इंडिया टुडे के सत्र Writing from the South: Exploring regional and national sensibilities में लेखक ई.वी. रामकृष्णन, नॉवेलिस्ट टीडी रामकृष्णन और कवयित्री अनीता थम्पी ने हिस्सा लिया. इस सत्र के दौरान पैनेल ने दक्षिणी साहित्य के क्षेत्रीय पैटर्न और ट्रेंड्स के बारे में बात की.
दक्षिणी संवेदनशीलता पर बोलते हुए ईवी रामकृष्णन ने कहा कि दक्षिणी संवेदनशीलता कई रूप लेती है जो केरल से कर्नाटक से आंध्र या तेलंगाना तक भिन्न हो सकती है. ईवी रामकृष्णन ने कहा कि दक्षिणी संवेदनशीलता कई प्रकार के परिवर्तन से गुजरी है. वहीं, आगे उन्होंने बताया कि क्षेत्र समरूप नहीं हैं, क्षेत्रों में भी बहुत भिन्नताएं हैं. कार्यक्रम में बोलते हुए नॉवेलिस्ट टीडी रामकृष्णन ने कहा कि दक्षिणी संवेदनशीलता को आसानी से परिभाषित नहीं किया जा सकता है. मलयालम, तेलुगू, तमिल और कन्नड़ भाषा की अलग-अलग संवेदशीलताएं हैं, लेकिन इसके बाद भी ये भाषाएं आपस में जुड़ी हुई हैं.
उन्होंने कहा कि मलयालम और तमिल भाषा में बहुत सी समानताएं हैं, मलायलम तमिल की एक शाखा है. आगे उन्होंने बताया कि तमिल भाषा का हजारों साल पुराना इतिहास रहा है. इसके अलावा, तमिल साहित्य और मलयालम साहित्य के बारे में उन्होंने बात करते हुए कहा कि दोनों ही साहित्य पहले की तुलना में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
वहीं, इस विषय में बात करते हुए अनीता थम्पी ने कहा कि वो मानती हैं कि दक्षिणी संवेदनशीलता है. उन्हों कहा कि दक्षिणी संवेदनशीलता की शुरुआत तमिलनाडु के भक्ति काव्य, कन्नड़ के वचन काव्य और बाद में इन सभी क्षेत्रों में हुए आंदोलन से कई शताब्दियों पहले हुई थी. इस कार्यक्रम के दौरान अनीता थम्पी ने अपनी एक कविता भी दर्शकों के लिए पढ़ी.