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चिराग, मांझी, ललन सिंह जैसे NDA के सहयोगी दलों के नेताओं को मिले मंत्रालय क्या करते हैं काम?

एनडीए के सहयोगी LJP (रामविलास) चीफ चिराग पासवान को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, HAM चीफ जीतनराम मांझी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय और JDU के पूर्व चीफ राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को पंचायती राज मंत्रालय और मछलीपालन, पशुपालन, डेयरी मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. TDP नेता के राम मोहन नायडू को नागरिक उड्डयन मंत्रालय और JDS नेता एचडी कुमारस्वामी को इस्पात मंत्रालय और भारी उद्योग मंत्रालय की कमान दी गई है.

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NDA के सहयोगी नेता भी मोदी कैबिनेट में शामिल हुए हैं.
NDA के सहयोगी नेता भी मोदी कैबिनेट में शामिल हुए हैं.

एनडीए की नई सरकार गठित होने के बाद मंत्रालयों और विभागों का बंटवारा भी हो गया है. मोदी 2.0 जैसी ही मोदी 3.0 सरकार का स्वरूप देखने को मिला है. कैबिनेट में शामिल किए घटक दलों के नए चेहरों को भी अच्छे खासे बजट वाले विभाग दिए गए हैं. कैबिनेट में कुल 55 मंत्रालयों (स्वतंत्र प्रभार समेत) का बंटवारा किया गया है. इनमें 30 को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. 5 स्वतंत्र प्रभार (राज्य मंत्री) हैं. कई मंत्रियों के पास दो से तीन विभागों की जिम्मेदारी है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पास कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और वे सभी महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दे और अन्य सभी विभाग रखे हैं, जो किसी भी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं.

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एनडीए के सहयोगी LJP (रामविलास) चीफ चिराग पासवान को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, HAM चीफ जीतनराम मांझी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय और JDU के पूर्व चीफ राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को पंचायती राज मंत्रालय और मछलीपालन, पशुपालन, डेयरी मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. TDP नेता के राम मोहन नायडू को नागरिक उड्डयन मंत्रालय और JDS नेता एचडी कुमारस्वामी को इस्पात मंत्रालय और भारी उद्योग मंत्रालय की कमान दी गई है. आइए जानते हैं कि क्या करते हैं ये मंत्रालय...

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय: खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान है. इसका निर्यात में 13% और औद्योगिक निवेश में 6% का योगदान है. इस क्षेत्र ने पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित किया है. वर्ष 2014 से 2020 तक 4.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ है. फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री का तात्पर्य ऐसी एक्टीविटीज से है, जिसमें प्राथमिक कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण कर उनका मूल्यवर्धन किया जाता है. उदाहरण के लिये डेयरी उत्पाद, दूध, फल और सब्जियों का प्रसंस्करण, पैकेट बंद भोजन और पेय पदार्थ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के अंतर्गत आते हैं. भारत बहुत बड़ी मात्रा में विदेशों से खाद्य प्रसंस्कृत उत्पाद आयात करता है. वर्तमान में देश में करीब 370 अरब डॉलर मूल्य के खाद्य पदार्थों की खपत होती है. वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा 1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंचने की संभावना है. अगर देश में फूड प्रोसेसिंग पर ठीक से काम किया जाए तो हमारी दूसरे देशों से निर्भरता कम होगी और यहां किसान और व्यवसायों से जुड़े लोगों को सीधे इसका लाभ मिलेगा. 2023-2024 में इस मंत्रालय का बजट 3290 करोड़ रुपए था. इस मंत्रालय की जिम्मेदारी चिराग पासवान ने संभाली है.

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फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री से क्या लाभ हो सकते हैं?

- फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए किसानों को अतिरिक्त मुनाफा कमाने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. कृषि उत्‍पादकता में बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी.
- नई आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के नए अवसर भी मिलते हैं. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है. कृषि में विविधता को बढ़ावा मिलता है. 
- यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें व्यापक स्तर पर कारोबारी निवेश की संभावनाएं हैं. देश की संपूर्ण खाद्य मूल्य श्रृंखला में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, इनमें फसल कटाई के बाद सुविधाएं, लॉजिस्टिक्स, कोल्ड स्टोरेज चेन श्रृंखला और विनिर्माण शामिल हैं. 
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विस्तार किया जाए तो इसमें रोजगार से लेकर व्यापार तक की अपार संभावनाएं हैं. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी खाद्य प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना करके रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं और सूक्ष्म-उद्यमियों के उभरने की संभावनाएं हैं. 
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग किसानों के लिए भी मददगार साबित हो सकता है. खेती करने के बेहतर तरीके भी बता सकता है और उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल सुलभ हो सकते हैं. किसानों को उनकी उपज के सही दाम मिलने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं.
- केंद्र की सरकार मेगा फूड पार्क बनवा रही है. कोल्ड चैन से लेकर एक जिला, एक उत्पाद प्रोडक्ट पर जोर दे रही है.
- मेगा फूड पार्क स्कीम का उद्देश्य किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं और खुदरा विक्रेताओं को एक साथ लाते हुए कृषि उत्पादन को बाजार से जोड़ने के लिए एक तंत्र उपलब्ध कराना है ताकि मूल्यवर्धन को अधिकतम, बर्बादी को न्यूनतम, किसानों की आय में वृद्धि और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करना सुनिश्चित किया जा सके. मेगा फूड पार्क स्कीम 'क्लस्टर' दृष्टिकोण पर आधारित है.
- विभाग की प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिये उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना प्रमुख है.

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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय (MSME) : इस सेक्टर को विकास के इंजन के रूप में जाना जाता है. यह विभाग कम पूंजी निवेश के साथ उद्यमशीलता को बढ़ावा देता है और रोजगार के उल्लेखनीय अवसर सृजित करता है. यह देश के समावेशी औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. MSME घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए कई तरह के उत्पादों का उत्पादन और निर्माण करता है. संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों और स्टेकहोल्डर की मदद से खादी, ग्राम और कॉयर उद्योगों के विकास में भी मदद करता है. 2023-2024 में इस मंत्रालय का बजट 22137.95 करोड़ रुपए था. इस मंत्रालय की जिम्मेदारी जीतनराम मांझी ने संभाली है.
- भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों का बड़ा योगदान है. यही वजह है कि समय-समय इन्हें बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं शुरू की जाती हैं.
- MSME सेक्टर का सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान है. यही वजह है कि इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी भी कहा जाता है. यह सेक्टर ना सिर्फ रोजगार के अवसर पैदा करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में भी इसकी अहम भूमिका है. 31 अगस्त 2021 तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 6.3 करोड़ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग हैं.
- मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में कौन उद्योग किस श्रेणी में आएगा, इसे ऐसे समझ सकते हैं- सूक्ष्म उद्योग वो हैं, जिनमें 1 करोड़ रुपए से कम का निवेश किया गया है और जिनका वार्षिक टर्नओवर 5 करोड़ रुपए से कम है. लघु उद्योग वो हैं, जिनमें 10 करोड़ रुपए से कम का निवेश किया गया है और जिनका टर्नओवर 50 करोड़ रुपए तक है. मध्यम उद्योग वो हैं, जिनमें 50 करोड़ रुपए से कम का निवेश किया गया है और टर्नओवर 250 करोड़ तक है.

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- केंद्र सरकार उद्योग शुरू करने के लिए विभिन्न योजनाएं भी संचालित करता है और ऋण उपलब्ध करवाता है. सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट, क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना, क्रेडिट गारंटी योजना, PMMY के तहत मुद्रा योजना, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) सब्सिडी, प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, प्रधानमंत्री रोजगार योजना, स्टैंडअप इंडिया और स्टार्टअप इंडिया शामिल हैं.
- MSME मंत्रालय विशेषकर कारीगरों और श्रमिकों की भलाई के लिए काम करता है. बैंकों से क्रेडिट लिमिट या आर्थिक सहायता प्रदान करता है. स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग सेंटर के ज़रिए आंत्रप्रेन्योरशिप डिवेलपमेंट यानि नए बिजनेस को बढ़ावा देता है. स्किल अपग्रेडेशन पर काम करता है. टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट और मॉडर्नाइजेशन को सपोर्ट करता है. डोमेस्टिक और एक्सपोर्ट मार्केट तक आसान पहुंच के लिए सहायता प्रदान करता है. मॉडर्न टेस्टिंग फैसिलिटी और क्वालिटी सर्टिफिकेशन प्रदान करता है. पैकेजिंग, प्रोडक्ट डिवेलपमेंट और डिजाइन इंटरवेन्शन को सपोर्ट करता है. मैनपावर ट्रेनिंग, मैनपावर ट्रेनिंग भी दी जाती है.
- MSME वर्तमान में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 30% का योगदान देते हैं, जो आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. वर्तमान में देश में 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है.

पंचायती राज मंत्रालय और मछली पालन, पशुपालन, डेयरी मंत्रालय: इन दोनों मंत्रालयों की जिम्मेदार राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को मिली है. पहले बात पंचायती राज मंत्रालय की करते हैं. पंचायती राज मंत्रालय, पंचायती राज और पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित सभी मामलों को देखता है, इसे मई 2004 में बनाया गया था. यह ग्रामीण स्थानीय निकायों को नागरिक कार्यक्रमों जैसे सड़कों, फुटपाथों, पुलों, जल निकासी सिस्टम, पार्कों, पाइप जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट आदि के रखरखाव और निर्माण के लिए अनुदान मुहैया करता है. भारत की त्रिस्तरीय (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद्) प्रशासनिक संरचना को पंचायती राज प्रणाली के रूप में जाना जाता है, इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर सुधार लाना है. यह समावेशी विकास लक्ष्य प्राप्त करने और जलवायु परिवर्तन एवं ग्रामीण से शहरी प्रवासन जैसे मुद्दों के समाधान के लिये महत्त्वपूर्ण है. 2023-2024 में पंचायती राज मंत्रालय का बजट 1183.64 करोड़ रुपए था.

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वहीं, पशुपालन और डेयरी विभाग का नाम बदलकर पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग कर दिया गया. पहले यह कृषि मंत्रालय के विभागों में शामिल था. यह विभाग पशुधन उत्पादन, संरक्षण, बीमारियों से सुरक्षा, पशुधन में सुधार और डेयरी विकास से संबंधित मामलों के साथ-साथ दिल्ली दुग्ध योजना (डीएमएस) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) से संबंधित मामलों को संभालता है. विभाग पशुपालन और डेयरी विकास के क्षेत्र में नीतियों और कार्यक्रम तैयार करता है और राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह देता है. पशु उत्पादकता में सुधार के लिए राज्यों/ केंद्र शासित क्षेत्रों में अपेक्षित बुनियादी ढांचे का विकास में पहल करता है. पशुधन का संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए भी व्यवस्था करता है. मछली पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का 2023-2024 में 7105.74 करोड़ रुपए का बजट था. 

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- यह मंत्रालय राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण, राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम, पशुधन जनगणना और एकीकृत नमूना सर्वेक्षण, राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम, डेयरी अवसंरचना विकास निधि, पशुपालन अवसंरचना विकास निधि, डेयरी सरकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों को समर्थन जैसी योजनाएं संचालित करता है. 
- पशुधन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का एक महत्वपूर्ण उपक्षेत्र है. यह वर्ष 2014-15 से 2020-21 के दौरान (स्थिर कीमतों पर) 7.93 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है. कुल कृषि और संबद्ध क्षेत्र में पशुधन का योगदान सकल मूल्य वर्द्धन (GVA) (स्थिर कीमतों पर) 24.38 प्रतिशत (वर्ष 2014-15) से बढ़कर 30.87 प्रतिशत (वर्ष 2020-21) हो गया है.
- डेयरी का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5 प्रतिशत योगदान है और 8 करोड़ से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार प्रदान करती है. भारत दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है और वैश्विक दुग्ध उत्पादन में 23 प्रतिशत तक का योगदान देता है. पिछले 8 वर्षों में दूध उत्पादन में 51.05% की वृद्धि हुई है, जो वर्ष 2021-22 में 221.06 मिलियन टन तक पहुंच गया है.
- मत्स्य उत्पादन की बात करें तो विश्व स्तर पर भारत अंडा उत्पादन में तीसरे और मांस उत्पादन में आठवें स्थान पर है. अंडे का उत्पादन वर्ष 2014-15 के 78.48 बिलियन से बढ़कर वर्ष 2021-22 में 129.60 बिलियन हो गया है. मांस का उत्पादन वर्ष 2014-15 के 6.69 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2021-22 में 9.29 मिलियन टन हो गया है.

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नागरिक उड्डयन मंत्रालय: इस मंत्रालय की जिम्मेदारी के राम मोहन नायडू को मिली है. भारत विमानन उद्योग में वैश्विक तौर पर सबसे तेज गति से विकास करने वाला सेक्टर है. इस सेक्ट‍र में तेजी से बदलाव आया है. नागर विमानन उद्योग की मूल शुरुआत 1912 में हुई. उस समय पहली उड़ान कराची-दिल्ली के बीच मिलती थी. इसे यूके की इम्पीहरियल एयरवेज के सहयोग से इंडियन स्टेकट एयर सर्विसेज ने शुरू किया था. स्वतंत्रता के समय 9 विमान परिवहन कंपनियों द्वारा एयर कार्गो और या‍त्री विमान दोनों का संचालन किया जा रहा था. आज भारतीय विमानन उद्योग में निजी एयरलाइनों का प्रभुत्व हो गया है और इनमें कम लागत वाले विमान वाहक शामिल हैं जिनके आने से हवाई यात्रा आसान हो गई है. आज बढ़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ती आय और एयरलाइंस के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है. 2023-2024 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय का बजट 2300 करोड़ रुपए था.
- नागरिक उड्डयन मंत्रालय पर देश में नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी है. यह मंत्रालय स्वायत्त संगठन जैसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी और संबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जैसे एयर इंडिया लिमिटेड, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और पवन हंस हेलीकॉप्टर लिमिटेड पर प्रशासनिक नियंत्रण रखता है. भारत में नागरिक उड्डयन उद्योग आज नई ऊंचाइयों को छू कर रहा है. यह पिछले चार वर्षों के दौरान देश में सबसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में से एक के रूप में उभरा है. भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू नागरिक उड्डयन बाजार है.
- मार्च 2023 में घरेलू हवाई वाहकों ने 13 मिलियन यात्रियों को हवाई सेवा दी. नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार अकेले वित्त वर्ष 2024 में ही भारत में 140 मिलियन से अधिक यात्रियों का भार होगा. भारत को अगले 20 वर्षों में प्रति वर्ष 1.3 बिलियन से अधिक यात्रियों को संभालना है. 

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- वर्तमान में देश में 148 हवाई अड्डे हैं और सीट क्षमता के मामले में यह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू बाजार है. मार्च 2023 तक की स्थिति के अनुसार, 56.8% बाजार हिस्सेदारी के साथ इंडिगो (IndiGo) घरेलू बाजार का अग्रणी हवाई वाहक है. उसके बाद विस्तारा (8.9%) और एयर इंडिया (8.8%) का स्थान है.
- एविएशन सेक्टर को वर्ष 2020-2021 में महामारी के कारण भारी आर्थिक हानि (लगभग 15,000 करोड़ रुपए) उठानी पड़ी. वर्ष 2019-20 में इंडिगो लाभ अर्जित कर रहा एकमात्र एयरलाइन था, जबकि अन्य सभी एयरलाइन घाटे में चल रही थीं जिनमें एयर इंडिया (उस समय राज्य के स्वामित्व में संचालित) 4,600 करोड़ रुपए के घाटे के साथ सबसे आगे था.
-  एयरलाइंस को रनवे और टर्मिनलों जैसी सुविधाओं का उपयोग करने के लिये भी भुगतान करना पड़ता है. व्यावसायिक गतिविधियों में प्रतिस्पर्द्धी बढ़त के लिये टिकटों के कम मूल्य रखना आर्थिक व्यवहार्यता के विरुद्ध जाता है. हवाई अड्डों के निजीकरण ने शुल्क वृद्धि को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. एयरलाइन चालक दल का प्रशिक्षण भी महंगा है. उड़ान प्रशिक्षण संगठनों की कमी के कारण पायलटों की कमी है.

इस्पात और भारी उद्योग मंत्रालय: इन दोनों मंत्रालय की जिम्मेदारी एचडी कुमारस्वामी को मिली है. पहले बात इस्पात मंत्रालय की करते हैं. पिछले कुछ वर्षों में इस्पात क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है. भारत इस्पात उत्पादन में एक वैश्विक ताकत और चीन के बाद विश्व में इस्पात का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बनकर उभरा है. साल 2023 में भारत में इस्पात का कुल उत्पादन (कच्चा इस्पात) 125.32 मिलियन टन और संसाधित इस्पात का उत्पादन 121.29 मिलियन टन रहा है. चूंकि, इस्पात विश्व में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली सामग्रियों में से एक है. लोहा और इस्पात उद्योग अन्य उत्पादक उद्योगों का आधार हैं. 
- इस्पात उद्योग निर्माण, बुनियादी ढांचे, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मुख्य भूमिका निभाता है. भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इस्पात एक प्रमुख क्षेत्र है. वित्तीय वर्ष 21-22 में यह देश की जीडीपी का 2% हिस्सा था. साल 2023-2024 में इस्पात मंत्रालय का 325.66 करोड़ रुपए बजट था.

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- भारत के प्रमुख इस्पात उत्पादक राज्यों में ओडिशा अग्रणी है. उसके बाद झारखंड और छत्तीसगढ़ हैं. कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
- वहीं, भारी उद्योग मंत्रालय की बात करें तो यह सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (CPSE) के लिए नोडल विभाग है. नीति तैयार करता है. भारी उद्योग विनिर्माण क्षेत्र ऑटोमोटिव और पूंजीगत सामान क्षेत्र में विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है. इसमें मोटर वाहन उद्योग, भारी इंजीनियरिंग और मशीन उपकरण, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम, हेवी इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग उद्योग शामिल हैं. साल 2023-2024 में भारी उद्योग मंत्रालय का 6729 करोड़ रुपए बजट था.
- भारी उद्योग मंत्रालय हेवी इंजीनियरिंग और मशीन टूल्स उद्योग, हेवी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग उद्योग और ऑटोमोटिव उद्योग के विकास और 40 केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्रक उद्यमों (सीपीएसई) और उनकी सहायक कंपनियों और चार स्वायत्त निकायों के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालता है.

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