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कांग्रेस के साथ क्यों नहीं जाना चाहते अखिलेश, वजह पता चल गई! : आज का दिन, 22 मार्च

कांग्रेस की सरपरस्ती में विपक्षी एकजुटता से अखिलेश क्यों दूर भाग रहे हैं, कर्नाटक चुनाव में BJP की कमज़ोर कड़ी क्या है और क्यों ऑस्ट्रेलिया की धाकड़ बॉलिंग के सामने बेबस नज़र आती है टीम इंडिया? सुनिए 'आज का दिन' में.

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akhilesh yadav
akhilesh yadav

लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सियासी दलों के बीच गोलबंदी, खेमेबंदी, जुगलबंदी ये सब होने शुरू हो गए हैं. बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के सहारे सत्ता में वापसी की राह देख रही है. वहीं विपक्ष एकजुट होकर बीजेपी को पछाड़ने की कवायद में लगा है. लेकिन ऑपोजिशन पार्टियों की अपनी अपनी महत्वाकांक्षाएं इस राह में रोड़ा बन रही हैं. एक तरफ कांग्रेस राहुल गांधी को चेहरा बनाकर बाक़ी दलों को अपने पीछे लामबंद करने की कोशिश कर रही है. दूसरी तरफ़ कांग्रेस के पुराने अलायन्स पार्टनर ही उसे ठेंगा दिखा रहे हैं. इस फ़ेहरिस्त में एक नाम अखिलेश यादव का भी है. 2017 में दोनों पार्टियों ने मिलकर यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ा था. राहुल और अखिलेश की जोड़ी के लिए 'यूपी के लड़के' जैसे नारे गढ़े गए थे. लेकिन ये लड़के, चुनाव लड़ के अलग हो गए. भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस ने कम से कम दो बार अखिलेश यादव की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया, मगर अखिलेश ने दूर से ही नमस्ते कर दिया. तो कांग्रेस की लीडरशिप में विपक्षी पार्टियों की जो छतरी तैयार हो रही है, अखिलेश उसके अंदर आने से क्यों कतरा रहे हैं और कांग्रेस को लेकर हाल-फ़िलहाल में उनका रुख़ कैसा रहा है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें. 

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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव बिल्कुल सिरहाने पर खड़ा है. और इसलिए देश के तमाम बड़े नेता कर्नाटक की उड़ान भर रहे हैं. दस दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेंगलुरु पहुंचे थे - बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने. 25 तारीख को एक बार फिर वो कर्नाटक में होंगे, कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. इस साल उनका ये सातवां कर्नाटक दौरा होगा. परसों राहुल गांधी भी कर्नाटक में ही थे जहाँ उन्होंने युवाओं को दस लाख रोज़गार और युवा निधि स्कीम से रिझाने की कोशिश की. आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल भी इस महीने कर्नाटक का चक्कर लगा चुके हैं. कुल मिलाकर पार्टियां और इसके नेता चुनाव की तैयारियों को धार देने में जुट गए हैं. वैसे तो सत्ता में बैठी बीजेपी और प्रमुख विपक्षी कांग्रेस दोनों ही अंदरूनी गुटबाज़ी से जूझ रही है, लेकिन दोनों पार्टियों के सामने चुनौती चुनावी ज़मीन मज़बूत करने की भी है. इसी सिलसिले में बीजेपी अपना विशेष ध्यान साउथर्न कर्नाटक पर दे रही है, जो पार्टी के लिए कमज़ोर कड़ी साबित होती आई है. मैसूर के इस इलाक़े में विधानसभा की 51 सीटें पड़ती हैं, जो पूरे राज्य की लगभग एक चौथाई सीट है. 2018 के चुनाव में यहाँ बीजेपी को सिर्फ 9 सीटों पर ही जीत नसीब हुई थी. तो दक्षिणी कर्नाटक का जो ये भूभाग है, वो बीजेपी के लिए पॉलिटिकली फर्टाइल क्यों नहीं रहा है और इस बार क्या बीजेपी को यहाँ से कुछ शुभ संकेत मिलते दिख रहे हैं?  'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें. 

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इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा और फाइनल मैच आज चेन्नई में दोपहर डेढ़ बजे से खेला जाना है. लेकिन पिछले दो मैचों से टीम इंडिया के बल्लेबाज़ों के चेहरे पर बारह बजे हुए हैं. वजह है ऑस्ट्रेलिया की धाकड़ बॉलिंग. पहला मैच तो टीम इंडिया हारते हारते जीत गई थी और दूसरा मैच बड़े ही शर्मनाक ढंग से हारी, ऐसे में सवाल उठने लगे कि ICC वर्ल्ड कप का साल है ये और अपने घर में ऐसे खेलेंगे तो क्या होगा. मिचेल स्टार्क की आग उगलती गेंदों के सामने क्यों बेबस और लाचार नज़र आई टीम इंडिया? टी-20 में सुपरहिट सूर्या के बल्ले को वनडे में क्यों सांप सूंघ जाता है?  'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें. 

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