
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को केंद्र ने दिल्ली बुला लिया है. बतौर मुख्य सचिव उनका कार्यकाल खत्म हो गया था, लेकिन चार दिन पहले ही ममता सरकार ने तीन महीने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था. लेकिन अब शुक्रवार को केंद्र सरकार ने अलपन बंदोपाध्याय को दिल्ली बुला लिया है. अलपन बंदोपाध्याय को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है.
केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, अलपन बंदोपाध्याय को अब केंद्र में नई जिम्मेदारी दी जाएगी. उन्हें 31 मई की सुबह 10 बजे से पहले रिपोर्ट करना है. केंद्र सरकार ने बंगाल सरकार से उन्हें जल्द से जल्द रिलीव करने का अनुरोध किया है.
इससे पहले बंगाल में तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ममता बनर्जी ने अलपन बंदोपाध्याय का कार्यकाल चार दिन पहले ही यानी 24 मई को तीन महीने बढ़ाने के आदेश दिए थे. बतौर मुख्य सचिव बंदोपाध्याय का कार्यकाल इसी महीने के आखिर में खत्म हो रहा था.
बंदोपाध्याय को दिल्ली बुलाने का फैसला ऐसे वक्त लिया गया है जब कुछ घंटों पहले ही यास तूफान में हुए नुकसान को लेकर हुई रिव्यू मीटिंग में ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच एक बार फिर टकराव देखने को मिला था. ममता बनर्जी इस मीटिंग में आधे घंटे देरी से पहुंची थीं. उनके साथ अलपन बंदोपाध्याय भी थे.
अलपन बंदोपाध्याय को ममता बनर्जी का करीबी अफसर माना जाता है. बंदोपाध्याय 1987 बैच के आईएएस अफसर हैं. वो हावड़ा समेत कई जिलों के डीएम भी रह चुके हैं. उन्हें पिछले साल सितंबर में राजीव सिन्हा के रिटायर्ड होने के बाद पश्चिम बंगाल का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था.
इस मामले पर टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने कहा, "क्या आजादी के बाद से ऐसा कभी हुआ है? किसी राज्य के मुख्य सचिव के केंद्र में जबरन नियुक्ति. कितना नीचे गिरेगी मोदी-शाह की बीजेपी? ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि बंगाल के लोगों ने दोनों को अपमानित किया और भारी बहुमत के साथ ममता बनर्जी को चुना."