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पहली बार अलवर से चुनाव जीते, दूसरी बार मोदी कैबिनेट में मंत्री..., जानिए कौन हैं बीजेपी के 'मिस्टर भरोसेमंद' भूपेंद्र यादव?

BJP नेता भूपेंद्र ने यादव ने 2024 में पहली बार चुनावी राजनीति में हिस्सा लिया और जीत हासिल की है. भूपेंद्र को पिछली एनडीए सरकार में राज्यसभा सांसद रहते हुए कैबिनेट मंत्री बनाया गया था. इस बार आम चुनाव में भूपेंद्र यादव ने बड़ी जीत के बाद उन्हें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. उन्होंने अलवर सीट पर उन्होंने 631992 वोट हासिल किए और कांग्रेस के ललित यादव को 48282 वोटों से शिकस्त दी.

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बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली है.
बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली है.

देश में एनडीए की लगातार तीसरी बार सरकार बन गई है. नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर हैट्रिक लगाई है. मोदी सरकार के मंत्रिमंडल के सदस्यों की तस्वीर भी साफ हो गई है. अलवर से चुनाव जीते भूपेंद्र यादव (54 साल) ने भी मंत्री पद की शपथ ली है. वे मोदी सरकार में दूसरी बार मंत्री बने हैं. वे लंबे समय से केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हैं. उन्हें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. 

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बीजेपी उन्हें राज्यसभा के जरिए संसद भेजती रही है. इस बार उन्हें लोकसभा चुनाव में उतारा गया. उन्हें मोदी और शाह का करीबी भी माना जाता है. उन्हें संघ का भी समर्थन हासिल रहा.

भूपेंद्र ने पहली बार चुनावी राजनीति में हिस्सा लिया और जीत हासिल की. भूपेंद्र को पिछली एनडीए सरकार में राज्यसभा सांसद रहते हुए कैबिनेट मंत्री बनाया गया था. इस बार आम चुनाव में भूपेंद्र यादव ने बड़ी जीत दर्ज की. अलवर सीट पर उन्होंने 631992 वोट हासिल किए और कांग्रेस के ललित यादव को 48282 वोटों से शिकस्त दी. इस सीट पर अब तक 7 बार कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव जीत चुके हैं. जबकि 4 बार बीजेपी और 2 बार जनता दल के सांसद चुने गए. 2019 में भाजपा के महंत बालकनाथ सांसद चुने गए थे.

छात्र संघ अध्यक्ष बनकर राजनीति में एंट्री की

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भूपेंद्र यादव राजस्थान के अजमेर के रहने वाले हैं. गवर्नमेंट कॉलेज अजमेर से कानून की पढ़ाई की और सुप्रीम कोर्ट के वकील भी हैं. भूपेंद्र यादव गवर्नमेंट कॉलेज अजमेर के छात्रसंघ अध्यक्ष और 1992 में गुरुग्राम में भाजयुमो के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. 2009 तक अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (ABAP) में महासचिव की भूमिका निभाई. उसके बाद 2010 में बीजेपी के नेशनल सेक्रेटरी बने. पार्टी ने 2012 में भूपेंद्र को पहली बार राज्यसभा भेजा. फिर 2013 में राजस्थान प्रभारी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी. 

साल 2014 में जब अमित शाह बीजेपी अध्यक्ष बने तो उन्होंने भूपेंद्र यादव पर और ज्यादा भरोसा जताया और जिम्मेदारियां बढ़ानी शुरू कर दीं. उन्हें प्रमोट कर राष्ट्रीय महासचिव बनाया. साल 2018 में बीजेपी ने राजस्थान कोटे से दोबारा भूपेंद्र यादव को राज्यसभा भेजा. इस बार वो चुनावी राजनीति में उतरे और जीत दर्ज की.

BJP के लकीमैन क्यों कहे जाते हैं भूपेंद्र यादव?

भूपेंद्र यादव कई राज्यों के चुनाव में बीजेपी के लिए ना सिर्फ लकी रहे हैं, बल्कि अपनी संगठन क्षमता का लोहा भी मनवा चुके हैं. अमित शाह के साथ वे बीजेपी की संगठनात्मक रणनीतियां तय करने के लिए जाने जाते हैं. ऐसी चुनावी बिसात बिछाने में माहिर हैं, जिसके जरिए बीजेपी विरोधी दलों की रणनीतियां ध्वस्त करने में सफल हो जाती है. चाहे 2013 में राजस्थान का विधानसभा चुनाव हो या फिर 2014 में झारखंड और 2017 में हुए गुजरात और उत्तर प्रदेश के चुनाव या फिर महाराष्ट्र का चुनाव. 2023 में मध्य प्रदेश के चुनाव में भी भूपेंद्र यादव को बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी. राज्यों में बीजेपी के लिए उन्होंने परदे के पीछे रहकर चाणक्य की भूमिका निभाई, जिससे बीजेपी को जीत मिली. उत्तर प्रदेश में भले ही भूपेंद्र यादव प्रभारी नहीं थे, मगर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें वॉर रूम की कमान सौंप रखी थी. वे मीडिया मैनेजमेंट भी देख रहे थे. सिर्फ बिहार ही एक ऐसा राज्य था, जहां 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार हुई थी. हालांकि लोकसभा चुनाव में बीजेपी-जदयू गठबंधन ने लगभग क्लीन स्वीप किया था.

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मिस्टर भरोसेमंद माने जाते हैं भूपेंद्र

भूपेंद्र यादव अमित शाह के 'मिस्टर भरोसेमंद' माने जाते हैं. हाल में राज्यसभा में कई अहम बिलों को पास कराने के लिए विरोधी दलों के सांसदों का भी समर्थन हासिल करने के लिए अमित शाह ने जो टीम बनाई थी, उसमें भूपेंद्र यादव की भी अहम भूमिका थी. महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में यूपी और कर्नाटक के लोग रहते हैं. माना जाता है कि इसी को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने यूपी से केशव प्रसाद मौर्य और कर्नाटक के पूर्व विधायक लक्ष्मण सावदी को भी सह प्रभारी बनाकर महाराष्ट्र भेजा है. केशव यूपी के चुनावों में भूपेंद्र के साथ काम कर चुके हैं. देखा जाता है कि प्रभारी चुनाव के दौरान ही ज्यादा सक्रिय होते हैं, मगर भूपेंद्र यादव नियुक्ति आदेश जारी होते ही संबंधित राज्य में कैंप का प्रोग्राम बना लेते हैं.

कैसा रहा भूपेंद्र यादव का करियर...

भूपेंद्र यादव मोदी 2.0 में श्रम और रोजगार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहे हैं. वे बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं. दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए. यादव का जन्म 30 जून 1969 को हरियाणा के गुड़गांव जिले के पटौदी, जमालपुर में हुआ. उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज, अजमेर से स्नातक की डिग्री और कानून की डिग्री प्राप्त की. साल 2000 में उन्हें अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद का महासचिव नियुक्त किया गया. 2009 तक वे इस पद पर रहे. वो लिब्रहान आयोग के सरकारी वकील थे, जिसने 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की जांच की. वो ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स की हत्या मामले में भी वकील थे, जिसकी जांच न्यायमूर्ति वाधवा आयोग ने की थी.
 
यादव 2010 में बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव नियुक्त हुए. जुलाई 2021 में यादव को पर्यावरण के लिए कैबिनेट मंत्री के रूप में मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया. संसदीय चयन समितियों के विशेषज्ञ के रूप में यादव की प्रतिष्ठा ने उन्हें “कमिटी मैन” की उपाधि दी है. वो दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2015 पर संयुक्त समिति के अध्यक्ष थे. सरोगेसी (विनियमन) विधेयक, 2019 पर राज्यसभा की चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं.

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