केंद्र की एनडीए सरकार आज लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) पेश करने जा रही है. दोपहर 12 बजे बिल पर बहस शुरू होगी. बीजेपी समेत एनडीए के सभी सहयोगी दलों ने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है. बहस के दौरान लोकसभा में भारी हंगामे के आसार हैं. बिल के खिलाफ विपक्ष लामबंद है. इससे पहले सुबह साढ़े 9 बजे कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में विधेयक के विरोध को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सभी सेक्युलर दलों से बिल का पुरजोर विरोध करने की अपील की है.
वक्फ को लेकर सवाल उठ रहा है कि इससे क्या बदलाव आएगा? इस बिल के समर्थन और विरोध में क्या-क्या दलीलें जा रही हैं और आगे का रास्ता क्या होगा? जानिए 10 बड़े सवालों के जवाब...
1. कब बिल पेश होना है?
दोपहर 12 बजे संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में पेश करने जा रहे हैं. लोकसभा में बिल पर बहस के लिए 8 घंटे का समय तय किया गया है. सत्ता पक्ष यानी एनडीए को 4 घंटे 40 मिनट का वक्त दिया गया है. इसमें बीजेपी के वक्ता 4 घंटे बोलेंगे. इसके बाद वोटिंग कराई जाएगी. ये फैसला मंगलवार को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में हुआ, जिसे विपक्षी नेता बीच में ही छोड़कर चले गए थे. बीजेपी की तरफ बोलने वाले पहले वक्ता जगदंबिका पाल होंगे, जो वक्फ संशोधन बिल पर बनी जेपीसी के अध्यक्ष थे.
2. एनडीए के सहयोगी दलों का क्या रुख?
वक्फ संशोधन बिल को लेकर जेडीयू, टीडीपी और एलजेपी (R) के रुख को लेकर कल तक अटकलें लगती रहीं. लेकिन तीनों दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर बिल का समर्थन करने को कहा है. यानी लोकसभा में नंबर को लेकर सरकार की बड़ी चिंता खत्म हो गई है. इस बिल पर बहस के बाद अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू रात साढ़े 8 बजे अपना जवाब देंगे और इसी जवाब के बाद इस बिल पर वोटिंग कराई जाएगी.
3. विपक्ष की क्या मांग?
विपक्षी नेताओं की मांग है कि इस बिल पर लोकसभा में 12 घंटे बहस होनी चाहिए और सभी सदस्यों को अपनी राय देने के लिए ज्यादा से ज्यादा समय मिलना चाहिए लेकिन कमेटी ने इस मांग को नहीं माना और कुल 8 घंटे बहस पर सहमति बनी. दरअसल, कमेटी का कहना था कि कुछ सदस्य बहस के लिए 4 से 5 घंटे देने की मांग कर रहे हैं. इसलिए दोनों पक्षों को सुनने के बाद बहस के लिए आठ घंटे का समय देना सही होगा.
4. सभी पार्टियों ने जारी कर दिया व्हिप
इस फैसले के बाद बीजेपी, जेडीयू, टीडीपी और कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत सभी राजनीतिक दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है. इसका मतलब ये है कि इन पार्टियों ने अपने सभी सांसदों को वोटिंग के दौरान लोकसभा में उपस्थित रहने का आदेश दिया है और जो सांसद ऐसा नहीं करेगा, उसके खिलाफ उसकी पार्टी ऐक्शन ले सकती है.
5. बिल पर क्या विवाद?
केंद्र सरकार का कहना है कि वक्फ संशोधन विधेयक का उद्देश्य देश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में सुधार करना है. वक्फ अधिनियम 1995 मुसलमानों द्वारा दान की गई संपत्तियों के प्रबंधन को नियंत्रित करता है. वक्फ विधेयक पर विपक्ष की ओर से आवाज उठा रहे AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना है. मुस्लिम संगठनों का दावा है कि नए संशोधन के पारित हो जाने के बाद कलेक्टर राज अस्तित्व में आ जाएगा और वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला आखिरी नहीं होगा कि कौन सी संपत्ति वक्फ है और कौन सी नहीं. ओनरशिप के संबंध में कलेक्टर का फैसला आखिरी होगा.
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मुस्लिम संगठनों का कहना है कि अब तक यह अधिकार वक्फ ट्रिब्यूनल के पास है. वक्फ एक्ट में प्रस्तावित संशोधन संविधान द्वारा दी गई मजहबी आजादी के भी खिलाफ है और संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 25 का उल्लंघन है. हालांकि, सरकार का कहना है कि विपक्ष की तरफ से भ्रम फैलाया जा रहा है. अगर बिल का विरोध करना है तो तर्क होने चाहिए. अभी सिर्फ गुमराह किया जा रहा है. ये भी बताना चाहिए कि इसमें क्या गैरसंवैधानिक है. झूठ बात फैलाने से काम नहीं चलेगा.
6. कब संशोधन बिल आया?
वक्फ विधेयक में संशोधन के लिए पिछले साल अगस्त में संसद में बिल पेश किया गया. हालांकि, विपक्ष और विभिन्न मुस्लिम संगठनों के विरोध के बीच विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया था. कई सप्ताह तक चर्चा चली और तीखी बहस भी हुई. जेपीसी ने विधेयक में 14 संशोधनों को मंजूरी दी. विपक्षी सांसदों द्वारा प्रस्तावित 44 संशोधनों को जगदंबिका पाल के नेतृत्व वाली कमेटी ने खारिज कर दिया था. इस विधेयक को अंततः फरवरी में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दे दी गई.
7. बिल पर विपक्ष का क्या स्टैंड?
विपक्षी दल वक्फ संशोधन विधेयक पर लगातार सवाल उठा रहे हैं और इसे असंवैधानिक और मुसलमानों के प्रति भेदभावपूर्ण बता रहे हैं. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बीजेपी के सहयोगी दलों से इस बिल के खिलाफ वोट करने की अपील की है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ सभी विपक्षी दल एकजुट हैं. विधेयक के पीछे सरकार का एजेंडा विभाजनकारी है और इसे हराने के लिए वे संसद में मिलकर काम करेंगे.
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8. लोकसभा और राज्यसभा में क्या है नंबरगेम?
लोकसभा में NDA के 293 सांसद हैं. इंडिया गठबंधन के पास 235 सांसद हैं. अन्य को भी जोड़ दें तो ये संख्या 249 तक ही जाती है. जबकि बहुमत का नंबर 272 है. विपक्ष को लगता रहा कि अगर 16 सांसद वाली टीडीपी और 12 सांसद वाली जेडीयू वक्फ बिल का विरोध कर दें तो गेम पलट सकता है, क्योंकि तब NDA का नंबर घटकर 265 हो जाएगा और बिल के विरोध में नंबर 277 पहुंच जाएगा. लेकिन टीडीपी हो या जेडीयू दोनों मजबूती से सरकार के साथ हैं. यानी लोकसभा से वक्फ संशोधन बिल पास होने का रास्ता साफ है.
राज्यसभा में भी एनडीए के पास बहुमत
राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं. एनडीए के पास 125 सांसद हैं. इनसे 98 सांसद बीजेपी के हैं. 9 सीटें खाली हैं. ऐसे में एनडीए को विधेयक पारित कराने के लिए 118 सांसदों के समर्थन की जरूरत है. यानी एनडीए के पास राज्यसभा में संख्याबल ज्यादा है. विपक्षी दलों के पास राज्यसभा में 85 सांसद हैं. कांग्रेस के सिर्फ 27 सांसद हैं और 30 सांसद ऐसे हैं, जो दोनों में से किसी भी गठबंधन से नहीं हैं.
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9. आगे क्या होगा?
लोकसभा में पारित होने के बाद वक्फ संशोधन विधेयक को राज्यसभा के पटल पर रखा जाएगा. 3 अप्रैल को ये बिल राज्यसभा में पेश होगा और वहां भी 8 घंटे की बहस के बाद इस पर वोटिंग कराई जाएगी. अगर राज्यसभा में भी ये बिल पास हो गया तो इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और अगले एक हफ्ते से चार हफ्तों में ये बिल देश में वक्फ की सम्पत्तियों के लिए लागू हो जाएगा.
10. बिल पारित होने से क्या बदलाव आएगा?
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