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अतीक अहमद क्यों नहीं जाना चाहता था यूपी? 26 दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी गुहार

माफिया से बाहुबली नेता बना अतीक अहमद जून 2019 से साबरमती जेल में बंद है. अतीक 2005 में तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी है. हाल ही में इस केस के प्रमुख गवाह उमेश पाल की 24 फरवरी को हत्या कर दी गई है. जिसके बाद अतीक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर यूपी पुलिस को ट्रांजिट रिमांड नहीं देने की मांग की थी.

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बाहुबली अतीक अहमद को गुजरात से यूपी लाया जा रहा है. (फाइल फोटो)
बाहुबली अतीक अहमद को गुजरात से यूपी लाया जा रहा है. (फाइल फोटो)

माफिया से नेता बने अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से यूपी के प्रयागराज लाया जा रहा है. यूपी पुलिस की एसटीएफ टीम काफिले के साथ सड़क के रास्ते निकल आई है. अतीक को प्रयागराज तक पहुंचने में 30 घंटे से ज्यादा वक्त लगेगा. अतीक को उमेश पाल अपहरण मामले में कोर्ट में पेश किया जाना है. इस केस में 28 मार्च को फैसला सुनाया जाना है. हालांकि, अतीक यूपी नहीं जाना चाहता था. इसके लिए उसने एक मार्च को ही सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया था. अतीक का कहना था कि उसकी सुरक्षा और जान को खतरा है.

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बता दें कि समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अतीक अहमद जून 2019 से साबरमती जेल में बंद है. वो फूलपुर से सांसद भी रहा है. उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूपी की जेल से शिफ्ट किया गया था. अप्रैल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि अतीक को गुजरात में हाई सिक्योरिटी वाली जेल में ट्रांसफर कर दिया जाए. दरअसल, तब देवरिया जेल में बंद अतीक पर रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल के अपहरण और मारपीट का आरोप लगा था. 

'राजू पाल हत्याकांड में भी नामजद है अतीक'

यूपी पुलिस का कहना है कि अतीक हाल ही में उमेश पाल हत्याकांड समेत 100 से ज्यादा आपराधिक केसों में नामजद है. वो 24 फरवरी 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या में भी मुख्य आरोपी है. राजू की उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हाल में 24 फरवरी को राजू पाल हत्याकांड में मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या कर दी गई है. इसमें अतीक और उनके गुर्गों पर वारदात को अंजाम देने का आरोप लगा है.

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'मुझे परिवार समेत झूठा फंसाया जा रहा'

इस केस में यूपी पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और अतीक और उनके समर्थकों पर शिकंजा कसा जा रहा है. इस बीच, अतीक अहमद ने मार्च की शुरुआत में सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अतीक ने दावा किया कि उसे और उसके परिवार को प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी के रूप में झूठा फंसाया गया है और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उसे फर्जी मुठभेड़ में मारा जा सकता है.

'ट्रांजिट रिमांड के बहाने खत्म किया जा सकता है'

अतीक अहमद ने अपनी याचिका में कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस उसे अहमदाबाद से प्रयागराज ले जाने के लिए उसकी ट्रांजिट रिमांड और पुलिस रिमांड की मांग कर रही है. अतीक ने आगे कहा- उसे 'वास्तव में आशंका है कि इस ट्रांजिट अवधि के दौरान उसे खत्म किया जा सकता है.'

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'कोर्ट में पेशी के बाद वापस जेल भेजा जाएगा'

इससे पहले अतीक अहमद को प्रयागराज ले जाने के लिए यूपी पुलिस की एक टीम रविवार को गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती केंद्रीय कारागार पहुंची. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उमेश पाल के अपहरण मामले में अतीक आरोपी है. इस केस में अतीक को 28 मार्च को कोर्ट में पेश किया जाना है. प्रयागराज के पुलिस आयुक्त रमित शर्मा ने बताया कि प्रयागराज की कोर्ट में मामले में आदेश पारित किया जाना है. सभी अभियुक्तों को फैसले की तारीख पर अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा और फिर वापस उनके संबंधित जेलों में भेज दिया जाएगा. 

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अगर दोषी पाया गया तो पहले केस में मिलेगी सजा

अतीक पर 100 से ज्यादा केस हैं. प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 23 मार्च को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और अतीक को पेश करने का आदेश दिया था. कोर्ट का 28 मार्च को फैसला आना है. अगर अतीक को दोषी पाया गया और सजा सुनाई गई तो ये पहला केस होगा, जिसमें उसे सजा मिलेगी.

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अतीक ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा था...

अतीक अहमद ने सुप्रीम कोर्ट से अहमदाबाद जेल से यूपी ना लाए जाने की गुहार लगाई है. अतीक ने अर्जी में कहा कि उसे यूपी में दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए गुजरात से बाहर ना भेजा जाए. उसकी सुरक्षा और जान को खतरा है. याचिका में कहा कि यूपी सरकार के कुछ मंत्रियों के बयान से ऐसा लगता है कि उनका फर्जी एनकाउंटर किया जा सकता है. सीएम आदित्यनाथ योगी ने माफिया और आरोपियों को मिट्टी में मिला देने की बात कही है. 

'डिप्टी सीएम भी जता चुके हैं आशंका'

उसने आगे कहा- उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक गाड़ी पलटने की आशंका भी जता चुके हैं. अगर उन्हें यूपी भी लाया जाए तो सेंट्रल फोर्स की सुरक्षा में लाया जाए नहीं तो उनके मामलों का ट्रायल वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए ही हो. अगर पुलिस कस्टडी में रखकर ही पूछताछ करनी है तो गुजरात में ही कोर्ट परिसर के आसपास गुजरात पुलिस की निगरानी में ही ये सब किया जाए.

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