इस साल की शुरुआत में राजस्थान- कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों पार्टियां जल्दी कैंडीडेट्स अनाउंसमेंट की बात कर रही थीं. लेकिन सितंबर बीतने को है और जब चुनाव को कुछ ही दिन बचे हैं टिकट बंटवारा होना अभी बाकी है.
कुछ ही दिन पहले कांग्रेस से ख़बर आई थी कि पार्टी अपने एन्टी इनकम्बेंसी के फैक्टर से निपटने के लिए 80 विधायकों के टिकट काट सकती है. लेकिन क्या इस कदम से असंतोष नहीं होगा. ये भी देरी का एक कारण हो सकता है. कुछ यही हाल बीजेपी का भी है. भाजपा भी यहां सीपी जोशी से लेकर वसुंधरा राजे तक के खेमे में बंटी हुई है. टिकट बंटवारे में ये देरी कितना नुकसान पहुंचाएगी इन पार्टियों को ये तो सामने आने में अभी वक्त है लेकिन कारण क्या है इस देरी का और इसके नुकसान क्या होंगे? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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कांग्रेस एक तरफ गठबंधन करके 2024 की राह आसान करने की कोशिश में है लेकिन यही गठबंधन हरियाणा में उसकी मुसीबत बन गया है. दरअसल हरियाणा में आम आदमी पार्टी (AAP) के बाद इंडियन नेशनल लोकदल के इंडिया अलायंस में एंट्री की बात चल रही है. लेकिन पूर्व CM और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा भड़क गए हैं. और ये भी कहा जा रहा है कि हुड्डा ने इसे लेकर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने नाराजगी भी जताई है. और ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि बीते कुछ दिनों से पूर्व सीएम अपने बेटे और राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. हालांकि अभी सीधे तौर पर तो हुड्डा की तरफ से कोई बयान नहीं आया है लेकिन ये बात वो जरूर कह रहे हैं कि उनके राज्य में कांग्रेस अकेले ही जीत सकती है, उन्हें किसी से भी गठबंधन की जरूरत नहीं है. क्या है हुड्डा की इस नाराजगी की वजह और इंडियन नेशनल लोकदल से गठबंधन करने की संभावना उन्हें क्यों परेशान कर रही है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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कनाडा- भारत के बीच पिछले तीन दिन से चल रही गरमागर्मी के बीच एक और खबर कल आई. वो ये कि 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन मुख्य अतिथि हो सकते हैं. अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने कल इसकी जानकारी दी है. उनका कहना था कि जी20 शिखर समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को इसका न्योता दिया है. एरिक गार्सेटी के भारत में अमेरिकी राजदूत बन के आने की कहानी भी चर्चा में रही थी. क्योंकि बाइडेन के आने के लगभग दो साल तक भारत में कोई अमेरिकी राजदूत था ही नहीं. पिछले साल बाइडेन ने एरिक गार्सेटी को नियुक्त किया.
रूस के साथ भारत के अच्छे संबंध की वजह से अमेरिका भारत के संबंध बोझिल हुए हैं, ऐसा कई अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना था. लेकिन ये न्योता और उस पर अगर व्हाइट हाउस से सकारात्मक प्रतिक्रिया आती है तो अंतर्राष्ट्रीय गलियारों में ये नया समीकरण बना सकता है. क्या है इस न्योते के मायने और बाइडेन का भारत को लेकर अब तक जो अप्रोच रहा है, उसके लिए ये कितनी अहमियत रखता है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.