जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से आतंक की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. 9 जून को रियासी में हुए हमले के बाद 11 और 12 जून की मध्य रात्रि को दो और आतंकी हमले हुए हैं. पहला हमला कठुआ जिले के हीरानगर स्थित सैदा सुखल गांव में हुआ है.
वहीं दूसरा हमला कल देर रात डोडा के छत्रकला में अस्थाई ऑपरेटिंग बेस पर हुआ. इस हमले में सेना के पांच जवान घायल बताए जा रहे हैं. घायलों में एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) भी शामिल हैं. सुरक्षाबलों की तरफ से आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी है. सुरक्षाबलों की जवाब कार्रवाई में दो आतंकी भी मारे गए हैं और सर्च ऑपरेशन फिलहाल जारी है. कश्मीर टाइगर नाम के आतंकी ग्रुप ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है.
जैश का ही शैडो ग्रुप है कश्मीर टाइगर्स
दरअसल पिछले कुछ सालों से कश्मीर में जैश और लश्कर जैसे आतंकी संगठनों ने अपने उप समूह बना लिए हैं और कश्मीर टाइगर भी जैश-ए-मोहम्मद की ही शाखा है. कुछ समय पहले दक्षिण कश्मीर में एक ग्रेनेड अटैक हुआ था उसकी जिम्मेदारी भी कश्मीर टाइगर्स ने ही ली थी.
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इस संगठन के आतंकियों ने साउथ कश्मीर के घने जंगलों में अपना ठिकाना बना लिया. ये दहशतगर्द कुछ महीने पहले पाकिस्तान से दाखिल होकर जम्मू की पहाड़ियों में छिपकर अपनी गतिविधियां चला रहे थे. अब सुरक्षा एजेंसियां कदम कदम पर इनकी तलाश कर रही हैं.
कौन है टीआरएफ
पाकिस्तान समर्थित जिहादी आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा की शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) का अस्तित्व धारा 370 हटाने के बाद आया. ये संगठन भी ऑनलाइन शुरू हुआ था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, छह महीने केवल ऑनलाइन एक्टिविटी के बाद संगठन कई दूसरे बड़े आतंकी गुटों के साथ मिला हुआ दिखा. वैसे ये जैश-ए-मोहम्मद का प्रॉक्सी है.
द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में तीर्थयात्रियों को ले जा रही बस पर हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी. बस हमले में 10 पर्यटकों की मौत हो गई और 33 अन्य घायल हो गए. एक संदेश में, टीआरएफ ने पर्यटकों और गैर-स्थानीय लोगों पर इस तरह के और हमलों की चेतावनी दी थी. लश्कर की शाखा ने रियासी हमले को "नए सिरे से शुरू होने" की शुरुआत भी कहा. टीआरएफ को भारत सरकार द्वारा 2023 में आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया है.
पीपल्स अगेंस्ट फासिस्ट फोर्सेस भी लश्कर का ही शाखा
इसके अलावा लश्कर का ही एक और संगठन है जिसका नाम पीपल्स अगेंस्ट फासिस्ट फोर्सेस है. इसके आतंकियों ने भी कुछ समय में कश्मीर में बड़ी वारदातों को अंजाम देने की कोशिश की है.सुरक्षाबलों का मानना है कि हाल के दिनों में आतंकियों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है और इसी बदलाव के तहत नए छद्म संगठनों के नाम भी रखे गए हैं.
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बता दें कि रियासी के शिवखोड़ी की बस में हुए हमले की जांच में एजेंसियों और NIA ने अभी तक जो सुराग जुटाए हैं उसके आधार पर कहा जा सकता है कि विदेशी आतंकियों के साथ-साथ लोकल ओवर ग्राउंड वर्कर भी इस हमले में शामिल हैं. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक TRF का ऑफशूट हिट स्क्वाड जो फॉल्कन स्क्वाड के नाम से जाना जाता है, वो ऐसे हमलों को अंजाम दे रहा है. आतंकियों के इस गिरोह में विदेशी दहशतगर्द भी शामिल हैं.
इसकी स्थापना 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे के बाद की गई थी. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से यह दर्जनों आतंकवादी हमलों में शामिल रहा है.