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Explainer: क्या है SDG, कैसे तय होती है विकास के पैमाने पर राज्यों की रैंकिंग?

Sustainable Development Goals (SDG) नाम की इस रिपोर्ट में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिति पर प्रदर्शन का आकलन किया जाता है. 

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नीति आयोग ने जारी की रिपोर्ट (फोटो: @NITIAayog)
नीति आयोग ने जारी की रिपोर्ट (फोटो: @NITIAayog)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • UN में लिया गया था सतत विकास का संकल्प
  • साल 2030 त​क इन लक्ष्यों को हासिल करना है

भारत सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने सतत विकास के लक्ष्यों पर अपनी तीसरी रिपोर्ट 2020-21 जारी कर दी है. इस बार की रिपोर्ट में केरल टॉप स्थान पर रहा है, जबकि बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है. आइए जानते हैं कि क्या होती है ये रिपोर्ट और इन्हें क्यों जारी ​की जाती है? 

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Sustainable Development Goals नाम की इस रिपोर्ट में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिति पर प्रदर्शन का आकलन किया जाता है. इस बार की रिपोर्ट में केरल टॉप स्थान पर रहा है, जबकि बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है. झारखंड की स्थिति भी अच्छी नहीं है और वह बिहार से ऊपर है. 

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने दिल्ली में गुरुवार को इस रिपोर्ट को लॉन्च किया. उन्होंने कहा कि एसडीजी इंडिया इंडेक्स और डैशबोर्ड के माध्यम से एसडीजी की निगरानी के हमारे प्रयास को दुनिया में पहचान मिल रही है और इस डेटा का उपयोग विकास के प्रोजेक्ट पर किया जा रहा है.

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र के विजन के अनुरूप नीति आयोग एसडीजी इंडिया इंडेक्स में राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण के क्षेत्र में प्रगति को मापता है और इसी के आधार पर उनकी रैंकिंग करता है. 

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केरल लगातार टॉप कर रहा 

इस बार इस रिपोर्ट में 17 लक्ष्यों पर 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रदर्शन का आकलन किया गया है. इस रिपोर्ट में अगर पांच टॉप परफॉर्मर राज्यों की बात करें तो टॉप फाइव की लिस्ट में केरल प्रथम, दूसरे नंबर पर हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु, तीसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, उत्तराखंड, चौथे नंबर पर सिक्किम और पांचवें नंबर पर महाराष्ट्र है. केरल 2019 की रैंकिंग में भी पहले स्थान पर था.

क्या होते हैं एसडीजी 

वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly- UNGA) में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने विकास के 17 लक्ष्यों को आम सहमति से स्वीकार किया. UN ने विश्व के बेहतर भविष्य के लिये इन लक्ष्यों को महत्त्वपूर्ण बताया तथा वर्ष 2030 तक इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये इसके क्रिन्वयन की रूपरेखा सदस्य देशों के साथ साझा की गई. 

17 सतत विकास लक्ष्‍य (SDG) और 169 उद्देश्य सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के अंग हैं जिसे सितंबर 2015 में संयुक्‍त राष्‍ट्रमहासभा की शिखर बैठक में 193 सदस्‍य देशों ने अनुमोदित किया था. यह एजेंडा पहली जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ है.  

कोई पीछे न छूटे

असल में इसके द्वारा संयुक्त राष्ट्र ने इस धरती से गरीबी, भुखमरी को खत्म करने और सबको आगे बढ़ाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. 2030 के लिए वैश्विक एजेंडा का मूल मंत्र सार्वभौमिकता का यह सिद्धांत है-‘कोई पीछे न छूटे’. इन उद्देश्‍यों पर अमल के लिए जरूरी है कि ये सभी सरकारों और काम करने वालों के लिए प्रासंगिक होने चाहिए. विकास को अपने सभी आयामों में सभी के लिए, हर जगह समावेशी होना चाहिए और उसका निर्माण हर किसी की, विशेषकर सबसे लाचार और हाशिए पर जीते लोगों की भागीदारी से होना चाहिए. 

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भारत में सतत विकास लक्ष्यों के बारे में राष्ट्रीय कार्रवाई

सतत विकास लक्ष्यों के बारे में तालमेल का काम भारत सरकार के नीति आयोग को सौंपा गया है. नीति आयोग ने सतत विकास लक्ष्यों औऱ उनके उद्देश्यों से जुड़ी योजनाओं की पहचान शुरू की है और हर उद्देश्य लिए अग्रणी एवं सहायक मंत्रालयों की भी पहचान कर ली है. उन्होंने समूचे सरकारी तंत्र में सतत विकास से जुड़ा दृष्टिकोण अपनाया है. इस बात पर जोर दिया है कि सतत विकास लक्ष्य, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय पहलुओं में परस्पर जुड़े हुए हैं. राज्यों को सलाह दी गई है कि वे भी केंद्र प्रायोजित योजनाओं के साथ-साथ अपनी योजनाओं की भी इसी तरह पहचान करें. 

कैसे बनती है रैकिंग 

नीति आयोग ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर भारत की प्राथमिकताओं के अनुरूप अपना सूचकांक तैयार किया है. नीति आयोग हर साल UN के 232 सूचकांकों की प्रणाली पर आधारित 100 निजी सूचकांकों पर राज्यों के प्रदर्शन की समीक्षा करता है, जिनमें शामिल हैं- आकांक्षी (Aspirant): 0–49 परफार्मर (Performer): 50-64 फ्रंट रनर (Front Runner): 65–99 अचीवर (Achiever): इस तरह 100 के पैमाने पर हासिल अंक के आधार पर राज्यों की रैंकिंग की जाती है. 

ये 17 लक्ष्य इस प्रकार हैं

  1. गरीबी की पूर्णतः समाप्ति
  2. भुखमरी की समाप्ति
  3. अच्छा स्वास्थ्य और जीवनस्तर
  4. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
  5. लैंगिक समानता
  6. साफ पानी और स्वच्छता
  7. सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा
  8. अच्छा काम और आर्थिक विकास
  9. उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा का विकास
  10. असमानता में कमी
  11. टिकाऊ शहरी और सामुदायिक विकास
  12. जिम्मेदारी के साथ उपभोग और उत्पाद
  13. जलवायु परिवर्तन
  14. पानी में जीवन
  15. भूमि पर जीवन
  16. शांति और न्याय के लिए संस्थान
  17. लक्ष्य प्राप्ति में सामूहिक साझेदार

 

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SDG

राज्य सरकारों की निर्णायक भूमिका

सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति की कुंजी राज्य सरकारों के हाथ में है क्योंकि वही जनहित को प्राथमिकता देने और यह सुनिश्चित करने में सबसे अधिक समर्थ हैं कि कोई पीछे न छूटे. सरकार के अनेक प्रमुख कार्यक्रम, जैसे, स्वच्छ भारत, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया, सतत विकास लक्ष्यों के मूल में हैं. राज्य और स्थानीय सरकारें इनमें से अनेक कार्यक्रमों में मुख्य भूमिका निभाती हैं. 

असल में 17 में से 15 सतत विकास लक्ष्यों का सीधा संबंध राज्य सरकारों की गतिविधियों से है. राज्य सरकारें सतत विकास लक्ष्यों पर अमल और उनकी निगरानी के लिए संकल्पना, नियोजन, बजट निर्धारण और विकास में गहरी रुचि ले रही हैं. 

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