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संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव घोटाला क्या है जिसमें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को जारी हुआ नोटिस?

याचिका में बताया गया है कि संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी ने लोगों से भारी निवेश कराया, निवेशकों को फर्जी रिकॉर्ड पोस्टर दिखा कर धोखे में रखा गया. लोगों ने जो पैसा सोसाइटी में निवेश किया था वो लौटाया नहीं गया. ये पूरा घोटाला करीब 900 करोड़ का बताया जा रहा है, जो हजारों की संख्या में लोगों ने निवेश किया था.

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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • करीब 900 करोड़ के गबन का है मामला
  • लोगों से पैसा निवेश कराकर नहीं लौटाया गया

संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव घोटाला मामला फिर से गरमा गया है. राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने यूनियन ऑफ इंडिया समेत सभी 17 पक्षकारों को नोटिस जारी किया है. नोटिस पाने वालों में राजस्थान के बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उनकी पत्नी नोनंद कंवर का नाम भी शामिल है. हाई कोर्ट ने ये नोटिस संजीवनी पीड़ित संघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए हैं. संजीवनी पीड़ित संघ का दावा है कि कोऑपरेटिव सोसाइटी में लोगों ने भारी रकम निवेश की थी, लेकिन उन्हें पैसा वापस नहीं किया गया और उसका गलत तरीके से गबन कर लिया गया.

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क्या है पूरा मामला?
संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी को राजस्थान सोसाइटी एक्ट के तहत 2008 में रजिस्टर्ड कराया गया था. इसके बाद 2010 में ये सासाइटी मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में बदल गई. इस सोसाइटी के पहले मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रम सिंह थे, जो घोटाले की जांच में प्रमुख नाम भी हैं. विक्रम सिंह को ही इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड माना जाता है जिनकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है. 

राजस्थान हाई कोर्ट में दायर याचिका में बताया गया है कि संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी ने लोगों से भारी निवेश कराया, निवेशकों को फर्जी रिकॉर्ड पोस्टर दिखा कर धोखे में रखा गया. लोगों ने जो पैसा सोसाइटी में निवेश किया था वो लौटाया नहीं गया. ये पूरा घोटाला करीब 900 करोड़ का बताया जा रहा है, जो हजारों की संख्या में लोगों ने निवेश किया था. आरोप ये भी हैं कि निवेशकों के पैसे को गलत तरीके से लोन पर दिया गया और लोन पर ब्याज भी नहीं वसूला गया. 

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कुछ निवेशकों की तरफ से इसकी शिकायत की. मामला राजस्थान SOG तक पहुंचा. अगस्त 2019 में इसमें एफआईआर दर्ज की गई. जांच टीम को फेक लोन से जुड़े अहम सुराग मिले. मामले में सोसाइटी के अधिकारियों की गिरफ्तारियां की गईं.

गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम क्यों?
इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड कहे जाने वाले विक्रम सिंह और गजेंद्र सिंह के बीच कनेक्शन बताया जाता है. दोनों की साथ में तस्वीर भी काफी चर्चा बटोर चुकी है. साथ ही आरोप ये भी हैं कि निवेशकों का पैसा गलत तरीके से विक्रम सिंह के खातों में ट्रांसफर हुआ और विक्रम सिंह ने एक ऐसी कंपनी से शेयर खरीदे जिसके शेयरहोल्डर गजेंद्र सिंह भी हैं. 

हालांकि, इस मामले में पहले हाई कोर्ट गजेंद्र सिंह शेखावत को राहत भी दे चुका है. दरअसल, गजेंद्र सिंह की भूमिका की जांच को लेकर दायर एक शिकायत पर निचली अदालत ने आदेश दिए थे जिन पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी. लेकिन अब जबकि संजीवनी पीड़ित संघ की तरफ से हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई है तो जोधपुर खंडपीठ ने गजेंद्र सिंह को भी नोटिस जारी कर दिया है. 


 

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