पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद भड़की हिंसा के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कोलकाता हाई कोर्ट (Culcutta High Court) के आदेश पर अलग-अलग कुल 11 केस दर्ज किए हैं. हाई कोर्ट ने 18 अगस्त को जांच के लिए आदेश दिया था, जिसके बाद अलग-अलग मामलों में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है.
शुक्रवार को सीबीआई ने बंगाल हिंसा पर जांच की कमान अब खुद संभाल ली है. इससे पहले पश्चिम बंगाल के कई पुलिस स्टेशन में कई आरोपों के तहत केस दर्ज कराए गए थे. अब उन सभी मामलों की पड़ताल सीबीआई की टीम करेगी. नदिया जिले के गंगानगर पुलिस स्टेशन में 3 मई को पहली प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसमें 12 नामजद आरोपी और एक अन्य शख्स ने पीड़ितों पर लाठी-डंडों से हमला किया था.
हिंसा का दूसरा केस बांकुरा जिले के कोतुलपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 3 लोगों ने एक शख्स का पहले अपहरण किया, फिर उसे मारकर एक तालाब के किनारे लाश फेंक दी. यह केस 4 जुलाई को रजिस्टर किया गया. जबकि शख्स का अपहरण 6 मई को हुआ था और 8 मई को उसकी लाश मिली थी.
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सामने आई थीं यौन उत्पीड़न की घटनाएं
वहीं तीसरा मामला वनदिया जिले से ही था, जिसमें 8 आरोपियों ने 3 लोगों को लोहे के छड़ों से बुरी तरह पीटा था. इस प्रकरण में केस 14 मई को दर्ज किया गया था. बांकुरा जिले के सिंधु पुलिस स्टेश में 30 आरोपियों के खिलाफ 10 जून केस दर्ज किया गया था. आरोप था आरोपियों ने नात्रा गांव में पीड़ितों के घर पर लोहे की रॉड, चाकू, कटार, पिस्टल और बम से हमला किया, वहीं महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया गया. एक शख्स को पिकअप बैन में डालकर आरोपी मौके से दूर ले गए थे, वहीं उसे मारकर एक पेड़ पर लोगों ने लटका दिया. ऐसे ही कुल 11 मामले सीबीआई ने दर्ज किए हैं.
घटनास्थल पर जांच करेगी CBI
सीबीआई ने चुनाव बाद हिंसा के पीड़ितों के परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है. अधिकारी फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ घटनास्थल पर जाने की तैयारियां कर रहे हैं. केंद्रीय जांच ब्यूरो ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया है. कोलकाता हाईकोर्ट ने राज्य विधानसभा चुनावों के बाद कथित रूप से पश्चिम बंगाल में हुए बलात्कार और हत्या के सभी मामलों में सीबीआई से जांच का आदेश दिया था.
कोर्ट कर रहा है CBI जांच की निगरानी
टीमों का नेतृत्व संयुक्त निदेशक स्तर के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं और इसमें उप महानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और तीन पुलिस अधीक्षक शामिल भी हैं. विशेष टीम के 25 अधिकारियों को कथित बलात्कार और हत्या के मामलों की जांच के लिए चार टीमों में बांटा गया है, जिसकी निगरानी कोर्ट कर रहा है. अन्य मामलों के लिए अदालत ने स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम (एसआईटी) को जांच का आदेश दिया है.
हाई कोर्ट में दाखिल हुई थीं कई याचिकाएं
हाई कोर्ट के सामने कई जनहित याचिकाएं बंगाल हिंसा पर दायर की गईं, जिसमें आरोप लगाया गया कि विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद हुई हिंसा में लोगों को मार डाला गया, बलात्कार किया गया और उन्हें भागने के लिए मजबूर किया गया. अदालत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से जांच करने को कहा था. NHRC ने अपनी रिपोर्ट में इशारा किया था कि यह सत्तारूढ़ दल के समर्थकों द्वारा मुख्य विपक्षी दल के समर्थकों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक हिंसा थी.