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मिलिट्री पावर पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों में भारत भी, कंगाली से जूझ रहा PAK

Global Military Powers: पिछली साल दुनिया के जिन पांच देशों ने अपनी मिलिट्री पर सबसे ज्यादा खर्च किया है, उसमें भारत तीसरे नंबर पर है. चीन एक सीढ़ी ऊपर है. लेकिन पाकिस्तान न तो इस लिस्ट में है. न ही मिलिट्री पावर में कहीं भारत के सामने टिकता है.

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World military expenditure: लखनऊ में हुए डिफेंस एक्सपो में ताकत का प्रदर्शन करता भारतीय टैंक. (फोटोः इंडिया टुडे)
World military expenditure: लखनऊ में हुए डिफेंस एक्सपो में ताकत का प्रदर्शन करता भारतीय टैंक. (फोटोः इंडिया टुडे)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अमेरिका पहले, चीन दूसरे नंबर पर
  • भारत 'आत्मनिर्भरता' की ओर बढ़ा

साल 2021 में पूरी दुनिया में मिलिट्री पर खर्च 0.7 फीसदी बढ़ा. जो बढ़कर 2113 बिलियन डॉलर्स यानी 163 लाख करोड़ रुपये हो गया. जिन पांच देशों ने अपनी मिलिट्री पर सबसे ज्यादा खर्च किया है, वो हैं- अमेरिका, चीन, भारत, यूके और रूस. इन पांचों देशों ने मिलकर ऊपर बताई गई राशि का 62 फीसदी हिस्सा खर्च किया है. विदेशी पैसों और हथियारों के बूते हेकड़ी दिखाने वाला पाकिस्तान इस सूची में कहीं नहीं है. वो तो राजनीतिक अस्थिरता की वजह से कंगाल हुआ पड़ा है. पाकिस्तान ने पिछले साल अपने रक्षा बजट में 6 फीसदी की बढ़ोतरी की थी. यानी 8.8 बिलियन डॉलर्स यानी 68,227 करोड़ रुपये. लेकिन ये भारत की तुलना में बहुत कम है. 

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स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने इसे लेकर हाल ही में एक रिपोर्ट पब्लिश की थी. जिसमें बताया था कि कोरोना काल के दूसरे साल भी मिलिट्री ताकत को बढ़ाने के लिए अलग-अलग देशों ने अपने खर्चे बढ़ा दिए हैं. पिछले साल यह आंकड़ा रिकॉर्ड ऊंचाई 2.1 ट्रिलियन डॉलर्स यानी लगभग 162 लाख करोड़ रुपये हो गया. लगातार सात सालों से मिलिट्री का खर्च बढ़ता जा रहा है. 

विकास दर नीचे था, मिलिट्री पर खर्च 6.1 फीसदी बढ़ गया

SIPRI के सीनियर रिसर्चर डॉ. डिएगो लोपेस द सिल्वा ने कहा कि कोविड पीरियड में भी, जब आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इन देशों ने मिलिट्री की ताकत बढ़ाई है. कोविड काल में महंगाई की वजह से जहां असली विकास दर नीचे था, वहीं मिलिट्री पर खर्च 6.1 फीसदी बढ़ गया. 

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अमेरिका ने मिलिट्री रिसर्च पर होने वाला खर्च 10 साल में 24% बढ़ाया. (फोटोः एपी)
अमेरिका ने मिलिट्री रिसर्च पर होने वाला खर्च 10 साल में 24% बढ़ाया. (फोटोः एपी)

अमेरिका करता है अपनी मिलिट्री पर सबसे ज्यादा खर्च

साल 2021 में अमेरिका ने अपनी मिलिट्री पर 801 बिलियन डॉलर्स यानी 62.13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया. हालांकि, इसमें साल 2020 की तुलना में 1.4 फीसदी की कमी आई थी. साल 2020 में अमेरिका का मिलिट्री बर्डेन जीडीपी का 3.7 फीसदी था, जो पिछले साल घटकर 3.5 फीसदी हो गया. अमेरिका में मिलिट्री रिसर्च पर होने वाले खर्च पर 2012 से 2021 तक 24 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. 

चीन 27 सालों से लगातार अपना रक्षा बजट बढ़ाता जा रहा है. (फोटोः एएफपी)
चीन 27 सालों से लगातार अपना रक्षा बजट बढ़ाता जा रहा है. (फोटोः एएफपी)

मिलिट्री पर ज्यादा खर्च करने वाला दूसरा देश है चीन

चीन (China) अपनी मिलिट्री पर खर्च करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है. उसने पिछले साल अपनी सेनाओं पर 293 बिलियन डॉलर्स यानी 22.72 लाख करोड़ रुपये. इसने 2020 की तुलना में अपने रक्षा बजट में 4.7 फीसदी का इजाफा किया है. चीन लगातार 27 सालों से अपनी सेना का खर्च बढ़ाता जा रहा है. 

पिछले डिफेंस एक्सपो में लखनऊ में दुनिया भर के हथियारों का प्रदर्शन किया गया था. (फोटोः इंडिया टुडे)
पिछले डिफेंस एक्सपो में लखनऊ में दुनिया भर के हथियारों का प्रदर्शन किया गया था. (फोटोः इंडिया टुडे)

भारत ने रक्षा बजट बढ़ाया ताकि आत्मनिर्भर बन सके 

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भारत अपनी मिलिट्री के लिए दुनिया में तीसरा सबसे ज्यादा खर्च करने वाला देश है. पिछले साल उसने अपनी सेनाओं के लिए 76.6 बिलियन डॉलर्स यानी 5.94 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं. जो कि 2020 की तुलना में 0.9 फीसदी ही ज्यादा है. हालांकि भारत का रक्षा बजट 2012 की तुलना में 33 फीसदी बढ़ गया है. लेकिन इस पूरी राशि में से 64 फीसदी मात्रा घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए है. ताकि विदेशों से कम से कम हथियार खरीदने पड़े. या उनकी तकनीक लाने के लिए खर्च न करना पड़े. देश को रक्षा संबंधी उत्पादन के लिए आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट में बढ़ावा किया गया है.  

रूस ने युद्ध के लिए बढ़ाया था अपना रक्षा बजट 

यूक्रेन के खिलाफ युद्ध की तैयारी रूस में काफी पहले से चल रही थी. उसने पिछले साल अपना मिलिट्री खर्च 2.9 फीसदी बढ़ा दिया था. यह करीब 65.9 बिलियन डॉलर्स यानी 5.11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा था. रूस लगातार तीन साल से अपने मिलिट्री खर्च में बढ़ावा कर रहा है. अपनी जीडीपी का 4.1 फीसदी हिस्सा वह रक्षा में करता है.

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