मजदूरों की पिटाई का फर्जी वीडियो वायरल करने के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर मनीष कश्यप ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. मनीष कश्यप ने अर्जी दाखिल कर अंतरिम जमानत के साथ अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर को भी एक साथ क्लब करने की मांग की है.
बता दें कि तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों पर हमले का फर्जी वीडियो शेयर करने के मामले में आरोपी मनीष कश्यप अभी तमिलनाडु पुलिस की कस्टडी में है. पिछले सप्ताह तमिलनाडु पुलिस की टीम कोर्ट से प्रोडक्शन वारंट लेकर उसे पटना से ले गई थी.
वहां मदुरई कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस को तीन दिनों की रिमांड मिली थी जिसमें उससे पूछताछ की गई थी. इससे पहले बिहार पुलिस और आर्थिक अपराध ईकाई ने मनीष से पूछताछ की थी. बिहार पुलिस की पूछताछ के बाद कोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस की ट्रांजिट रिमांड की अर्जी को मंजूरी दी थी.
बता दें कि मनीष कश्यप के सरेंडर करने के तुरंत बाद तमिलनाडु पुलिस की टीम पटना पहुंची थी. तमिलनाडु पुलिस मनीष कश्यप को अपने साथ ले जाना चाहती थी. हालांकि बिहार पुलिस और ईओयू की पूछताछ की वजह से उस वक्त ऐसा नहीं हो पाया था. बता दें कि घर की कुर्की होने के डर से मनीष कश्यप ने 18 मार्च को जगदीशपुर ओपी में सरेंडर कर दिया था.
मनीष कश्यप के सभी बैंक खाते फ्रीज
बिहार पुलिस ने मनीष कश्यप के बैंक खातों में जमा राशि को फ्रीज करा दिया है. इसमें कुल 42.11 लाख रुपये की राशि है. बिहार पुलिस का कहना है कि इनके SBI के खाते में 3,37,496, IDFC BANK के खाते में 51,069, HDFC BANK के खाते में 3,37,463 इसके अलावा SACHTAK Foundation के HDFC BANK के खाते में 34,85,909 रुपये जमा हैं.
चुनाव भी लड़ चुका है मनीष कश्यप
साल 2020 में बिहार की चनपटिया विधानसभा सीट से त्रिपुरारी उर्फ मनीष ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था. नामांकन के समय चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में उसने बतौर प्रत्याशी अपना नाम त्रिपुरारी कुमार तिवारी बताया है. उनकी मां मधु गृहिणी हैं. पिता उदित कुमार तिवारी भारतीय सेना में रहे हैं.