नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 सोमवार से देश में लागू हो गया है. हालांकि पूर्वोत्तर के आदिवासी इलाकों को CAA के दायरे से बाहर रखा गया है. यानी पूर्वोत्तर राज्यों के अधिकांश आदिवासी इलाकों में सीएए लागू नहीं किया जाएगा. इनमें वे क्षेत्र भी शामिल हैं, जिन्हें संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जा हासिल है.
कानून के मुताबिक, इसे उन सभी पूर्वोत्तर राज्यों में लागू नहीं किया जाएगा, जहां देश के अन्य हिस्सों के लोगों को यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट (RLP) की जरूरत होती है. ILP अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर और सिक्किम में लागू है. इस व्यवस्था को 1873 यानी ब्रिटिश शासनकाल में लागू किया गया था. यह परमिट सिस्टम भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के पास विशिष्ट क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने में मदद करती है.
'ये क्षेत्र सीएए दायरे से बाहर'
अधिसूचित कानून के नियमों का हवाला देते हुए अधिकारियों ने कहा, आदिवासी क्षेत्रों में जहां संविधान की 6वीं अनुसूची के तहत स्वायत्त परिषदें बनाई गई थीं, वहां सीएए के दायरे से छूट दी गई है. असम, मेघालय और त्रिपुरा में ऐसी स्वायत्त परिषदें अस्तित्व में हैं. इनमें असम में कार्बी आंगलोंग, दिला हसाओ और बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल क्षेत्र, मेघालय में गारो हिल्स और त्रिपुरा में आदिवासी क्षेत्र शामिल हैं.
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'सीएए में किसे मिलेगी नागरिकता'
सीएए के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक (हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी) समुदाय को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है.
क्या है इनर लाइन परमिट?
इनर लाइन परमिट (आईएलपी) एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है. यह संबंधित राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है. यह दस्तावेज भारतीय नागरिकों को सीमित समय के लिए संरक्षित क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति देता है. इनर लाइन परमिट के लिए ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से आवेदन किया जा सकता है. जारी किए गए परमिट पर्यटकों, किरायेदारों और अन्य उद्देश्यों के लिए अलग-अलग प्रदान किए जाते हैं. दस्तावेज यात्रा की तारीखों को बताता है और उन विशेष क्षेत्रों को निर्दिष्ट करता है जिनमें आईएलपी धारक यात्रा कर सकता है.
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ILP के लिए क्या दस्तावेजों की जरूरत?
इनर लाइन परमिट के लिए आवेदन करना भी आसान है. इसके लिए अपने वीजा विवरण के साथ दो फोटो और वैध पासपोर्ट की फोटो कॉपी की जरूरत होगी. विदेशियों को सिक्किम में प्रवेश करने के लिए भी इनर लाइन परमिट की जरूरत होती है. इनर लाइन परमिट के लिए पैसे देने की जरूरत नहीं होती है.
कहां-कहां परमिट लेने की जरूरत?
- सिक्किम में त्सोमगो-बाबा मंदिर यात्रा, सिंगालीला ट्रेक, नाथुला दर्रा जैसी जगहें संरक्षित क्षेत्रों के अंतर्गत आती हैं. यहां यात्रा के लिए प्रवेश परमिट लेने की जरूरत होती है.
- मिजोरम कई जनजातियों का घर है, जिनमें लुशेई, राल्ते, हमार, पैहते और पावी (या पोई) शामिल हैं. राज्य सरकार आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए गैर-मूल निवासियों के लिए इनर लाइन परमिट जारी करती है.
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- नगालैंड राज्य म्यांमार, असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश से घिरा हुआ है. ये पर्यटकों को आकर्षित करता है. विशिष्ट रीति-रिवाजों का केंद्र भी है. हालांकि, यहां प्रवेश करने के लिए पर्यटकों को प्रवेश पास की जरूरत होती है, जो अंतर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों की रक्षा करता है.
- अरुणाचल प्रदेश को पहाड़ों की भूमि माना जाता है. ये राज्य चीन, म्यांमार और भूटान के साथ सीमा साझा करता है. यहां यात्रियों को प्रवेश परमिट प्राप्त करने की जरूरत होती है.
- मणिपुर में यात्री प्रवेश परमिट का चार तरीकों से लाभ उठा सकते हैं - अस्थायी, नियमित, विशेष और श्रम परमिट.