बिहार में चाचा बनाम भतीजे की लड़ाई शुरू हो गई है. चिराग के चाचा पशुपति पारस ने लोकसभा की सीट नहीं मिलने पर केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने फिलहाल इसका ऐलान नहीं किया कि वह एनडीए का हिस्सा रहेंगे या नहीं लेकिन उन्हें विपक्षी गठबंधन की तरफ से ऑफर मिल रहे हैं. आइए जानते हैं कि आखिर कौन हैं पशुपति कुमार पारस और क्या है चाचा-भतीजे की लड़ाई?
राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस केंद्र में फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज विभाग के मंत्री थे. हालांकि, उनकी पार्टी को एनडीए गठबंधन में लोकसभा की सीट से महरूम रहना पड़ा. इसके एक दिन बाद उन्होंने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने इस्तीफे का ऐलान किया.
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पशुपति पारस ने कहा, "एनडीए गठबंधन ने कल बिहार लोकसभा के लिए 40 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की. हमारी पार्टी के पांच सांसद थे. मैंने पूरी ईमानदारी से काम किया. हमारे और संबंधित पार्टी के साथ अन्याय हुआ है. मैं केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा देता हूं."
हाजीपुर सीट को लेकर चाचा-भतीजा उलझे
चाचा और भतीजे की लड़ाई हाजीपुर सीट को लेकर है, जहां से चिराग पासवान के पिता रामविलास पासवान ने लंबी राजनीतिक पारी खेली. अब इस सीट की अगुवाई चिराग पासवान करना चाहते हैं लेकिन चाचा इसके लिए तैयार नहीं थे. दोनों चाचा-भतीजा इस सीट को लेकर लंबे समय से उलझे हुए थे.
2019 में पारस ने लोजपा का कर दिया बंटवारा
गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अविभाजित लोक जनशक्ति पार्टी ने छह सीटें जीती थी. हालांकि, पशुपति पारस बीजेपी के साथ मिल गए और पार्टी को दो हिस्सों में बांट दिया. केंद्र में मंत्री बन गए. अब इसका उल्टा ये हुआ कि बीजेपी ने इस बार गेम पलट दिया और चिराग पासवान को एनडीए में जगह दे दी.
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HAM-RLM को मिली एक-एक सीट
कहा जा रहा है कि, पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व वाले एलजेपी गुट के साथ सीट बंटवारे पर बीजेपी ने कोई चर्चा नहीं की. बिहार बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने बताया, ''उनसे (पारस से) बातचीत जारी है.'' सीट शेयरिंग पर बातचीत फाइनल होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) एक-एक सीट पर चुनाव लड़ेंगी.
कौन हैं पशुपति कुमार पारस?
पशुपारस कुमार पारस, रामविलास पासवान के छोटे भाई हैं. वह वर्तमान में हाजीपुर के सांसद हैं. उन्हें तब प्रसिद्धि मिली जब रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद पार्टी प्रमुख पद को लेकर चिराग के साथ उनका झगड़ा सामने आया. अपनी पार्टी में विभाजन की योजना बनाते हुए, पारस के राजनीतिक पैंतरेबाजी ने चिराग को अलग-थलग कर दिया था.
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विशेष रूप से, पारस ने बिहार सरकार में पशु और मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री का पद संभाला था. वह पहले लोक जनशक्ति पार्टी की बिहार इकाई के प्रदेश अध्यक्ष भी थे और जून 2021 में चिराग पासवान की जगह लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुने गए थे. उन्होंने रामविलास पासवान के निधन के बाद 2021 से राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभाला और उसके बाद एलजेपी में विभाजन हो गया.