
सड़क हादसे के बाद किसी घायल शख्स को तत्काल मदद की जरूरत होती है और डॉक्टर भी शुरुआती एक घंटे को 'गोल्डन ऑवर' कहते हैं. मतलब अगर कोई सड़क हादसे में जख्मी हुआ है तो उसे फर्स्ट एड जल्द से जल्द मुहैया कराना जरूरी हो जाता है ताकि उसकी जान बचाई जा सके. लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि सड़क हादसे में घायल लोगों की मदद करने से लोग हिचकते हैं. इस कई कारण हो सकते हैं, जिसमें पुलिस केस में पड़ने से बचना और समय की कमी शामिल है.
देश के 88% लोग मदद को तैयार
इसके बावजूद देशभर में 88 फीसदी लोग ऐसे हैं जो सड़क हादसे के वक्त रुककर पुलिस या एंबुलेंस को फोन करने के लिए तैयार हैं. इनमें सबसे ज्यादा 99 फीसदी पश्चिम बंगाल के लोग मददगार हैं जो हर हाल में मदद के लिए रुकने की बात कहते हैं, जबकि ओडिशा के सिर्फ 78% लोग ही ऐसा करने को राजी होते हैं. इंडिया टुडे ग्रुप ने हाउ इंडिया लिव्ज (How India Lives) और कैडेंस इंटरनेशनल (Kadence International) के साथ मिलकर देश का पहला सकल घरेलू व्यवहार (Gross Domestic Behaviour) सर्वे करवाया है, जिसमें ये नतीजे सामने आए हैं.
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सड़क हादसे में मदद को लेकर आए सर्वे नतीजे पर समाजशास्त्री दीपांकर गुप्ता ने कहा कि अगर 88 फीसदी लोगों ने वाकई किसी गंभीर हादसे के बारे में रिपोर्ट किया है, जैसा कि सर्वे में उन्होंने कहा है, तो फिर परिवहन मंत्रालय ने यह रिपोर्ट क्यों दी कि हर साल सड़क पर 50 फीसदी मौतें इसलिए होती हैं क्योंकि समय पर इलाज मुहैया नहीं कराया जा सका? यानी लोग मदद करने के बारे में बोल तो रहे हैं लेकिन असल में कितनी मदद करते हैं, यह अलग बात है.
सड़क हादसे बड़ी समस्या
देश में सड़क हादसे एक गंभीर समस्या बन चुके हैं और सरकारें हर स्तर पर इन्हें रोकने की कोशिशों में लगी हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि देश में हर साल करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं और इस वजह से भारत को हर साल जीडीपी का तीन फीसदी नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि यह देश के लिए सड़क हादसे एक बड़ी समस्या है और हर साल इनमें 18 से 45 साल की उम्र के करीब दो लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं.
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इसी तरह लोकल प्रशासन से जुड़ी समस्याओं को लेकर 79% लोग अपने सरपंच या पार्षद के पास जाने में हिचकते नहीं हैं. 21 फीसदी लोग अपनी समस्याओं को स्थानीय प्रशासन तक पहुंचाने में झिझकते हैं. इसमें ओडिशा के 93% लोग स्थानीय नेताओं के पास अपनी समस्याओं लेकर जाने में कोई हिचक महसूस नहीं करते, जबकि कर्नाटक में यह आंकड़ा 65% है, जिससे पता चलता है कि वहां लोग प्रशासन से बातचीत करने में सहज महसूस नहीं करते हैं.
ये सर्वे 21 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 98 जिलों में अपनी तरह का पहला जनमत सर्वेक्षण किया. इस सर्वे में 9188 लोगों से उनकी इनकम या संपत्ति के बारे में नहीं, बल्कि शालीन व्यवहार, हमदर्दी और नीयत के बारे में बातचीत की गई.