आगामी लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 195 उम्मीदवारों का ऐलान तो किया है लेकिन दो उम्मीदवारों ने अपना टिकट लौटा दिया. पवन सिंह को पश्चिम बंगाल के आसनसोल से टिकट दिया गया था लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. इनके अलावा सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद उपेंद्र सिंह रावत ने अपना टिकट लौटा दिया. आइए आपको बताते हैं कि आखिर कौन हैं उपेंद्र रावत?
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में 17 जनवरी 1969 में एक मध्यम वर्गीय परिवार में उपेंद्र रावत का जन्म हुआ. रामनगर ब्लॉक के शेखपुर अलीपुर के पास बहावपुर बरवा गांव के निवासी हैं. इनके पिता सरकारी मास्टर थे. माता का देहांत बचपन में ही हो गया था. उपेंद्र के पिता रिटायर होने के बाद साई संत की कुटिया चित्तपुरवा गांव में साधु का जीवन बसर करने लगे. वहीं उपेंद्र रावत ने भी अपने पिता से संबंध नहीं रखा. इकलौते होने के नाते वह अपनी मर्जी से काम करते थे.
ये भी पढ़ें: पवन सिंह के बाद अब बाराबंकी से उपेंद्र रावत ने लौटाया BJP का टिकट, वायरल वीडियो के बाद निशाने पर थे
परिजात संस्था के साथ शुरू किया काम
उपेंद्र रावत ने अपनी जवानी के दिनों में पूर्व एमएलए राम नरेश रावत की परिजात संस्था के साथ जुड़ गए. उपेंद्र प्रेस कार्यालयों में संस्था के कार्यों की प्रेस नोट देने और संस्था में आए हुए लोगों की आव-भगत और सामाजिक कार्यों की जिम्मेदारी निभाते थे.
इसके बाद उपेंद्र रावत शहर के नामी गिरामी और पूर्व एमएलसी शिवकरण सिंह के यहां नौकरी की और विधायक की खबरों को लेकर प्रेस कार्यालय में पहुंचने का काम साइकिल से करते थे. सांसद बनने के बाद आज भी इनके घर में ही रहते हैं.
उपेंद्र रावत का राजनीतिक जीवन
उपेंद्र रावत 2014 में बाराबंकी से बीजेपी सांसद बनी प्रियंका रावत के साथ जुड़ गए और इनके घर पर रह कर सांसद प्रियंका रावत के कार्यालय पर काम देखने लगे. 2017 में विधानसभा चुनाव में उन्हें जैदपुर से टिकट मिला, जिसमें उपेंद्र रावत भारी वोटों से विजयी हुए. 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें लोकसभा का टिकट मिला, जिसका प्रियंका रावत और उनके सहयोगियों ने काफी विरोध किया था.
ये भी पढ़ें: विदेशी महिला संग बाराबंकी से बीजेपी प्रत्याशी का फेक वीडियो वायरल, सांसद प्रतिनिधि ने पुलिस में दी तहरीर
कैसे सांसद बने उपेंद्र रावत?
उपेंद्र रावत का नसीब बुलंद था. 2019 में एक लाख वोटों से समाजवादी पार्टी के वरिष्ट नेता राम सागर रावत को हराया. चुनाव तो उपेंद्र जीत गए लेकिन जनता में अपनी छाप नहीं छोड़ पाए. 5 साल तक कुछ न कुछ विवादों में बने रहे. कभी सिंचाई विभाग के सहायक इंजीनियर संजय गुप्ता के साथ गाली गलौच का मामला हो या गेहूं तोल केंद्र पर एसएमआई दीपक तोमर को धमकाने के साथ कई विभाग के अधिकारियों को धमकाने का आरोप हो.
वीडियो मामले में निर्दोष साबित होने पर लड़ेंगे चुनाव!
सोशल मीडिया पर एक अश्लील वीडियो वायरल होने के बाद उपेंद्र रावत चर्चा में आ गए. हालांकि, उन्होंने वीडियो को फर्जी बताया है और एफआईआर भी दर्ज करवाई है. वीडियो विवाद के बाद रावत ने अपना टिकट लौटा दिया है लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. उन्हें यह भी ऐलान करना पड़ा, जबतक कथित अश्लील वीडियो की जांच में निर्दोष साबित नही हो जाऊंगा तब तक चुनाव नही लडूंगा.
उपेंद्र रावत ने किया एमए-एलएलबी
उपेंद्र सिंह रावत ने समाजशास्त्र में एमए किया है. उन्होंने एलएलबी की भी पढ़ाई की है. वह 2019 में सांसद चुने गए. उन्होंने 535,917 वोट और 46.37% वोट शेयर हासिल किया था. उन्होंने सपा के राम सागर रावत को 425777 वोटों से हराया और 36.84% वोट शेयर मिले थे. 2017-19 के बीच वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सलाहकार समिति के सदस्य रहे. उनके पास 1.8 करोड़ रुपये की संपत्ति है और एक आपराधिक मामले उनपर दर्ज हैं.