पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत ने सोमवार को राज्य स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य भवन में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सहित विभिन्न संघों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी, ताकि आगे का रास्ता निकाला जा सके. इस बीच जूनियर डॉक्टरों के प्रमुख संगठन, पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर फ्रंट (डब्ल्यूबीजेडीएफ) ने आज राजभवन 'अभिजान' (मार्च) का आह्वान किया था.
डाक्टरों के विभिन्न संगठनों के साथ हुई बैठक के बाद बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत ने कहा कि डाक्टरों के दस मांगों में सात को मान लिया गया है. उन्होंने कहा कि आज हमारी मुलाकात सीनियर डॉक्टरों से हुई. इन डाक्टरों के साथ 2 घंटे से ज्यादा समय तक बैठक चली, जिसमें डॉक्टरों ने अपनी कई मांगों को सामने रखा.
भूख हड़ताल खत्म करने का अनुरोध
मनोज पंत ने कहा कि दस मांगों में सात पर सहमति बन गई और उन्हें मान लिया गया है. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जूनियर डाक्टर बाकी के तीन मांगों को लेकर एक निश्चित समय सीमा की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सीनियर डाक्टरों के साथ हुई बैठक के माध्यम से हमने जूनियर डॉक्टरों से भी अनुरोध किया है कि वो अपना भूख हड़ताल खत्म कर दें.
ट्रेनी डॉक्टर के रेप-मर्डर के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन
9 अगस्त को अपने एक ट्रेनी डॉक्टर के रेप-मर्डर के बाद बंगाल समेत पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था. डॉक्टरों को अधिक सुरक्षा प्रदान करने की बात लगातार कही जा रही है. इस मांग को लेकर बंगाल के जूनियर डाक्टरों ने काम करना बंद कर दिया था, जिस के बाद राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई थी.
हालांकि, 21 सितंबर को 42 दिनों बाद सरकार के आश्वासन पर इन डाक्टरों ने हड़ताल समाप्त कर दिया था, लेकिन 5 अक्टूबर को जूनियर डॉक्टरों ने कोलकाता में अपना आमरण अनशन शुरू कर दिया.