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राज्यसभा में बहुमत से मोदी सरकार के किन बड़े बिलों की आसान हुई राह?

जो सदस्य राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, उनमें असम से बीजेपी से मिशन रंजन दास और रामेश्वर तेली, बिहार से मनन कुमार मिश्रा, हरियाणा से किरण चौधरी, मध्य प्रदेश से केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन, महाराष्ट्र से धैर्यशील पाटिल, ओडिशा से ममता मोहंता, राजस्थान से रवनीत सिंह बिट्टू और त्रिपुरा से राजीव भट्टाचार्य का नाम शामिल है.

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राज्यसभा में बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा छू लिया है.
राज्यसभा में बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा छू लिया है.

राज्यसभा में भी बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA ने बहुमत का आंकड़ा छू लिया है. 9 राज्यों की 12 सीटों पर उपचुनाव में सभी राज्यसभा उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं. एनडीए ने 11 और कांग्रेस ने एक सीट पर कब्जा किया है. बीजेपी के 9, एनसीपी (अजित पवार) का एक, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (उपेंद्र कुशवाहा) का एक और कांग्रेस का एक सदस्य निर्वाचित हुआ है. इसके साथ ही NDA को राज्यसभा में अहम विधेयकों को पारित कराने के लिए दूसरी पार्टियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. एनडीए को राज्यसभा में स्पष्ट बहुमत मिलने से सरकार को वक्फ (संशोधन) विधेयक जैसे प्रमुख कानूनों पर मुहर लगवाने में सफलता मिल जाएगी.

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NDA ने पहली बार राज्यसभा में बहुमत हासिल किया है. 245 सदस्यों की राज्यसभा में अभी आठ सीटें और खाली हैं. इनमें चार जम्मू-कश्मीर से और चार मनोनीत सदस्यों से भरी जानी है. सदन की मौजूदा सदस्य संख्या 237 है और बहुमत का आंकड़ा 119 है. फिलहाल, राज्यसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कुल 112 सदस्य हो गए हैं. छह मनोनीत सदस्यों और एक निर्दलीय सदस्य के समर्थन के साथ यह आंकड़ा 119 तक पहुंच गया है. यानी एनडीए ने बहुमत के आंकड़े को छू लिया है. 

बीजेपी के सदस्यों की संख्या हुई 96

बीजेपी के सदस्यों की संख्या 96 हो गई है. वहीं, कांग्रेस के सदस्यों की संख्या बढ़कर अब 27 हो गई है. उसके सहयोगियों के पास 58 और सदस्य हैं, जिससे विपक्षी गठबंधन की संख्या 85 हो जाती है. 11 सदस्यों वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और आठ सदस्यों वाली बीजेडी किसी अलायंस का हिस्सा नहीं है. चुने गए निवर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 2028 तक होगा.

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कौन-कौन राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुआ

जो सदस्य राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, उनमें असम से बीजेपी से मिशन रंजन दास और रामेश्वर तेली, बिहार से मनन कुमार मिश्रा, हरियाणा से किरण चौधरी, मध्य प्रदेश से केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन, महाराष्ट्र से धैर्यशील पाटिल, ओडिशा से ममता मोहंता, राजस्थान से रवनीत सिंह बिट्टू और त्रिपुरा से राजीव भट्टाचार्य का नाम शामिल है. एनसीपी के अजित पवार गुट के नितिन पाटिल और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा बिहार से निर्विरोध चुने गए. तेलंगाना से कांग्रेस नेता और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए. 

अब उच्च सदन में दूसरे दलों पर निर्भरता हो गई खत्म

राज्यसभा में बहुमत हासिल करने के लिए एनडीए एक दशक से लगातार प्रयास कर रहा है, ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए बीजू जनता दल (बीजेडी), वाईएसआर कांग्रेस, भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और एआईएडीएमके जैसी पार्टियों पर निर्भरता खत्म हो जाए. दरअसल, पिछले कुछ सालों से उच्च सदन में विपक्ष का बोलबाला देखने को मिल रहा था. विपक्ष की बड़ी संख्या अक्सर विवादास्पद सरकारी विधेयकों को पारित करवाने से रोके रखती थी. सरकार ने कई विधेयकों को नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी और वाईएस जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस की मदद से पारित करवाया है. हालांकि, अब राजनीतिक हालात बदल गए हैं. ओडिशा में बीजेडी और आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसीपी सत्ता से बाहर हो गई है. दोनों ही राज्यों में बीजेपी और एनडीए की सरकार है. ऐसे में दोनों ही दलों के सदन में समर्थन को लेकर संशय बना हुआ है.

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इसके साथ ही कांग्रेस के लिए अच्छी खबर यह है कि वो राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद बरकरार रखेगी. राज्यसभा में विपक्ष के नेता के लिए 25 सदस्यों की जरूरत होती है. कांग्रेस के पास बहुमत से दो ज्यादा सदस्य हो गए हैं.

NDA को राज्यसभा में भी आसान हो गया बिल पारित करवाना

बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी स्पष्ट बहुमत हासिल होने से पार्टी नेता गदगद हैं. राज्यसभा में स्पष्ट बहुमत मिलने से एनडीए सरकार को वक्फ (संशोधन) विधेयक जैसे प्रमुख कानूनों पर मुहर लगवाने में सफलता मिल जाएगी. हाल ही में बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में तेल क्षेत्र (विनियमन और विकास) संशोधन विधेयक, 2024 और बॉयलर्स विधेयक, 2024 पेश किया गया था. इन दोनों विधेयकों पर अभी उच्च सदन से मुहर लगना बाकी है. इस बजट सत्र में राज्यसभा ने जम्मू और कश्मीर विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2024, विनियोग (संख्या 2) विधेयक, 2024 और वित्त (सं.2) विधेयक, 2024 विधेयक पर मुहर लगाई है. जबकि वक्फ संपत्तियां (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली), विधेयक, 2014 को राज्य सभा से वापस लिया गया है. उच्च सदन में बहुमत हासिल होने के बाद एनडीए सरकार को विधेयक पारित करवाने में अड़चन का सामना नहीं करना पड़ेगा. 

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राज्यसभा में बीजेपी के कौन-कौन सहयोगी दल?

बजट सत्र में सरकार ने लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक समेत 12 नए विधेयक पेश किए. इनमें चार बिल वित्त विधेयक, 2024, विनियोग विधेयक, 2024, जम्मू और कश्मीर विनियोग विधेयक, 2024 और भारतीय वायुयान विधेयक, 2024 पारित हुए हैं. राज्यसभा में बीजेपी के सहयोगियों में अन्नाद्रमुक, जद(यू), जद (एस), आरपीआई(ए), शिवसेना, राकांपा, रालोद, एनपीपी, पीएमके, तमिल मनीला कांग्रेस, यूपीपीएल शामिल हैं.

क्यों राज्यसभा की सीटें खाली हुई थीं?

असम में कामाख्या प्रसाद ताशा और सर्वानंद सोनोवाल, बिहार में मीसा भारती और विवेक ठाकुर, हरियाणा के दीपेंद्र हुड्डा, मध्य प्रदेश के ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया, महाराष्ट्र से छत्रपति उदयन राजे भोसले, पीयूष वेद प्रकाश गोयल, राजस्थान से केसी वेणुगोपाल और त्रिपुरा से बिप्लब देव के इस्तीफे के बाद 10 सीटें खाली हुई थीं. इन सभी सदस्यों ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है. वहीं, तेलंगाना के केशवराव और ओडिशा की ममता मोहंता ने इस्तीफे दिया, जिसके बाद इन खाली हुईं सीटों पर चुनाव हुए हैं.

राज्यसभा में किसे कितना नुकसान?

राज्यसभा के उपचुनाव से पहले बीजेपी का असम-महाराष्ट्र में दो-दो, मध्य प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा में एक-एक सीट पर कब्जा था. उपचुनाव में बीजेपी को चार सीटों का फायदा पहुंचा है. हरियाणा-राजस्थान में कांग्रेस का एक-एक और बिहार में आरजेडी का एक सीट पर कब्जा था. कांग्रेस और आरजेडी को एक-एक सीट का नुकसान हुआ है. कांग्रेस ने एक सीट तेलंगाना में जीत ली है. इसी तरह, तेलंगाना में बीआरएस का एक और ओडिशा में बीजेडी का एक सीट पर राज्यसभा सांसद था. तेलंगाना में के. केशवराज बीआरएस छोड़कर जुलाई में कांग्रेस में शामिल हो गए थे. जबकि ओडिशा की ममता मोहंता बीते माह ही बीजेडी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुईं हैं.

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राज्यसभा में अभी किस पार्टी के कितने सदस्य? 

राज्यसभा में 250 सदस्य होते हैं. इनमें से 238 सदस्य चुने जाते हैं. बाकी 12 सदस्यों को राष्ट्रपति नॉमिनेट करते हैं. किस राज्य से कितने राज्यसभा सदस्य होंगे, ये वहां की आबादी के आधार पर तय होता है. वर्तमान में राज्यसभा में बीजेपी के 96, जेडीयू के 4, एनसीपी के 3, जेडीएस का एक, आरएलडी का एक, आरपीआई का एक, शिवसेना का एक और राष्ट्रीय लोक मोर्चा का एक सदस्य है. विपक्ष में कांग्रेस के 27, टीएमसी के 13, आम आदमी पार्टी के 10, डीएमके 10, आरजेडी के 5, वाम मोर्चा के 6, समाजवादी पार्टी के 4, जेएमएम के 3, मुस्लिम लीग के 2, शरद पवार गुट के 2, उद्धव ठाकरे गुट के 2, केरल कांग्रेस(M) का एक, MDMK का एक सदस्य हैं. वहीं, बीजेडी के 8, AIDMK के 4, बीआरएस के 4, YSRCP के 11, असम गाना परिषद का एक, बसपा का एक, मिजो नेशनल फ्रंट का एक, एनपीपी का एक, पीएमके का एक, TMC (M) का एक, UPP (L) का एक सदस्य है. नॉमिनेट की संख्या 6 है. निर्दलीय और अन्य की संख्या 3 है.

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