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CBI raid at Manish Sisodia: एक्साइज पॉलिसी पर कैसे घिरे मनीष सिसोदिया? CBI क्यों कर रही है जांच

Manish Sisodia CBI Raid: दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई टीम पहुंची है. एक्साइज पॉलिसी के तहत वित्तीय गड़बड़ियां करने के आरोप में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी. एलजी ने जांच की सिफारिश मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर की थी. इस मामले में शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने का आरोप है.

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सीबीआई रेड पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि कुछ नहीं निकलेगा. (फाइल फोटो-PTI)
सीबीआई रेड पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि कुछ नहीं निकलेगा. (फाइल फोटो-PTI)

Manish Sisodia CBI Raid: एक्साइज पॉलिसी को लेकर दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की मुश्किलें अब बढ़ने लगीं हैं. शुक्रवार सुबह मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई की टीम पहुंच गई. उनके घर के अलावा दिल्ली-एनसीआर में 20 और जगहों पर सीबीआई की टीम तलाशी ले रही है. एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी को लेकर उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी.

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सीबीआई की छापेमारी पर मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा कि वो जांच में पूरा सहयोग देंगे ताकि सच जल्द सामने आ सके. उन्होंने कहा कि अभी तक मुझ पर कई केस किए गए, लेकिन कुछ नहीं निकला और इसमें भी कुछ नहीं निकलेगा. 

मनीष सिसोदिया के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश एलजी वीके सक्सेना ने मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर की थी. मनीष सिसोदिया पर नई एक्साइज ड्यूटी में गड़बड़ी करने का आरोप है. एक्साइज डिपार्टमेंट का प्रभार मनीष सिसोदिया के पास ही है. 

मुख्य सचिव ने दो महीने पहले अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. इस रिपोर्ट में GNCTD एक्ट 1991, ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993, दिल्ली एक्साइज एक्ट 2009 और दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 के नियमों का उल्लंघन पाया गया था.

सीबीआई जांच में कैसे घिरे सिसोदिया?

- इस रिपोर्ट के आधार पर एलजी ने पाया कि एक्साइज डिपार्टमेंट के प्रभारी होने के नाते मनीष सिसोदिया ने ऐसे फैसले लिए, जिससे वित्तीय गड़बड़ियां हुईं. उन पर एक्साइज पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है.

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- मुख्य सचिव की रिपोर्ट में कहा गया था कि सिसोदिया ने कथित तौर पर टेंडर दिए जाने के बाद भी शराब लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ.

- इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मनीष सिसोदिया के आदेश पर एक्साइज पॉलिसी के जरिए कोरोना के बहाने शराब ठेकेदारों के 144.36 करोड़ रुपये माफ किए गए. इससे शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचा. 

सिसोदिया पर कौन-कौन से आरोप?

- टेंडर के लिए अप्लाई करने वाले शराब कारोबारियों को एकमुश्त 144.36 करोड़ रुपये की छूट दी.

- एयरपोर्ट पर शराब ठेकेदारों के लाइसेंस जब्त करने की बजाय उन्हें 30 करोड़ रुपये की छूट दी.

- विदेश से आने वाली बीयर की कीमतें कम कीं.

ये सब कैसे हुआ?

- शराब कारोबारियों को लाइसेंस फीस में 144.36 करोड़ रुपये की छूट दी और इसके लिए कोरोना का बहाना बनाया गया. एलजी का कहना है कि इससे कमीशन मिला होगा.

- आरोप है कि जब शराब कारोबारियों को एकमुश्त छूट दी गई, तो उस दौरान कैबिनेट को लूप में नहीं रखा गया. सिसोदिया ने तब कैबिनेट से कहा था कि वो शराब नीति में बदलाव के लिए उन्हें ऑथराइज करे, ताकि लाइसेंस फीस में छूट के फैसले को लागू किया जा सके.

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- ऐसा भी आरोप लगा है कि 14 जुलाई को दोपहर 2 बजे कैबिनेट मीटिंग के लिए मुख्य सचिव को सुबह 9:30 बजे कैबिनेट नोट भेजा गया था. जबकि, ये नोट 48 घंटे पहले एलजी को भेजा जाना चाहिए था, लेकिन ये एलजी ऑफिस में शाम 5 बजे पहुंचा. 

- आरोप है कि ये सब अवैध फैसलों को वैध बनाने की कोशिश थी. इससे पता चलता है कि एक्साइज डिपार्टमेंट के फैसले मंत्री के स्तर पर लिए गए. जबकि कैबिनेट और एलजी से इसकी मंजूरी ली नहीं गई.

और क्या-क्या आरोप हैं?

- सिसोदिया के निर्देश पर एक्साइज डिपार्टमेंट ने एयरपोर्ट जोन में L1 लाइसेंसधारी को 30 करोड़ रुपये वापस कर दिए थे, क्योंकि उसे एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से दुकान खोलने की अनुमति नहीं मिली थी. जबकि, ये रकम जब्त की जानी थी.

- इसके अलावा विदेशों से आने वाली बीयर पर 50 रुपये प्रति केस के हिसाब से रकम ली जाती थी. इस फैसले को भी बिना किसी मंजूरी के वापस ले लिया गया. इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा.

- इतना ही नहीं, आरोप ये भी हैं कि L7Z और L1 लाइसेंसधारियों का लाइसेंस पहले 1 अप्रैस से 31 मई और फिर 1 जून से 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया और इसके लिए एलजी की मंजूरी भी नहीं ली गई.

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क्या है दिल्ली की एक्साइज पॉलिसी?

- 17 नवंबर 2021 को दिल्ली में नई एक्साइज पॉलिसी लागू हुई थी. इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए थे. हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं. कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं. 

- नई नीति लागू होने से पहले तक दिल्ली में शराब की 60% दुकानें सरकारी और 40% प्राइवेट थीं. लेकिन नई नीति लागू होने के बाद 100% दुकानें निजी हाथों को सौंप दी गई. सरकार का तर्क था कि इससे रेवेन्यू में 3,500 करोड़ रुपये बढ़ने की उम्मीद है.

- अब 31 अगस्त को ये पॉलिसी खत्म हो गई और फिर से नई नीति लागू होगी. अब 1 सितंबर से फिर से पुरानी एक्साइज पॉलिसी लागू हो जाएगी. इसके बाद शराब की दुकानें सरकारी एजेंसियां ही चलाएंगी.

 

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