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Scorching Heat Alert: फलोदी में 50 से ज्यादा पारा तो देश के 37 शहरों में झुलसा रही 45 पार की गर्मी, जानिए अगले कुछ दिनों के लिए क्या है अलर्ट

भारत के कई राज्यों में इन दिनों प्रचंड गर्मी पड़ रही है. देश के करीब 37 शहरों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है. मौसम विभाग ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश और गुजरात में भीषण गर्मी का रेड अलर्ट जारी किया है. वहीं राजस्थान में पिछले तीन दिनों से गर्मी से संबंधित कई मौतों की सूचना मिली है.

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Weather Update
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भारत के अधिकांश राज्य इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में हैं. देश के लगभग 37 शहरों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया. इतनी तेज गर्मी के बीच कई राज्यों में बिजली कटौती संबंधी शिकायतें भी सामने आ रही हैं. चिलचिलाती गर्मी के कारण महाराष्ट्र के अकोला में प्रशासन ने सार्वजनिक समारोहों पर रोक लगाते हुए 31 मई तक आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 लागू कर दी है. 

भीषण गर्मी से झुलस रहा उत्तर भारत

राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश और गुजरात में प्रचंड गर्मी का रेड अलर्ट जारी किया है. इस गर्मी में हीट स्ट्रोक के मामले काफी देखने को मिल रहे हैं. राजस्थान का फलौदी लगातार दूसरे दिन देश का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 49.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. एक दिन पहले फलौदी का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. बता दें कि 1 जून 2019 के बाद से देश में सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया है. वहीं राजस्थान में पिछले तीन दिनों से गर्मी से संबंधित कई मौतों की सूचना मिली है. 

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आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के 37 शहरों में रविवार को अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले 17 शहरों में इतना तापमान था. यहां तक कि हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियां, जो मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी से बचने के लिए एक पसंदीदा जगह है, वहां भी खूब गर्मी पड़ रही है. शिमला में 30.6 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ इस मौसम का सबसे गर्म दिन रहा, जबकि ऊना में 44.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. 

दिल्ली में करीब आठ स्थानों पर अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया, जिसमें मुंगेशपुर और नजफगढ़ में 48.3 डिग्री सेल्सियस और 48.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. वहीं हरियाणा के नारनौल में पारा 47 डिग्री सेल्सियस और पंजाब के फरीदकोट में 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. महाराष्ट्र में प्रशासन ने श्रमिकों के लिए पीने के पानी और पंखों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा प्रशासन ने निर्देश दिया है कि दोपहर के समय निजी कोचिंग कक्षाएं नहीं लगाई जानी चाहिए. 

पानी और बिजली की हो रही कमी

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, भारत के 150 प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडारण पिछले सप्ताह उनके कुल भंडारण का केवल 24 प्रतिशत रह गया, जिससे कई राज्यों में पानी की कमी बढ़ गई और जलविद्युत उत्पादन पर काफी असर पड़ा. भीषण गर्मी ने पहले ही भारत की बिजली की मांग को 239.96 गीगावाट तक पहुंचा दिया है, जो इस सीजन में अब तक की सबसे अधिक है. घरों और कार्यालयों में एयर कंडीशनर और कूलर पूरी क्षमता से चल रहे हैं, जिसकी वजह बिजली की बहुत ज्यादा खपत हो रही है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि बिजली की मांग ज्यादा बढ़ सकती है और सितंबर 2023 में दर्ज किए गए 243.27 गीगावॉट के उच्च स्तर को पार कर सकती है. 

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लगातार बढ़ रहा तापमान

राजस्थान के बाड़मेर में पारा 49 डिग्री सेल्सियस, बीकानेर में 48.6 डिग्री सेल्सियस और जैसलमेर में 48.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. भीषण गर्मी को देखते हुए राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा का कहना है कि बिजली और पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है. इसके अलावा बिजली, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण व चिकित्सा विभाग के अधिकारियों और कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गयी हैं.

आईएमडी ने बताया कि राजस्थान और दिल्ली के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ रही है, जबकि पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से लू की चपेट में हैं. महाराष्ट्र के अकोला और यवतमाल में अधिकतम तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस और 46.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि मध्य प्रदेश के सागर में पारा 46.2 डिग्री सेल्सियस, गुना में 46.2 डिग्री सेल्सियस और खजुराहो में 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. 

आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम?
मई में गर्मी की लहर के कारण असम, हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश सहित देश भर के कई स्थानों पर अब तक का सबसे उच्च तापमान दर्ज किया गया है. मौसम विभाग ने बताया कि दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में 29 मई तक गर्मी का सितम जारी रहेगा. आईएमडी के अनुसार, गर्म रातों की स्थिति अगले चार दिनों में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में गर्मी से संबंधित तनाव को और बढ़ा सकती है क्योंकि रात का उच्च तापमान खतरनाक होता है इस दौरान शरीर को ठंडा होने का मौका नहीं मिलता और लोगों में हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. वैसे भी मेट्रो सिटीज का तापमान अन्य शहरों के मुकाबले ज्यादा होता है. 

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सोसायटी फॉर प्रोटेक्शन ऑफ एनवायरनमेंट एंड बायोडायवर्सिटी के संस्थापक सचिव आकाश वशिष्ठ ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरी क्षेत्र भूमि और सतह के कंक्रीटीकरण के कारण हीट चैंबर बन जाते हैं, जिससे गर्मी ज्यादा बढ़ती है. उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर में भीषण गर्मी की स्थिति बढ़ने की आशंका है क्योंकि बड़े पैमाने पर कंक्रीटयुक्त भूमि सतहों के 'शहरी ताप द्वीप' को बढ़ाती है, जिससे वायुमंडल में गर्मी बढ़ने लगती है.

बता दें कि लगातार तीन वर्षों से भारत के कुछ हिस्सों में भीषण हीटवेव ने बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया है, जिससे स्वास्थ्य, पानी की उपलब्धता, कृषि, बिजली उत्पादन और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्र प्रभावित हुए हैं. भारत के कुछ हिस्सों में अप्रैल में भी रिकॉर्ड तोड़ अधिकतम तापमान देखा गया. केरल में संदिग्ध हीट स्ट्रोक के कारण कम से कम पांच लोगों की मौत की सूचना मिली थी. 

प्रमुख जलवायु वैज्ञानिकों के एक समूह 'वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन' के अनुसार, इसी तरह की हीटवेव हर 30 साल में एक बार आ सकती है और जलवायु परिवर्तन के कारण इनकी संभावना पहले से लगभग 45 गुना अधिक हो गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि बाहर काम करने वालों, बुजुर्गों और बच्चों को गर्मी से थकावट और हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है. 

मौत का कारण बनी प्रचंड गर्मी

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 1998 और 2017 के बीच हीटवेव के कारण 166,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. सरकार ने पिछले साल जुलाई के महीने में संसद में बताया था कि भारत में 2015 और 2022 के बीच हीटवेव के कारण 3,812 मौतें हुई थी, जबकि सिर्फ आंध्र प्रदेश में 2,419 मौतें हुई थी. 

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एनजीओ ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के श्यामल संत्रा ने बताया कि स्टडीज से पता चलता है कि जब छात्र "कूल स्कूल ईयर" की तुलना में "हॉट स्कूल ईयर" में स्कूल जाते हैं तो परीक्षाओं में उनका प्रदर्शन गर्मी के कारण खराब हो जाता है. उन्होंने बताया कि भारत में 15 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में सही बिजली कनेक्शन नहीं होने और कई सिंगल क्लास वाले स्कूल होने के कारण हीटवेव ग्रामीण शैक्षिक परिणामों को बुरी तरह से प्रभावित करती है. 

वहीं देश में पर्याप्त कोल्ड-चेन बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से खाद्य पदार्थों को काफी नुकसान पहुंचता है. एक स्टडी से पता चला है कि भारत को हर साल 13 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के खाद्य पदार्थों के नुकसान का सामना करना पड़ता है, जबकि सिर्फ चार प्रतिशत ताजा उपज कोल्ड चेन सुविधाओं द्वारा कवर की जाती है. विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में हीट स्ट्रेस की वजह से उत्पादकता में गिरावट के कारण अनुमानित 80 मिलियन वैश्विक नौकरियों में से 34 मिलियन का नुकसान हो सकता है. 

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