नाबालिग पहलवान से यौन शोषण केस में बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली पुलिस से क्लीन चिट दे दी है. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में पटियाला कोर्ट में 550 पेज की कैंसिलेशन रिपोर्ट फाइल कर POCSO के तहत दर्ज केस हटाने की सिफारिश की है.
दरअसल, दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 7 पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों में दर्ज दो केस में गुरुवार को दो अदालतों में चार्जशीट दाखिल की. एक चार्जशीट 6 बालिग महिला पहलवानों की शिकायत पर दर्ज केस में रॉउज एवन्यू कोर्ट में दाखिल की गई. जबकि दूसरी चार्जशीट पटियाला कोर्ट में नाबालिग की शिकायत पर दर्ज केस में दाखिल की गई. नाबालिग द्वारा लगाए गए आरोपों में दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण को क्लीन चिट दी है.
बृजभूषण सिंह को क्यों दी गई क्लीन चिट?
दिल्ली पुलिस ने 550 पेज की अपनी रिपोर्ट में बताया है कि POCSO की शिकायत को लेकर कोई सबूत नहीं मिला है. इतना ही नहीं पुलिस का कहना है कि POCSO मामले में जांच पूरी होने के बाद शिकायतकर्ता यानी पीड़िता के पिता और स्वयं पीड़िता के बयानों के आधार पर इस मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की है. ऐसे में पुलिस ने कोर्ट में बृजभूषण के खिलाफ POCSO के तहत दर्ज केस हटाने की सिफारिश की है.
नाबालिग ने बदल दिए थे बयान
दरअसल, 7 महिला पहलवानों ने 21 अप्रैल को दिल्ली पुलिस में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 28 अप्रैल को बृजभूषण के खिलाफ दो मामले दर्ज किए थे. पहला मामला 6 बालिग महिला पहलवानों की शिकायत पर था. जबकि 1 केस नाबालिग की शिकायत पर POCSO एक्ट के तहत दर्ज किया गया था.
अपने बयान में पहले जहां नाबालिग महिला पहलवान ने बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. हालांकि, बाद में उसने बयान में बदलाव करते हुए कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष पर भेदभाव का आरोप लगाया थे. दूसरे बयान में नाबालिग ने यौन शौषण का आरोप वापस लेते हुए कहा कि मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ था, मैंने बहुत मेहनत की थी, मैं डिप्रेशन में थी. इसलिए गुस्से में यौन शौषण का मामला दर्ज करवाया था.
6 महिला पहलवानों की शिकायत पर भी चार्जशीट दाखिल
6 बालिग महिला पहलवानों की शिकायत पर दर्ज केस में दिल्ली पुलिस ने रॉउज एवन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है. पुलिस ने कोर्ट में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धारा 354, 354-A एवं D के तहत चार्जशीट दाखिल की है. जानिए इन धाराओं में कितनी सजा का प्रावधान है.
IPC की धारा 354
अगर किसी महिला की मर्यादा और सम्मान को नुकसान पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना या उसके साथ गलत मंशा के साथ जोर जबरदस्ती की गई हो.
सजा: इस धारा के तहत आरोपी पर दोष सिद्ध हो जाने पर उसे कम से कम एक साल की सजा और अधिकतम 5 साल की कैद या जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है.
गैर जमानती धारा: इसके तहत किया गया अपराध एक संज्ञेय और गैर-जमानती होता है यानी मजिस्ट्रेट कोर्ट ही मामले पर विचार करने और अभियोजन पक्ष और शिकायतकर्ता की दलीलें सुनने के बाद जमानत दे सकता है.
IPC की धारा-354 ए
अगर कोई व्यक्ति शारीरिक संपर्क या अवांछित और स्पष्ट यौन संबंध का प्रस्ताव देता है या यौन अनुग्रह की मांग या अनुरोध करता है, महिला की इच्छा के बिना उसे अश्लील कंटेंट दिखाता या यौन संबंधी टिप्पणियां करता है, तो वह यौन उत्पीड़न के अपराध का दोषी होगा.
सजा: अगर कोई उप-धारा (1) के खंड (i) या खंड (ii) या खंड (iii) के तहत दोषी पाया जाता है तो, उसे कठोर कारावास की सजा सुनाई जा सकती है. इस सजा को तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माना या दोनों ही सजा सुनाई जा सकती है. अगर कोई उप-धारा (1) के खंड (iv) में दोषी पाया जाता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा हो सकती है, जिसे एक साल तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माना या दोनों की सजा मिल सकती है.
जमानती अपराध: यह मामला संज्ञेय है लेकिन जमानती अपराध है, जिसका अर्थ है कि शिकायत मिलने पर पुलिस को शिकायत दर्ज करनी होगी, लेकिन आरोपी को पुलिस स्टेशन से ही जमानत मिल सकती है.
आईपीसी की धारा 354 डी
अगर कोई पुरुष किसी महिला का पीछा करता है और संपर्क करता है, या महिला की इच्छा के विरुद्ध या साफ मना करने के संकेत के बावजूद बार-बार व्यक्तिगत बातचीत को बढ़ाने के लिए संपर्क करने का प्रयास करता है; या इंटरनेट, ईमेल या इलेक्ट्रॉनिक संचार के किसी अन्य माध्यम का इस्तेमाल कर महिला की निगरानी करता है, वह स्टॉकिंग के तहत दोषी माना जाएगा.
सजा: अगर आरोपी पहली बार दोषी पाया जाता है तो उसे तय कारावास की सजा हो सकती है, जिसके तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या उस पर जुर्माने ठोका जा सकता है. वहीं दूसरी या उससे ज्यादा बार दोषी पाए जाने पर तय कारावास की सजा हो सकती है, जिसे पांच साल तक बढ़ सकता है या जुर्माना लगाया जा सकता है.
जमानती-गैरजमानती: अगर कोई इस धारा के तहत पहली बार दोषी पाया जाता है तो उसे जमानत मिल सकती है, लेकिन अगर कोई एक से ज्यादा बार यह हरकत करता है तो यह अपराध गैर जमानती हो जाता है.
पहलवानों ने अपनी शिकायत में क्या कहा था?
पहली शिकायत- होटल के रेस्तरां में रात के खाने के दौरान मुझे अपनी मेज पर बुलाया, मुझे टच किया, छाती से पेट तक छुआ. रेसलिंग फेडरेशन के ऑफिस में बिना मेरी इजाजत के मेरे घुटनों, मेरे कंधों और हथेली को छुआ गया. अपने पैर से मेरे पैर को भी टच किया गया. मेरी सांसों के पैटर्न को समझने के बहाने से छाती से पेट तक टच किया गया.
दूसरी शिकायत- जब मैं चटाई पर लेटी हुई थी, आरोपी (बृजभूषण सिंह) मेरे पास आया, मेरे कोच उस वक्त नहीं थे, मेरी अनुमति के बिना मेरी टी-शर्ट खींची, अपना हाथ मेरे ऊपर रख दिया छाती पर और मेरी श्वास की जांच के बहाने इसे मेरे पेट के नीचे सरका दिया. फेडरेशन के ऑफिस में मैं अपने भाई के साथ थी, मुझे बुलाया और भाई को रुकने को कहा गया, फिर कमरे में अपनी तरफ खींचा जबरदस्ती करने की कोशिश की.
तीसरी शिकायत- उसने मुझे मेरे माता-पिता से फोन पर बात करने के लिए कहा, क्योंकि उस समय मेरे पास मेरा मोबाइल फोन नहीं था . आरोपी (सिंह) ने मुझे अपने बिस्तर की ओर बुलाया जहां वह बैठा था और फिर अचानक, मेरी अनुमति के बिना उसने मुझे गले लगा लिया. अपने यौन इरादों को पूरा करने के लिए, उसने मुझे सप्लीमेंट खरीदने की पेशकश करके मुझे रिश्वत देने की भी कोशिश की.
चौथी शिकायत - बृजभूषण सिंह ने मुझे बुलाया और मेरी टी-शर्ट खींची और अपना हाथ मेरे पेट के नीचे खिसका दिया. मेरी सांस की जांच के बहाने मेरी नाभि पर हाथ रख दिया.
5वीं शिकायत- मैं लाइन में सबसे पीछे थी, तभी गलत तरीके से छुआ, मैने जब दूर जाने की कोशिश की तो कंधे को पकड़ लिया.
छठी शिकायत- तस्वीर के बहाने कंधे पर हाथ रखा, मैने विरोध किया.