्चे नहीं हैं. हम पूरे प्यार से उनकी देखभाल करेंगे." जिस पर केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने प्रतिक्रिया दी.
वायनाड में भूस्खलन से 360 लोगों की मौत
आपको बता दें कि इस हफ्ते वायनाड में बड़े पैमाने पर भूस्खलन के बाद 360 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. शनिवार को वायनाड में रेस्क्यू टीमों ने बचे हुए लोगों का पता लगाने के लिए उन्नत रडार, ड्रोन और भारी मशीनरी को तैनात कर रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज कर दिया है. वहीं, केरल सरकार ने विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए एक नई टाउनशिप स्थापित करने की योजना की घोषणा की.